
शनिवार को केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी बघेल अजमेर दौरे पर पहुंचे. वहां उन्होंने बजट और कृषि से जुड़े मुद्दों पर प्रेस से बात की. इसी दौरान उन्होंने ऐसा बयान दिया, जिसने चर्चा का विषय बन गया. मंत्री ने पशुपालन और खेती में तकनीक के बढ़ते प्रयोग पर बात करते हुए कहा कि अब बैलों का उपयोग खेती में कम हो गया है.
मंत्री बघेल ने बताया कि आज खेती में मशीनों का उपयोग इतना बढ़ गया है कि बैलों का काम लगभग खत्म हो गया है. उन्होंने कहा, “बैल अब यूज़लेस हो रहे हैं. हमारी कोशिश रहेगी कि भविष्य में केवल बछिया ही पैदा हों.” इसका मतलब यह था कि केवल गाय के बच्चे पैदा हों ताकि डेयरी किसान दूध से अच्छी आय कमा सकें.
मंत्री ने यह भी बताया कि सड़कों पर आवारा पशुओं की समस्या का एक बड़ा कारण यही है कि बैलों और बछड़ों का आर्थिक महत्व कम हो गया है. इस वजह से कई बार बछड़े सड़क पर घूमते रहते हैं.
मंत्री के इस बयान पर तुरंत लोगों ने प्रतिक्रिया दी. ‘नंदी महाराज’ जैसे हमारे लिए पवित्र और श्रद्धा के प्रतीक बैलों को “यूज़लेस” कहना लोगों को अच्छा नहीं लगा. मंत्री ने जल्दी ही अपने बयान को संभालते हुए स्पष्ट किया कि उनका यह मतलब नहीं था कि नंदी वंश पूरी तरह खत्म हो जाए. उन्होंने कहा कि प्रजनन और नस्ल सुधार के लिए कम से कम 10 प्रतिशत नंदी हमेशा रहेंगी.
प्रेस वार्ता में मंत्री ने केंद्र सरकार की ‘सेक्स सॉर्टेड सीमेन’ योजना की खूबियों के बारे में बताया. इस योजना के जरिए किसानों को ऐसा तरीका मिलेगा जिससे 90 प्रतिशत मामलों में बछिया ही पैदा होगी. इसका फायदा डेयरी किसानों को होगा क्योंकि उन्हें दूध उत्पादन के लिए केवल गायों की आवश्यकता होती है. इससे उनका आर्थिक लाभ बढ़ेगा. मंत्री ने यह भी बताया कि इस योजना से सड़कों पर घूमते हुए लावारिस सांडों की संख्या कम होगी. यानी आर्थिक दृष्टि से लाभ कम होने के कारण बैलों को छोड़ने की समस्या घटेगी.
हालांकि, मंत्री के बयान में ‘नंदी’ के लिए “यूज़लेस” शब्द का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. लोगों ने इसे लेकर कई सवाल उठाए. लेकिन मंत्री ने तुरंत स्पष्टीकरण देकर कहा कि उनका उद्देश्य केवल किसानों और डेयरी उद्योग की मदद करना था, न कि किसी धार्मिक प्रतीक को नुकसान पहुंचाना.
केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी बघेल का अजमेर दौरा और उनका बयान कृषि और पशुपालन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है. मंत्री ने यह साफ किया कि उनका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और पशुपालन को तकनीकी रूप से मजबूत करना है. ‘सेक्स सॉर्टेड सीमेन’ योजना से बछियों की संख्या बढ़ेगी, डेयरी किसान खुश होंगे और आवारा पशुओं की समस्या कम होगी. इस प्रकार, यह पहल किसानों और पशुपालन उद्योग के लिए लाभकारी साबित होगी.
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