SKM के सम्मेलन में जुटे किसान नेतादिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के बाद अब किसान सरकार की टेंशन बढ़ाने को तैयार हैं. अब संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने केंद्र सरकार की कृषि और व्यापार नीतियों के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है. दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय सम्मेलन में किसान नेताओं ने मंगलवार को घोषणा की कि वे 10 अगस्त को देशभर में 1,000 जगहों पर भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) समेत अन्य मुक्त व्यापार समझौतों के विरोध में बड़े लेवल पर प्रदर्शन करेंगे. इस दौरान कई जगहों पर जेल भरो, रेल रोको और सड़क रोको जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. सम्मेलन में कॉकरोच जनता पार्टी ने भी किसानों को छात्रों के समर्थन देने की बात कही है.
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की मांगें लंबे समय से अटकी पड़ी हैं और अगर सरकार ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा. उन्होंने किसानों से गांव-गांव तक अभियान चलाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को आंदोलन से जोड़ने की अपील की. संयुक्त किसान मोर्चा के सम्मेलन में सात प्रमुख मांगों पर सहमति बनी.
इनमें भारत-अमेरिका FTA नहीं करने और अन्य मुक्त व्यापार समझौतों की समीक्षा या कैंसिल किया जाए, सभी फसलों पर स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फार्मूले के अनुसार MSP की कानूनी गारंटी, किसानों और ग्रामीण मजदूरों की संपूर्ण कर्जमाफी, आत्महत्या करने वाले किसान परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा, बिजली के निजीकरण, बीज विधेयक और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) में प्रस्तावित संशोधनों (बदलावों) का विरोध प्रमुख रूप से शामिल हैं.
SKM ने सम्मेलन में यह तय किया है कि 17 अगस्त को संगठन का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, विपक्ष के नेताओं, सांसदों और विधायकों को मांगों का चार्टर सौंपेगा और उस पर कार्रवाई की मांग करेगा. वहीं, सम्मेलन में छात्र संगठन कॉक्रोच जनता पार्टी ने भी किसानों के आंदोलन के समर्थन देने का ऐलान किया है. सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि छात्र और किसान मिलकर जनहित के मुद्दों पर साथ में संघर्ष करेंगे. उन्होंने हाल के छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए किसान संगठनों के साथ एकजुटता बनाए रखने की बात कही.
वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा ने राज्यों में सम्मेलन, पदयात्राएं, ट्रैक्टर मार्च और महापंचायतों के जरिए आंदोलन को गांव-गांव तक ले जाने की रणनीति का भी ऐलान किया है. 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी शहीद दिवस पर ग्राम महापंचायतें आयोजित की जाएंगी, जबकि 26 नवंबर 2026 से नई दिल्ली सहित देशभर के 100 जगहों पर किसान मार्च और लंबे आंदोलन की तैयारी शुरू करने का आह्वान किया है.
किसान संगठनों ने कहा कि अगर केंद्र सरकार 9 दिसंबर 2021 को किसानों से किए गए लिखित आश्वासनों, खासकर MSP और कर्जमाफी से जुड़े वादों पर आगे नहीं बढ़ती तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा. सम्मेलन में दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर किसान आंदोलन के दौरान शहीद किसानों की स्मृति में स्मारक बनाने और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए प्रभावी सार्वजनिक बीमा व्यवस्था की मांग से जुड़े प्रस्ताव भी पारित किए गए.
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