
देश में मई 2026 के दौरान चाय उत्पादन में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई है. टी बोर्ड के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई में कुल चाय उत्पादन 131.60 मिलियन किलोग्राम रहा, जबकि मई 2025 में यह 136.43 मिलियन किलोग्राम था. यानी एक साल में उत्पादन करीब 3.54 प्रतिशत कम हुआ. इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह दक्षिण भारत के चाय उत्पादक क्षेत्रों में प्री-मानसून बारिश की कमी मानी जा रही है. उत्तर भारत में मई के दौरान चाय उत्पादन में मामूली बढ़ोतरी हुई. यहां उत्पादन 109.86 मिलियन किलोग्राम से बढ़कर 111.72 मिलियन किलोग्राम पहुंच गया. दूसरी ओर दक्षिण भारत में उत्पादन 26.57 मिलियन किलोग्राम से घटकर 19.88 मिलियन किलोग्राम रह गया. इस तरह दक्षिण भारत में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर देश के कुल उत्पादन पर भी पड़ा.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के सबसे बड़े चाय उत्पादक राज्य असम में मई के दौरान उत्पादन 65.04 मिलियन किलोग्राम से मामूली घटकर 64.70 मिलियन किलोग्राम रहा. असम वैली क्षेत्र में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि कछार क्षेत्र में उत्पादन में थोड़ा इजाफा हुआ. वहीं, पश्चिम बंगाल ने बेहतर प्रदर्शन किया. राज्य में चाय उत्पादन लगभग 5 प्रतिशत बढ़कर 42.69 मिलियन किलोग्राम पहुंच गया. डुआर्स और तराई क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ा, जबकि दार्जिलिंग में मामूली कमी दर्ज की गई.
रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण भारत में सबसे अधिक असर तमिलनाडु पर पड़ा. यहां मई के दौरान चाय उत्पादन 19.04 मिलियन किलोग्राम से घटकर 13.63 मिलियन किलोग्राम रह गया, जो करीब 28 प्रतिशत की गिरावट है. केरल में भी उत्पादन 7.03 मिलियन किलोग्राम से घटकर 5.86 मिलियन किलोग्राम हो गया. कर्नाटक में उत्पादन 0.50 मिलियन किलोग्राम से घटकर 0.39 मिलियन किलोग्राम दर्ज किया गया. उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि मई महीने में पर्याप्त बारिश नहीं होने से चाय की नई पत्तियों की बढ़वार प्रभावित हुई.
कूनूर के चाय उत्पादक एन. लक्ष्मणन चेट्टियार ने कहा कि मई का महीना लगभग पूरी तरह सूखा रहा. समय पर बारिश नहीं होने से चाय बागानों में नई फ्लश की वृद्धि प्रभावित हुई और उत्पादन घट गया. उनका कहना है कि प्री-मॉनसून बारिश की कमी का सीधा असर दक्षिण भारत के बागानों पर देखने को मिला.
श्रेणीवार आंकड़ों के अनुसार, मई में सीटीसी चाय का उत्पादन 116.12 मिलियन किलोग्राम रहा. वहीं, पारंपरिक चाय का उत्पादन 13.35 मिलियन किलोग्राम दर्ज किया गया. इसके अलावा शेष उत्पादन ग्रीन टी श्रेणी का रहा.