
गंगा नदी के किनारे बसा ‘किसान तक’ का किसान कारवां रविवार को उन्नाव जिले के कटरी पीपरखेड़ा गांव पहुंचा। प्रदेश के 75 जिलों में चल रही इस विशेष कवरेज के तहत यह कारवां का 25वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर आधुनिक खेती से जुड़ी जानकारियां हासिल कीं. इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारियों, पशुपालन विभाग के अधिकारियों और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई. विशेषज्ञों ने किसानों को उन्नत बीजों के चयन, फसल संरक्षण, मृदा परीक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती के तरीकों के साथ-साथ सरकारी योजनाओं की जानकारी दी.
धान, गेहूं जैसी परंपरागत फसलों की खेती सहित सब्जियों की खेती के लिए मशहूर जिले में जब किसान तक किसान कारवां पहुंचा तो पूरे गांव के किसानों के चेहरों पर एक अलग ही खुशी का माहौल देखने को मिला. वहीं कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं. उनके सवालों का जवाब विभाग के अधिकारियों द्वारा विभिन्न चरणों के माध्यम से जानकारी देकर दिया गया. साथ ही इफको द्वारा अपने कृषि उत्पादों से जुड़ी जानकारी दी गई. इस दौरान अतिथियों सहित प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया गया. वहीं लकी ड्रा के जरिए कुल 12 किसानों को नकद राशि भी वितरित की गई.
पहले चरण में पशु चिकित्सा अधिकारी एमवीयू सदर उन्नाव के डॉ. जगदीश प्रसाद ने किसानों को पशु एंबुलेंस के जरिए मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि किसान हेल्पलाइन नंबर 1962 पर फोन करके निःशुल्क मोबाइल वेटनरी यूनिट मंगवा सकते हैं. इस यूनिट में एक पशु चिकित्सक मौजूद रहता है, जो पशुओं का इलाज किसानों के घर पर करता है.
दूसरे चरण में स्वयं सहायता समूह से बैंक दीदी पूनम ने बताया कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां वह अपनी एक अलग पहचान बनाने के साथ ही आर्थिक तौर पर समृद्ध भी हो सकती हैं. साथ ही एक अच्छी कमाई भी कर सकती हैं. साथ ही खुद के साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बना सकते हैं.
तीसरे चरण में जिला कृषि अधिकारी उन्नाव के शशांक चौधरी ने कहा कि आज किसानों को अपनी आमदनी बढ़ानी है तो फसल के विविधिकरण पर ध्यान देना होगा. सब्जियों सहित फलों की खेती से किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि उन्नाव जिले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह दो बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है, जिससे किसान सब्जी सहित फलों की खेती करके अपनी आमदनी को परंपरागत फसलों की तुलना में अधिक कर सकते हैं. साथ ही उन्होंने फूल की खेती पर जोर देते हुए किसानों से कहा कि किसान फूल की खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं, क्योंकि उन्नाव जिला यूपी के लखनऊ और कानपुर दो बड़े शहरों के नजदीक बसा हुआ है और यहां की मिट्टी फलों से लेकर सब्जी और फूलों की खेती के लिए काफी अच्छी है. किसानों को उन्होंने एफपीओ के जरिए खेती करने का सुझाव दिया. इसके साथ उन्होंने किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड को लेकर भी पूरी जानकारी दी.
चौथे चरण में डॉक्टर राजेश, पशु चिकित्सा अधिकारी, ने बताया कि अब कृषि के तहत जैसे किसानों को केसीसी यानी किसान क्रेडिट कार्ड के तहत राशि दी जाती है, उसी तरह अब पशुओं को लेकर भी केसीसी की व्यवस्था की गई है.इसमें किसान अपने पशुओं के देखभाल में आ रहे पैसों की किल्लत को कम कर सकते हैं. इसको ध्यान में रखकर यह सुविधा सरकार की ओर से शुरू की गई है. इसमें किसान अपने बैंक और पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करके इस योजना से जुड़ी पूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं.
पांचवें चरण में इफको प्रतिनिधि शैलेन्द्र शुक्ला ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के महत्व के बारे में बताया. उन्होंने किसानों को इन दोनों उत्पादों के सही उपयोग के बारे में जानकारी दी. इसके साथ ही इन उत्पादों का कितना प्रयोग और किस चरण में करना है, इस पर भी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इन दोनों उत्पादों के उपयोग से किसान अपनी कमाई बढ़ाने के साथ मिट्टी की उर्वराशक्ति को भी बढ़ा सकते हैं.
छठवें चरण में मैजिशियन सलमान द्वारा खेती से जुड़ी जानकारी अपनी कला के जरिए बताई गई. साथ ही उन्होंने किसानों को गोबर खाद और पशुपालन करने का सुझाव दिया.
आखिर में सातवें चरण में लकी ड्रा का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपए और दूसरा पुरस्कार 2000 रुपए धनी राम को मिला. वहीं प्रथम पुरस्कार महिला किसान नन्हकी को 3000 रुपए दिए गए.
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