महोबा पहुंचा किसान कारवांआल्हा-ऊदल की वीर भूमि महोबा के सिजहरी गांव में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के साझा प्रयास से चल रहे इस किसान कारवां की 75 जिलों की व्यापक कवरेज के तहत यह 21वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आधुनिक खेती की जानकारियों से रूबरू हुए. वहीं, किसानों ने अपनी समस्याएं रखीं, जिनका मौके पर ही समाधान भी बताया गया.
किसान कारवां के पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र महोबा की महिला वैज्ञानिक डॉ. अमृता ने किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकारी अस्पताल में एक रुपये के पर्चे पर इलाज होता है, उसी तरह कृषि विज्ञान केंद्र किसानों का अस्पताल है, जहां खेती-किसानी से जुड़ी हर समस्या का समाधान बिना किसी शुल्क के किया जाता है. उन्होंने गेहूं की उन्नत किस्में करण वंदना और करण शिवानी के बारे में जानकारी देते हुए इनके उत्पादन और लाभ भी किसानों को बताए.
दूसरे चरण में पशुपालन विभाग के उप पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेश पाल ने बताया कि पशुपालन केवल दुग्ध उत्पादन तक सीमित नहीं है. गोबर और गोमूत्र के प्रयोग से खेती में कार्बनिक तत्व बढ़ते हैं, जिससे मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होता है. उन्होंने मिनी नंदिनी योजना की जानकारी देते हुए बताया कि 23 लाख 70 हजार रुपये की परियोजना लागत में सरकार द्वारा 50 प्रतिशत सब्सिडी दिया जाता है, जिसमें 11 लाख 50 हजार रुपये किसानों को सीधे सहायता के रूप में मिलते हैं.
किसान कारवां के तीसरे चरण में महोबा के जिला कृषि अधिकारी दुर्गेश कुमार सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही खेत तालाब योजना विशेष रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र के किसानों के लिए बनाई गई है. उन्होंने बताया कि उद्यान विभाग की स्प्रिंकलर योजना में किसानों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है. इसके अलावा सोलर फेंसिंग योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के माध्यम से किसान 80 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं.
चौथे चरण में महोबा की मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजन सिंह ने पशुपालकों को पशुओं के सही पोषण और देखभाल की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि हरे और सूखे चारे का सही अनुपात बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि तीन भाग सूखा चारा और एक भाग हरा चारा मिलाकर खिलाने से बेहतर परिणाम मिलते हैं. साथ ही कृत्रिम गर्भाधान के सही समय और प्रक्रिया पर भी उन्होंने किसानों को मार्गदर्शन दिया.
पांचवें चरण में सिजहरी गांव के प्रधान नरेश राजपूत ने बताया कि गांव वासियों के सहयोग से उन्होंने सिजहरी को मॉडल विलेज के रूप में विकसित किया है. उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए बताया कि पशुओं के गोबर का सही तरीके से संग्रह और खेतों में प्रयोग करने से न केवल मिट्टी बल्कि किसानों का स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है.
छठे चरण में जादूगर सलमान ने रोचक अंदाज में पशुपालन और जैविक खेती के फायदे बताए. उन्होंने कहा कि पशुपालन से परिवार स्वस्थ रहता है और खेती भी खुशहाल बनती है.
कार्यक्रम के अंतिम चरण में लकी ड्रा का आयोजन किया गया, इसमें 500 रुपये के 10 लकी ड्रा निकाले गए. वहीं, पहला पुरस्कार हरदयाल को मिला, जिन्हें 3000 रुपये की नकद राशि दी गई. दूसरा पुरस्कार समूह सखी प्रियंका गुप्ता ने जीता, जिन्हें 2000 रुपये की राशि दी गई.
किसान कारवां यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. किसान तक का किसान कारवां यूपी के हर जिले में पहुंचकर किसानों, ग्राम प्रधानों, प्रगतिशील किसानों और महिला किसानों को एक साझा मंच देगा. यहां खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी मिलेगी, सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा और उन सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं पर चर्चा होगी, जो आज के समय में किसानों के लिए वास्तव में उपयोगी हैं.
हमारे इस किसान कारवां में हर पड़ाव पर होंगे विशेषज्ञों के व्याख्यान, आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की प्रदर्शनियां, प्रशिक्षण सत्र और किसान गोष्ठियां. साथ ही, उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने नवाचार, मेहनत और समझदारी से खेती को एक नई दिशा दी है. किसानों के लिए यह मंच अनुभव साझा करने का भी होगा और सीखने का भी.
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान.
2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना.
3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में.
4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए.
5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी.
6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं.
7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है.
8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर
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