El-Nino से 12 राज्यों और 315 जिलों पर कम बारिश का बढ़ा खतरा, कृषि मंत्री शिवराज ने बनाया मॉनि‍टरिंग सेल

El-Nino से 12 राज्यों और 315 जिलों पर कम बारिश का बढ़ा खतरा, कृषि मंत्री शिवराज ने बनाया मॉनि‍टरिंग सेल

सक्रिय अल नीनो और कम बारिश की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने खेती की स्थिति की समीक्षा तेज कर दी है. केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने बताया कि कृषि मंत्रालय ने अल नीनो मॉनिटरिंग सेल बनाया है. आकलन के अनुसार 315 जिलों में कम वर्षा की आशंका है, जिनमें 111 जिले उच्च प्राथमिकता वाले हैं.

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El-Nino से 12 राज्यों और 315 जिलों पर कम बारिश का बढ़ा खतरा, कृषि मंत्री शिवराज ने बनाया मॉनि‍टरिंग सेलबैठक के बाद अल नीनो पर जानकारी देते हुए कृषि मंत्री श‍िवराज

देश के कई हिस्सों में अभी भी मॉनसून की दस्तक का इंतजार जारी है. इसी बीच सक्रिय अल नीनो के असर और कम बारिश की आशंका को लेकर केंद्र सरकार ने खेती की तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्थिति को लेकर बैठक की और संभावित प्रभाव वाले इलाकों पर विशेष निगरानी की बात कही.  कृषि मंत्रालय ने बताया कि अल नीनो और मानसून की स्थिति की निगरानी के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के स्तर पर नियमित उच्चस्तरीय समीक्षा जारी रहेगी. मंत्रालय का अल नीनो मॉनिटरिंग सेल और क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप (Crop Weather Watch Group) लगातार हालात पर नजर रखेंगे. 

111 जिलों पर सबसे ज्‍यादा असर की आशंका

बैठक के बाद कृषि मंत्री ने कहा कि अल नीनो का प्रभाव दिखाई दे रहा है और कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश की स्थिति बन रही है. मंत्रालय के आकलन के मुताबिक, देश के 315 जिलों में वर्षा कम रहने की संभावना जताई गई है. इनमें 111 जिले ऐसे हैं जिन्हें उच्च प्राथमिकता की श्रेणी में रखा गया है, जहां सिंचाई की व्यवस्था केवल करीब 25 फीसदी तक उपलब्ध है.

अल नीनो से कम बारिश का सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश समेत 12 राज्यों में रहने की आशंका है. कृषि मंत्री ने बताया कि अब तक हुई बारिश में करीब 43 फीसदी की कमी दर्ज की गई है. ऐसे में खरीफ सीजन की तैयारियों पर भी नजर रखी जा रही है. 

संवेदनशील जिलों के लिए विशेष कंटिजेंसी प्लान तैयार

बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें तय समयसीमा के भीतर जमीन पर लागू करना जरूरी है. उन्होंने जिला स्तर तक तैयारियों की नियमित समीक्षा और स्थानीय जरूरतों के मुताबिक कार्ययोजना लागू करने पर जोर दिया. बैठक में राज्यों के कृषि मंत्रियों ने भी अपने-अपने राज्यों की तैयारी और सुझाव साझा किए.

कृषि मंत्रालय ने बताया कि कम बारिश और सिंचाई की सीमित उपलब्धता वाले जिलों के लिए अलग रणनीति तैयार की गई है. जिला कृषि आकस्मिकता योजना (DACP) को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपडेट कर तत्काल लागू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बारिश की कमी की स्थिति में फसल नुकसान कम किया जा सके.

जल संरक्षण और कम पानी वाली खेती पर फोकस बढ़ा

बैठक में जल संरक्षण को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया गया. तालाब, चेक डैम, खेत-तालाब जैसी संरचनाओं को मजबूत करने और मनरेगा के तहत जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को गति देने पर जोर दिया गया. साथ ही किसानों को कम अवधि और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने तथा फसल विविधीकरण बढ़ाने की सलाह दी गई.

बीज, खाद और बाजार व्यवस्था पर पहले से तैयारी

सरकार ने बीज, उर्वरक और अन्य कृषि इनपुट की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही है. इसके साथ ही मंडियों और खुदरा बाजारों में कीमतों पर नजर रखने तथा जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आपूर्ति प्रभावित न हो.

कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), एग्रो-मौसम इकाइयों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों तक समय पर सलाह पहुंचाई जाएगी. किसानों से अपील की गई है कि पर्याप्त बारिश और खेत में नमी बनने से पहले जल्दबाजी में बुवाई न करें.

पशुधन और खाद्य सुरक्षा पर भी सरकार की नजर

बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और पीएम-किसान योजना को किसानों के लिए अहम सुरक्षा तंत्र बताया गया. राज्यों को निर्देश दिए गए कि जरूरत पड़ने पर किसानों तक ऋण, सहायता और राहत समय पर पहुंचाई जाए.

संभावित चारा संकट से निपटने के लिए राज्यों को अग्रिम स्टॉक और सप्लाई व्यवस्था बनाने को कहा गया है. साथ ही सरकार ने भरोसा जताया कि पर्याप्त भंडारण और पहले से की गई तैयारियों के कारण खाद्य सुरक्षा पर असर नहीं पड़ने दिया जाएगा.

मध्‍य प्रदेश में बुवाई शुरू नहीं हुई

मध्य प्रदेश में फिलहाल खरीफ बुवाई बड़े स्तर पर शुरू नहीं हुई है या सीमित स्तर पर ही चल रही है, इसलिए आने वाले दिनों की बारिश की स्थिति किसानों के लिए अहम रहने वाली है. सरकार का फोकस उन इलाकों पर रखा गया है, जहां सिंचाई की उपलब्धता कम है और बारिश पर निर्भर खेती अधिक होती है.

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