खरीफ फसलों पर सूखे का साया, देश के जलाशयों में भी पानी का स्टॉक घटा

खरीफ फसलों पर सूखे का साया, देश के जलाशयों में भी पानी का स्टॉक घटा

इस साल जून में कम बारिश के कारण खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ गई है केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक,देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में कम है,हालांकि यह 10 साल के औसत से थोड़ा बेहतर है.सेंट्रल और नॉर्दर्न रीजन में स्थिति संतोषजनक है, लेकिन ईस्टर्न और साउदर्न राज्यों में पानी की भारी किल्लत है. अब किसानों की निगाहें जुलाई में होने वाली अच्छी बारिश पर टिकी हैं.

जलाशयों में भी पिछले साल से कम पानीजलाशयों में भी पिछले साल से कम पानी
जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • Jun 30, 2026,
  • Updated Jun 30, 2026, 11:40 AM IST

इस साल जून के महीने में बादलों ने देश के किसानों को थोड़ा मायूस किया है. 29 जून तक देश में सामान्य से करीब 33 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. इस सूखे रुख का सीधा असर खरीफ फसलों की खेती पर पड़ा है. आंकड़ों के मुताबिक, 25 जून तक खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल के मुकाबले 23 फीसदी पिछड़ चुकी है. खेतों में नमी कम होने की वजह से किसान धान, सोयाबीन, कपास और मक्के की बुवाई शुरू करने से हिचक रहे हैं.अब देश के  किसानों की पूरी नजरें जुलाई के मानसून पर टिकी हैं, क्योंकि यही महीना तय करेगा कि इस साल हमारी खेती और रसोई का बजट किस दिशा में जाएगा.

पिछले साल से कम पानी स्टाक

खेती के इस संकट के बीच केंद्रीय जल आयोग (CWC) की 18 जून 2026 की रिपोर्ट देश के जलाशयों  की एक मिली-जुली तस्वीर पेश करती है. देश के 166 प्रमुख बांधों में इस समय 50.457 बिलियन क्यूबिक मीटर BCM पानी मौजूद है, जो इनकी कुल क्षमता का सिर्फ 27.49% है. अगर बीते साल की बात करें, तो इन बांधों में 58.249 BCM पानी था, यानी इस साल पिछले साल के मुकाबले करीब 86.62% पानी ही स्टॉक में बचा है हालांकि, तसल्ली की बात यह है कि पिछले 10 साल के औसत 44.646 BCM से तुलना करें, तो यह स्टॉक 113.02% है, जो कि सामान्य से कुछ बेहतर है.

सेंट्रल और नॉर्दर्न रीजन में स्थिति मजबूत

अगर हम देश के अलग-अलग हिस्सों पर गौर करें, तो प्रतिशत के लिहाज से इस समय सेंट्रल और नॉर्दर्न क्षेत्रों के पास राहत की खबर है. मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों वाले सेंट्रल रीजन के बांधों में उनकी क्षमता का 33.77% पानी भरा हुआ है. वहीं हिमाचल, पंजाब और राजस्थान जैसे उत्तरी राज्यों के पास 33.17% पानी का स्टॉक है. इन दोनों ही इलाकों में पानी की यह मौजूदगी पिछले साल की तुलना और 10 साल के पुराने रिकॉर्ड, दोनों से काफी बेहतर है.

इन राज्यों में बढ़ा पानी का संकट

इसके विपरीत, देश के ईस्टर्न  और साउदर्न  हिस्सों में पानी को लेकर फिक्र बढ़ती जा रही है. सबसे कम पानी पूर्वी राज्योंबिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल के बांधों में है, जहाँ कुल क्षमता का केवल 20.89% हिस्सा ही भरा है.दक्षिणी राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना) का हाल भी कुछ ऐसा ही है, जहां सिर्फ 21.34% पानी बचा है. आपको बता दें कि पिछले साल इसी दौर में दक्षिणी भारत के पास 38.46% पानी का तगड़ा बैकअप था, जिसके सामने इस बार भारी गिरावट आई है.

गंगा-सिंधु में पानी भरपूर, कावेरी में कमी

नदियों के बेसि के हिसाब से देखें तो स्थिति हर जगह एक जैसी नहीं है. गंगा, सिंधु, माही, तापी, नर्मदा, साबरमती, गोदावरी और महानदी जैसी बड़ी और मुख्य नदियों के बेसिन में पानी का स्टॉक सामान्य से काफी आगे चल रहा है. कृष्णा और सुवर्णरेखा जैसी नदियों में भी पानी का स्तर सामान्य के आसपास बना हुआ है. मगर दूसरी तरफ, कावेरी नदी का बेसिन और महानदी व पेन्नार के बीच बहने वाली पूर्वी नदियां इस समय पानी की कमी से जूझ रही हैं, जिससे वहां के किसानों की चिंता बढ़ गई है.

क्या जुलाई में होगी घाटे की भरपाई?

इस मुश्किल घड़ी में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा भविष्यवाणी ने एक नई उम्मीद जगाई है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में मानसून फिर से रफ्तार पकड़ेगा और गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पूर्वी यूपी और राजस्थान के बचे हुए इलाकों को सराबोर कर देगा. कोंकण, गोवा और महाराष्ट्र में भारी बारिश का अनुमान है. अब देश की पूरी अर्थव्यवस्था और खेती की तकदीर जुलाई के पहले 15 दिनों पर टिकी है. अगर जुलाई की शुरुआत में झमाझम बारिश होती है, तो बुवाई में हुए इस शुरुआती नुकसान की भरपाई आसानी से हो जाएगी.

 


 

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