वाशिम में सूखे का असर तेज: खेताें में खड़ी सोयाबीन फसल बर्बाद, फूट-फूटकर रोए किसान

वाशिम में सूखे का असर तेज: खेताें में खड़ी सोयाबीन फसल बर्बाद, फूट-फूटकर रोए किसान

महाराष्ट्र के वाशिम जिले में डेढ़ महीने से बारिश नहीं होने के कारण सोयाबीन, अरहर और कपास की फसलें सूखने लगी हैं. पांघरी धनकुटे गांव में फसल की हालत देखकर किसान अनिल राठोड फूट-फूटकर रो पड़े और सरकार से मदद की गुहार लगाई.

Soybean Crop Dried farmers cryingSoybean Crop Dried farmers crying
ज़का खान
  • वाशिम,
  • Sep 13, 2026,
  • Updated Sep 13, 2026, 12:42 PM IST

महाराष्ट्र के वाशिम जिले में बारिश के लंबे अंतराल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. पिछले डेढ़ महीने से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में खड़ी सोयाबीन, अरहर और कपास की फसलें सूखने लगी हैं. फसलों की बर्बादी देखकर किसान बेहद परेशान हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं. वाशिम जिले की कारंजा, मानोरा, रिसोड और मालेगांव तहसीलों के ग्रामीण इलाकों में बारिश की कमी का फसलों पर बुरा असर पड़ा है. किसानों ने अपने खेतों में सोयाबीन, अरहर और कपास की फसलें बोई थीं, लेकिन लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण फसलें सूखती नजर आ रही हैं. सितंबर के महीने में जिन खेतों में हरियाली दिखनी चाहिए थी, वहां अब सूखी फसलें किसानों की परेशानी बयां कर रही हैं.

सूखी सोयाबीन की फसल देखकर रो पड़े किसान

मालेगांव तहसील के पांघरी धनकुटे गांव में किसानों की हालत बेहद खराब है. यहां अपनी सूख चुकी सोयाबीन की फसल देखकर किसान अनिल राठोड फूट-फूटकर रो पड़े. उन्होंने सरकार से किसानों की मदद करने की अपील की है. किसानों का कहना है कि फसल को बचाने के लिए हजारों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन बारिश नहीं होने से सारी मेहनत और लागत बर्बाद होती नजर आ रही है.

किसान बोले- अब बारिश हुई तो भी नहीं बचेगी फसल

महिला किसान ललिता चव्हाण ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि सोयाबीन की फसल पूरी तरह सूख चुकी है. अब बारिश होने पर भी फसल को कोई फायदा नहीं होगा. उन्होंने बताया कि फसल को सींचने के लिए उपलब्ध हजारों रुपये खर्च हो चुके हैं. ऐसे में आगे क्या करना है, यह समझ नहीं आ रहा है. किसान परिवारों के सामने खेत छोड़ने या कहीं और जाने जैसी चिंता खड़ी हो गई है.

'सूखी फसल देखकर खेत जाने का भी मन नहीं करता'

कारंजा तहसील के किसानों ने बताया कि आमतौर पर सितंबर के महीने में खेतों में हरियाली रहती है और किसान अपने खेतों में काम करते नजर आते हैं. लेकिन इस बार हालात बदल गए हैं. खेतों में सूखी फसलें देखकर किसानों का वहां जाने का भी मन नहीं करता. लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसान अब अपनी फसल और भविष्य को लेकर चिंतित हैं.

किसान ने सरकार से पंचनामा और मदद की मांग की

पीड़ित किसान अनिल राठोड ने कहा कि सोयाबीन की फसल इतनी सूख गई है कि अगर एक सिरे पर माचिस जलाई जाए तो पूरा खेत जल सकता है. उन्होंने कहा कि सभी किसानों की सोयाबीन की फसल की यही हालत है. उन्होंने विधायकों, सांसदों और मंत्रियों से इस संकट की घड़ी में किसानों के साथ खड़े होने की अपील की. साथ ही जिला प्रशासन और तहसील प्रशासन से जल्द पंचनामा कराकर सरकार से किसानों को मदद दिलाने की मांग की.

किसानों के सामने बढ़ता संकट

वाशिम में बारिश की कमी से खरीफ फसलों पर संकट गहराता जा रहा है. किसान अपनी फसल बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर चुके हैं, लेकिन अब सूखती फसलों ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है. किसानों को इंतजार है कि प्रशासन नुकसान का जायजा लेकर जल्द राहत और मदद का रास्ता साफ करे.

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