
किसानों की आय बढ़ाने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक नई पहल शुरू की है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को 'प्रगति' (PRAGATI) नामक राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत की. इस योजना का मकसद देशभर के 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाना और 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी (एग्री-एंटरप्रेन्योर) के रूप में तैयार करना है. सरकार का मानना है कि इससे खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकेगा और गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
'प्रगति' एक ऐसा राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसके जरिए गांवों में ऐसे प्रशिक्षित कृषि-उद्यमी तैयार किए जाएंगे जो किसानों को खेती से जुड़ी हर जरूरी जानकारी और सेवाएं उपलब्ध कराएंगे. ये कृषि-उद्यमी किसानों को आधुनिक खेती अपनाने, मिट्टी की जांच कराने, कृषि मशीनों का इस्तेमाल करने, सरकारी योजनाओं से जुड़ने, बैंक से वित्तीय सहायता लेने और अपनी फसल के लिए बेहतर बाजार खोजने में मदद करेंगे. इसका सबसे बड़ा उद्देश्य किसानों की लागत कम करना और उनकी आमदनी बढ़ाना है.
इस योजना का सबसे अधिक लाभ छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा, जिनके पास कम जमीन है और जिनकी खेती से होने वाली कमाई सीमित रहती है. सरकार का कहना है कि केवल फसल उगाने से किसानों की आय नहीं बढ़ेगी. इसके लिए किसानों को खेती के साथ-साथ फल-सब्जी उत्पादन, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और फसलों की प्रोसेसिंग जैसे कार्यों को भी अपनाना होगा. इससे किसानों की कमाई के कई नए स्रोत बनेंगे.
कृषि-उद्यमी किसानों को यह भी बताएंगे कि किस मौसम में कौन-सी फसल लगानी चाहिए, कौन-सी तकनीक अपनाने से लागत कम होगी और उत्पादन ज्यादा मिलेगा. इससे किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने में मदद मिलेगी.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि "विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब कृषि विकसित होगी और गांव समृद्ध बनेंगे." उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल अनाज का उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों की वास्तविक आय बढ़ाना है.
उन्होंने कहा कि छोटे किसानों के लिए केवल पारंपरिक खेती अब पर्याप्त नहीं है. किसानों को खेती के साथ वैल्यू एडिशन यानी अपनी उपज से नए उत्पाद तैयार करने और कृषि आधारित छोटे उद्योगों की ओर भी बढ़ना होगा. इससे किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.
सरकार इस योजना के तहत आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा देगी. किसानों को ड्रोन, डिजिटल सलाह, आधुनिक कृषि मशीनें, मिट्टी की जांच और वैज्ञानिक खेती जैसी सुविधाओं से जोड़ा जाएगा. इसके अलावा किसानों को यह भी सिखाया जाएगा कि कम लागत में अधिक उत्पादन कैसे किया जाए और बदलते मौसम के अनुसार खेती कैसे की जाए.
सरकार का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण खेती में लगातार नई चुनौतियां सामने आ रही हैं. ऐसे में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती ही किसानों को नुकसान से बचा सकती है.
'प्रगति' योजना में महिलाओं और ग्रामीण युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. बड़ी संख्या में कृषि सखी और महिला कृषि-उद्यमियों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि यदि गांव में एक प्रशिक्षित कृषि-उद्यमी तैयार हो जाए, तो वह पूरे गांव के किसानों को नई तकनीक और बेहतर खेती की जानकारी देकर उनकी आय बढ़ाने में मदद कर सकता है.
ग्रामीण युवाओं के लिए भी यह योजना रोजगार का नया अवसर लेकर आई है. प्रशिक्षण के बाद वे अपने गांव में कृषि से जुड़ी सेवाएं देकर अच्छी कमाई कर सकेंगे.
फिलहाल इस योजना की शुरुआत मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड में की जाएगी. इन राज्यों में कृषि-उद्यमियों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो सीधे किसानों के साथ काम करेगा. बाद में इस मॉडल का विस्तार अन्य राज्यों में भी किया जा सकता है.
'प्रगति' परियोजना में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भागीदार बनी हैं. इनमें पेप्सिको फाउंडेशन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन (SBIF), गेट्स फाउंडेशन, IDH, Heifer International, Environmental Defense Fund (EDF), Global Agri Entrepreneurship Academy, SAFIA, Agri Entrepreneur Growth Foundation (AEGF) और Transform Rural India Foundation (TRIF) शामिल हैं.
ये संस्थाएं कृषि-उद्यमियों को प्रशिक्षण देने, किसानों को वित्तीय सहायता से जोड़ने, डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और जलवायु के अनुकूल खेती को बढ़ावा देने में सहयोग करेंगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि 'प्रगति' केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि गांवों में कृषि आधारित रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने का बड़ा प्रयास है. यदि यह योजना सफल रहती है तो इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, आधुनिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पहले से अधिक मजबूत हो सकेगी. सरकार को उम्मीद है कि यह पहल आने वाले वर्षों में कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाएगी.
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