
बिहार की राजधानी पटना में प्रकृतिका महोत्सव मेले का आयोजन किया गया, जहां लोग जैविक उत्पाद खरीदने और प्राकृतिक, पारंपरिक खेती के तरीकों को समझने के लिए बड़ी संख्या में आ रहे हैं. इस महोत्सव में आम लोगों के साथ किसानों को खेती-किसानी से संबंधित पॉलिसी, सरकारी नियम-कायदे और पारंपरिक जानकारी मिल रही है. 20 राज्यों से महोत्सव में शामिल हुए जैविक किसानों में बड़ी संख्या में महिला किसान भी शामिल हैं. ये किसान रागी,कोदो, अलसी, पारंपरिक जैविक बीज और पूरी तरह जैविक उत्पाद महोत्सव में बेच रहे हैं. साथ ही फूड स्टॉल्स भी लगाए गए हैं, जहां लोग ऑर्गेनिक व्यंजनों का लुत्फ़ उठा रहे हैं.
कृषि विशेषज्ञ रोहित परख ने बताया कि करीब 2 दशक पहले भारत में जीएम कॉटन लाया गया. अब इसके बाद जीन एडिटिंग का कॉन्सेप्ट लाया जा रहा है. इसकी जरूरत और पूरे आंकड़े सामने आना जरूरी है. यूरोप ने माना है कि जीन एडिटिंग और जैविक खेती साथ नहीं हो सकते. यह भारत के पारम्परिक बीज और उनके संरक्षण के लिए खतरा है. इस पर किसानों में जागरूकता की जरूरत है.
इससे पहले महोत्सव में चल रहे सत्रों में खेती में मजदूरी, इसमें छिपी हुई बेरोजगारी, नीतियां, खेती में महिला किसानों की स्थिति, बीज संसाधन और व्यापार, बीजों का बाजार, भविष्य में बीजों का संरक्षण और लोगों का पारंपरिक भोजन सत्र आयोजित हुए. बीजों का बाजार समझते हुए रामानजनेयुलू ने बताया कि देश में बीजों का करीब 80 हजार करोड़ का बाजार है. इसमें से 50 हजार करोड़ बाजार असंगठित है. वहीं, करीब 35 फीसदी बीज बाजार हाइब्रिड है. यही कारण है कि बीज बाजार में बड़ी कंपनियां आ रही हैं.
इसके बाद हुए सेशन में खाद्य प्रणालियों में ऊर्जा के समावेश विषय पर चर्चा की गई. आगा खान फाउंडेशन के नवनीत ने कहा कि छोटे किसान सिंचाई के लिए पानी खरीदते हैं. ऐसे में बिजली का खर्च बढ़ता है, इसलिए कृषि में सोलर के उपयोग से किसानों को फायदा होता है. असर से मुन्ना झा ने कहा कि बिहार में फोटोवोल्टिक तकनीक से जमीन के दोहरे उपयोग के काफी संभावनाएं हैं, लेकिन ये तकनीक बहुत नई है. बिहार में फोटोवोल्टिक तकनीक के लिए पॉलिसी की जरूरत है. साथ ही किसानों को इसके बारे में जागरूक करना भी आवश्यक है.
उन्होंने कहा कि खेती में ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी में सरकार को सामाजिक नजरिए से देखने की जरूरत है. बिहार जैसे राज्यों में छोटे किसान हैं. पंजाब, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के अलावा छोटे किसानों वाले राज्यों के हित में भी सरकार को नीतियां बनानी होंगी. बिहार के एग्रीकल्चर में एनर्जी ट्रांजिशन यहीं की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित करना होगा.
वेंकी रामचंद्रन ने कहा कि खेती में लग रहे सोलर सिस्टम में ग्लास पैनल की जरूरत है, क्योंकि पॉलिमर पैनल से माइक्रोप्लास्टिक निकलता है, जो लंबे वक्त में खेत की मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम करता है. वहीं, आखिरी सत्र में आयोजक टीम की ओर से 10 ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों को सम्मानित किया गया. ये किसान जैविक खेती में अलग-अलग क्षेत्र और फसलों पर काम कर रहे हैं. शाम को कलाकारों ने कबीर भजन, बिहार के लोक गीतों पर प्रस्तुति दी.