Explainer: आखिर खाद बाजार में BRICS इतना खास क्यों है और भारत को इससे क्या फायदा होगा?

Explainer: आखिर खाद बाजार में BRICS इतना खास क्यों है और भारत को इससे क्या फायदा होगा?

BRICS देशों का समूह वैश्विक खाद बाजार में तेजी से प्रभावशाली बन रहा है. चीन, रूस और भारत दुनिया के बड़े खाद उत्पादक देशों में शामिल हैं, जबकि ब्राजील, भारत और चीन बड़े आयातक हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS देशों के बीच बढ़ता सहयोग खाद की उपलब्धता बढ़ाने और वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है.

India is set to host the 18th BRICS Summit in New Delhi on September 12-13.India is set to host the 18th BRICS Summit in New Delhi on September 12-13.
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Sep 11, 2026,
  • Updated Sep 11, 2026, 12:40 PM IST

दुनिया में खाद (फर्टिलाइजर) की मांग लगातार बढ़ रही है और अब यह केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित मुद्दा नहीं रह गया है. खाद का बाजार आज खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ विकास और राष्ट्रीय आर्थिक मजबूती से भी जुड़ गया है. ऐसे में BRICS देशों का समूह वैश्विक खाद बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हुआ दिखाई दे रहा है.

विशेषज्ञों के अनुसार BRICS में शामिल देश एक तरफ दुनिया के बड़े खाद उत्पादक हैं तो दूसरी तरफ कई सदस्य देश खाद के बड़े आयातक भी हैं. यही कारण है कि समूह के भीतर आपसी सहयोग बढ़ने पर वैश्विक खाद आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाया जा सकता है.

चीन, रूस और भारत हैं सबसे बड़े उत्पादक

कृषि विकास, व्यापार और खाद्य सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ रोमन रोमाश्किन के अनुसार BRICS देशों में चीन, रूस और भारत सबसे बड़े उर्वरक उत्पादक हैं. BRICS समूह के कुल खाद उत्पादन में इन तीन देशों की हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत है.

  • चीन अकेले 40 प्रतिशत से अधिक उत्पादन करता है.
  • रूस की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है.
  • भारत करीब 20 प्रतिशत उत्पादन करता है.

वहीं खाद आयात करने वाले देशों में ब्राजील, भारत और चीन प्रमुख हैं. वैश्विक खाद आयात में ब्राजील की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत, भारत की 11 प्रतिशत और चीन की करीब 8 प्रतिशत है.

तेजी से बढ़ रही है खाद की वैश्विक मांग

वर्ष 2018 से 2021 के बीच दुनिया में उर्वरकों की मांग में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस अवधि के अंत तक वैश्विक खाद बाजार का आकार 85.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया.

पोटाश उर्वरक की मांग लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2025 में दुनिया भर में पोटाश की खेप 7.45 करोड़ टन तक पहुंच गई, जिसमें दक्षिण-पूर्व एशिया की मांग का बड़ा योगदान रहा. विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 में भी यह मांग बढ़ती रहेगी और कुल मांग 7.4 से 7.7 करोड़ टन के बीच रह सकती है.

इसी तरह इंटरनेशनल फर्टिलाइजर एसोसिएशन (IFA) का अनुमान है कि 2026 में खनिज उर्वरकों की वैश्विक मांग 19.46 करोड़ टन से 21.11 करोड़ टन के बीच पहुंच सकती है.

खाद की कमी से खाद्य सुरक्षा पर खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि उर्वरकों की कमी दुनिया की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है. आंकड़ों के अनुसार यदि नाइट्रोजन आधारित खाद का उपयोग कम कर दिया जाए तो वैश्विक स्तर पर मक्का उत्पादन में 1.4 प्रतिशत, धान उत्पादन में 1.5 प्रतिशत और गेहूं उत्पादन में 3.1 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है.

यानी फसलों की उत्पादकता बनाए रखने के लिए खाद की उपलब्धता बेहद जरूरी है.

BRICS देशों के बीच बढ़ रहा है सहयोग

BRICS देशों के बीच खाद व्यापार लगातार बढ़ रहा है. उदाहरण के तौर पर ब्राजील दुनिया के सबसे बड़े खनिज उर्वरक आयातकों में शामिल है. उसकी जरूरतों का बड़ा हिस्सा BRICS देशों से पूरा होता है. रूस ब्राजील के कुल खाद आयात का 32 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराता है. चीन की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत है.

इसी तरह दक्षिण अफ्रीका, इथियोपिया और इंडोनेशिया भी खाद आयात पर काफी निर्भर हैं.

BRICS देशों के सप्लायर

ब्रिक्स देश दक्षिण अफ्रीका की 33 प्रतिशत खाद जरूरत पूरी करते हैं. इथियोपिया की 35 प्रतिशत मांग पूरी करते हैं. इंडोनेशिया की 47 प्रतिशत जरूरतों को पूरा करते हैं. 

विकासशील देशों को मिल सकता है बड़ा फायदा

BRICS में चीन जैसे दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक उत्पादक और उपभोक्ता और रूस जैसे सबसे बड़े निर्यातक देश शामिल हैं. इससे न केवल सदस्य देशों को लाभ मिल रहा है बल्कि ग्लोबल साउथ के कई विकासशील देशों को भी स्थिर और भरोसेमंद खाद आपूर्ति मिल रही है.

विशेषज्ञों के मुताबिक इससे फसलों के नुकसान का खतरा कम होगा और खाद्य संकट जैसी स्थितियों को रोकने में मदद मिलेगी.

खाद्य सुरक्षा में भी BRICS की मजबूत भूमिका

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड 2024 के अनुसार BRICS देशों के पास खाद्य उत्पादन और आपूर्ति की जबरदस्त क्षमता मौजूद है.

  • चीन दुनिया का सबसे बड़ा कृषि उत्पादक है.
  • भारत चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है.
  • ब्राजील सोयाबीन और चीनी का बड़ा निर्यातक है.
  • रूस अनाज का प्रमुख निर्यातक है.
  • दक्षिण अफ्रीका फल और वाइन उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

रिपोर्ट के अनुसार BRICS देश दुनिया के कुल अनाज उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं.

123 करोड़ टन से अधिक अनाज उत्पादन

नए सदस्य देशों के शामिल होने के बाद BRICS देशों का संयुक्त अनाज उत्पादन करीब 1.23 अरब मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जबकि कुल खपत लगभग 1.22 अरब मीट्रिक टन है. यह दिखाता है कि समूह वैश्विक खाद्य सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता रखता है.

कृषि क्षेत्र में पहले से चल रहा सहयोग

साल 2021 में भारत, ब्राजील, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका के कृषि मंत्रियों ने नई दिल्ली में BRICS कृषि सहयोग कार्ययोजना 2021-24 को मंजूरी दी थी. इसका मकसद कृषि, खाद्य सुरक्षा, तकनीक और व्यापार के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना था.

खाद और कृषि आज वैश्विक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं. ऐसे में BRICS देशों के पास उत्पादन, निर्यात और आयात की मजबूत क्षमता मौजूद है. चीन, रूस, भारत और ब्राजील जैसे देशों के बीच बढ़ता सहयोग न केवल खाद की उपलब्धता सुनिश्चित कर सकता है, बल्कि दुनिया की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत आधार दे सकता है. आने वाले वर्षों में BRICS समूह वैश्विक खाद बाजार का सबसे प्रभावशाली केंद्र बनकर उभर सकता है.

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