
केंद्र सरकार ने कृषि मार्केटिंग व्यवस्था को मजबूत करने और कीटनाशकों के रेगुलेशन को आधुनिक बनाने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं. सरकार ने बताया कि कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2026 का मसौदा तैयार कर लिया गया है, जबकि किसानों को बेहतर बाजार, भंडारण और मूल्य दिलाने के लिए ई-नाम, एफपीओ, वेयरहाउस और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी योजनाओं का तेजी से विस्तार किया गया है. यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में लिखित जवाब के रूप में दी.
केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि मौजूदा जरूरतों और जन विश्वास अधिनियम के अनुरूप कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2026 तैयार कर लिया गया है. इसका मसौदा 30 दिसंबर 2025 को सभी मंत्रालयों, विभागों और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सुझावों के लिए भेजा गया था. इसके बाद 7 जनवरी 2026 को इसे सार्वजनिक किया गया, ताकि उद्योग, किसानों, डीलरों, विशेषज्ञों और आम लोगों से भी सुझाव लिए जा सकें.
उन्होंने कहा कि विधेयक पर राज्यों, मंत्रालयों, कीटनाशक निर्माता संगठनों, डीलरों, किसानों, गैर सरकारी संगठनों और अन्य हितधारकों से बड़ी संख्या में सुझाव हासिल हुए हैं. इन सुझावों में कीटनाशकों के रजिस्ट्रेशन, मैनेजमेंट, रेगुलेशन और डेटा संरक्षण जैसे कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं. सरकार इन सभी सुझावों पर विचार करने के बाद विधेयक को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है.
वहीं, मंत्री रामनाथ ठाकुर ने आगे एक जवाब में कहा कि कृषि मार्केटिंग राज्यों का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं और नीतिगत उपायों के जरिए राज्यों को बाजार व्यवस्था मजबूत करने और किसानों को बेहतर और लाभकारी मूल्य दिलाने में मदद कर रही है. इसके लिए डिजिटल ट्रेडिंग, किसान संगठनों, भंडारण और प्रोसेसिंग जैसी सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है.
सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी ई-नाम के माध्यम से देश की कृषि मंडियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया है. इससे किसानों को पारदर्शी ऑनलाइन बोली, बेहतर मूल्य और भुगतान सीधे बैंक खाते में मिलने की सुविधा मिल रही है. 30 जून 2026 तक ई-नाम पर 1.89 करोड़ किसान और 2.78 लाख व्यापारी रजिस्टर हो चुके हैं.
ई-नाम के जरिए अंतरराज्यीय व्यापार में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. वर्ष 2018-19 में जहां केवल 563 मीट्रिक टन कृषि उपज का अंतरराज्यीय व्यापार हुआ था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 2,984.3 मीट्रिक टन और 14.28 करोड़ रुपये के मूल्य तक पहुंच गया. अब तक कुल 28,566 मीट्रिक टन उपज का 83.95 करोड़ रुपये मूल्य का अंतरराज्यीय व्यापार हो चुका है. प्रति लॉट औसत बोली लगाने वाले व्यापारियों की संख्या भी 2.1 से बढ़कर 2.8 हो गई है, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना मजबूत हुई है.
सरकार ने बताया कि 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन की योजना के तहत देशभर में लक्ष्य पूरा कर लिया गया है. इन एफपीओ के माध्यम से किसान सामूहिक रूप से अपनी उपज बेच रहे हैं, जिससे उनकी मोलभाव की क्षमता बढ़ी है और बड़े स्तर पर कारोबार संभव हुआ है. योजना शुरू होने के बाद से इन एफपीओ का कुल कारोबार 20,340 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है.
मंत्री ने बताया कि फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सरकार ने भंडारण और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर भी जोर दिया है. कृषि विपणन अवसंरचना योजना के तहत पिछले दस वर्षों में 369.18 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाली 12,353 भंडारण परियोजनाओं और 6,901 गैर-भंडारण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है.
वहीं, एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत 18,893 गोदाम, 3,110 कोल्ड स्टोर और कोल्ड चेन परियोजनाएं और 2,105 प्रोसेसिंग यूनिट्स को ब्याज सब्सिडी दी गई है. वहीं, मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर के तहत लगभग 1.76 लाख कृषि अवसंरचना इकाइयों का निर्माण किया गया है, जिनमें पैक हाउस, कोल्ड स्टोरेज, प्री-कूलिंग और राइपनिंग चैंबर जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत 30 जून 2026 तक 1,256 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं या चलाई जा रही हैं. इन परियोजनाओं से लगभग 37.76 लाख किसानों को फायदा मिला है और प्रोसेसिंग और फसलों की बेहतर मार्केटिंग को बढ़ावा मिला है.
सरकार ने बताया कि विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के तहत पैक्स स्तर पर गोदाम बनाए जा रहे हैं. अब तक 313 पैक्स में निर्माण का काम पूरा हो चुका है, जिससे 1.80 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता तैयार हुई है. इससे किसानों को फसल तुरंत बेचने की मजबूरी कम होगी और बेहतर समय पर बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी.
केंद्र सरकार ने बताया कि नीति आयोग ने अपनी 2020 और 2025 की मूल्यांकन रिपोर्ट में समेकित कृषि विपणन योजना (आईएसएएम) को कृषि बाजार सुधार की प्रभावी पहल माना है. रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना से बाजार अवसंरचना मजबूत हुई है, एफपीओ आधारित विपणन को बढ़ावा मिला है, फसलों का वैल्यू एडिशन बढ़ा है और किसानों की बाजार तक पहुंच बेहतर हुई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 60 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने पोस्ट हार्वेस्ट और प्रोसेसिंग सुविधाओं के इस्तेमाल की पुष्टि की है, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य, उत्पाद की क्वालिटी और बाजार में ज्यादा अवसर मिले हैं.
सरकार ने कहा कि कृषि राज्यों का विषय होने के बावजूद केंद्र सरकार लोन, फसल बीमा, आय सहायता, सिंचाई, भंडारण, कृषि मशीनरी, विपणन, जैविक और प्राकृतिक खेती, डिजिटल कृषि, किसान समूहों, बीज, बागवानी और सरकारी खरीद जैसी अनेक योजनाओं के माध्यम से राज्यों के प्रयासों को लगातार सहयोग दे रही है. इन योजनाओं का उद्देश्य कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आय और बाजार तक पहुंच को मजबूत करना है.