
सरकारी सब्सिडी और आधुनिक कृषि यंत्रों ने मेरठ के ग्रामीण इलाकों में खेती का गणित बदलना शुरू कर दिया है. कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं और सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन (SMAM) के तहत किसानों को कृषि मशीनरी की खरीद पर 40 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल रही है. इससे महंगी कृषि मशीनें अब किसानों की पहुंच में आ रही हैं और खेती की लागत घटने के साथ समय की भी बचत हो रही है.
सब्सिडी की मदद से किसान ट्रैक्टर के साथ सुपर सीडर, बेलर, रोटावेटर, गहरी जुताई के यंत्र और फसल कटाई की आधुनिक मशीनें खरीद रहे हैं. इन मशीनों से खेत तैयार करने, बुवाई और कटाई जैसे काम कम समय में पूरे हो रहे हैं. जिन कामों में पहले दो दिन लगते थे, वे अब एक दिन में पूरे हो रहे हैं. इससे श्रमिकों की जरूरत कम हुई है और किसान कम समय में अधिक क्षेत्र में खेती कर पा रहे हैं.
मेरठ के मवाना क्षेत्र के किसान नंदकिशोर ने सरकारी योजना के तहत फार्म मशीनरी बैंक परियोजना का लाभ लेकर करीब 42 लाख रुपये की कृषि मशीनरी खरीदी है. इसमें 75 हॉर्स पावर का ट्रैक्टर, बेलर, सुपर सीडर, गेहूं कटाई की मशीन और गहरी जुताई के लिए पिलाऊं समेत कई आधुनिक कृषि यंत्र शामिल हैं. नंदकिशोर के मुताबिक, करीब 30 लाख रुपये की योजना में उन्हें लगभग 80 प्रतिशत सब्सिडी मिली, जिससे करीब 24 लाख रुपये की सब्सिडी मिली.
नंदकिशोर के पास करीब छह एकड़ जमीन है, जहां वे मुख्य रूप से आलू और गन्ने की खेती करते हैं. उनका कहना है कि मशीनों के इस्तेमाल से खेती के काम में करीब 50 प्रतिशत तक समय की बचत हो रही है. पहले जिस काम में दो दिन लगते थे, वह अब एक दिन में पूरा हो जाता है. मशीनों से श्रमिकों की जरूरत भी काफी कम हुई है.
सरकारी सहायता से खरीदी गई मशीनरी अब नंदकिशोर के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया भी बन गई है. वे अपनी खेती के अलावा आसपास के किसानों के खेतों में किराये पर मशीनें चलाते हैं. इससे उन्हें सालाना करीब चार से पांच लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो रही है.
नंदकिशोर के पास करीब पांच लाख रुपये की कीमत वाला गहरी जुताई का पिलाऊं यंत्र भी है. यह खेत की मिट्टी के नीचे बनी कठोर परत को तोड़ने में मदद करता है, जिससे मिट्टी की स्थिति बेहतर होती है और फसल के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं.
नंदकिशोर की पत्नी सीमा भी खेती के काम में उनका साथ देती हैं. सीमा के मुताबिक, मशीनरी आने से खेती का काम आसान हुआ है और परिवार की आमदनी बढ़ी है. पहले जुताई और बुवाई के लिए अलग-अलग कई बार ट्रैक्टर बुलाना पड़ता था, लेकिन अब एक ही बार में जुताई, बुवाई और खाद डालने जैसे काम पूरे हो जाते हैं. इससे मजदूरों की जरूरत भी लगभग खत्म हो गई है.
सीमा का कहना है कि अगर सरकार से सब्सिडी नहीं मिलती, तो उनके लिए इतनी महंगी मशीनरी खरीदना संभव नहीं था. उन्होंने बताया कि उनके परिवार को देखकर आसपास के कई किसानों ने भी सरकारी सब्सिडी योजनाओं का लाभ उठाया है.
नंदकिशोर के अनुसार, कृषि विभाग की मदद से ऋण लेने की प्रक्रिया भी आसान हुई. विभाग की ओर से बैंक को पत्र भेजे जाने के बाद ऋण की प्रक्रिया आगे बढ़ी. उनका कहना है कि किसान सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ उठा सकते हैं.
मेरठ में किसानों का अनुभव बताता है कि सरकारी सब्सिडी से खरीदी गई कृषि मशीनरी खेती के पारंपरिक तरीकों को बदलने के साथ रोजगार और अतिरिक्त आमदनी का साधन भी बन रही है. मशीनों से श्रम लागत और समय दोनों में बचत हो रही है, वहीं उन्हें किराये पर चलाकर किसान अपनी आय बढ़ाने के नए रास्ते भी तलाश रहे हैं.