
बांग्लादेश ने अमेरिका से गेहूं की खरीद शुरू कर दी है. बांग्लादेश की जरूरतों को पूरा करने के लिए 5 फरवरी को गेहूं की एक बड़ी खेप अमेरिका से चटगांव पोर्ट पहुंची. हजारों क्विंटल गेहूं से लदा अमेरिकी जहाज जैसे ही बांग्लादेश पहुंचा, वैसे ही चर्चा ये शुरू हो गई कि अब भारत के गेहूं का क्या होगा. बांग्लादेश, भारत के गेहूं का बहुत बड़ा खरीदार रहा है. एक आंकड़े के मुताबिक, साल 2022 में पूरी दुनिया में भारत ने जितना गेहूं निर्यात किया, उसका 50 परसेंट हिस्सा अकेले बांग्लादेश को भेजा गया. हालांकि मई 2022 में भारत ने अपनी घरेलू जरूरतों को देखते हुए गेहूं के निर्यात पर बैन लगा दिया और सरकार से सरकार स्तर पर गेहूं देने का प्रावधान किया. भारत की इस निर्यात पॉलिसी का फायदा उठाते हुए अमेरिका ने बांग्लादेश में अपना गेहूं बाजार बढ़ा लिया.
अमेरिका के इस निर्यात से गेहूं किसानों और गेहूं व्यापारियों में खुशी की लहर है. 'यूएस व्हीट एसोसिएट्स' ने लिखा है, बांग्लादेश के मुख्य बंदरगाह पर अमेरिकी गेहूं का आना दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते गेहूं बाजारों में से एक में अमेरिकी गेहूं किसानों के लिए एक सफलता है. वाशिंगटन में किसान नेताओं ने बांग्लादेश सरकार का धन्यवाद किया. अमेरिकी किसान नेताओं ने कहा कि बांग्लादेश ने अपने खरीद वादों को पूरा किया और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए हाई क्वालिटी वाले गेहूं खरीदने में दिलचस्पी दिखाई.
गेहूं खरीद के लिए अमेरिका और बांग्लादेश के बीच एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) किया गया है, जिसमें बांग्लादेश ने पांच सालों तक हर साल 700,000 मीट्रिक टन (25.7 मिलियन बुशेल) अमेरिकी गेहूं खरीदने का वादा किया है. इसी के साथ बांग्लादेश अमेरिकी गेहूं के लिए आठवां सबसे बड़ा बाजार बन गया है. 22 जनवरी, 2026 तक, बांग्लादेश ने लगभग 675,000 मीट्रिक टन (24.8 मिलियन बुशेल) अमेरिकी गेहूं खरीदा है.
दोनों देशों के बीच हुए करार के बाद 114,790 मीट्रिक टन (4.22 मिलियन बुशेल) अमेरिकी सॉफ्ट व्हाइट (SW) गेहूं और 58,359 मीट्रिक टन (2.14 मिलियन बुशेल) अमेरिकी हार्ड रेड विंटर (HRW) गेहूं बांग्लादेश पहुंचा है.
इस डील पर बांग्लादेश के खाद्य सचिव फिरोज सरकार का कहना है, "अब तक मिले अमेरिकी गेहूं की क्वालिटी बहुत अच्छी है, जिसमें प्रोटीन की मात्रा लगभग 14 प्रतिशत है." "भविष्य में, हम देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका से और गेहूं इंपोर्ट करेंगे."
बांग्लादेश में गेहूं के रास्ते अमेरिका की बढ़ती दखल के बीच जान लेना चाहिए कि भारत के कुल गेहूं निर्यात का लगभग आधा हिस्सा बांग्लादेश जाता रहा है. बांग्लादेश अपनी जरूरतों के लिए भारत पर बहुत ज्यादा निर्भर भी रहा है, लेकिन प्रतिबंध की वजह से उसका भरोसा डिगा है क्योंकि वह अपने घरेलू मार्केट में गेहूं और उससे जुड़े प्रोडक्ट की कीमतें स्थिर रखने और खाद्य सुरक्षा के लिए भारत से आश्वासन मांगता रहा है. गेहूं निर्यात पर लगे प्रतिबंधों के बाद दोनों देशों के बीच भरोसे में गिरावट आई और अमेरिकी गेहूं पर निर्भरता बढ़ती गई.
2020-21 में, भारत ने बांग्लादेश को 1,157,399 टन गेहूं एक्सपोर्ट किया था. मई 2022 में बैन के बाद भी, भारत ने एक्सपोर्ट की इजाजत दी, जिसमें जून 2022 के आखिर तक बांग्लादेश को 1.5 LMT (लाख मीट्रिक टन) गेहूं शामिल था. 2026 की शुरुआत में, भारत ने गेहूं से जुड़े प्रोडक्ट्स पर लगी पाबंदियों में ढील दी, जिससे 500,000 मीट्रिक टन गेहूं का आटा एक्सपोर्ट करने की इजाजत मिल गई.