Saffron Production: कश्‍मीर में 5 साल में 90.28 मीट्रिक टन केसर उत्‍पादन हुआ, इतने रकबे में होती है खेती

Saffron Production: कश्‍मीर में 5 साल में 90.28 मीट्रिक टन केसर उत्‍पादन हुआ, इतने रकबे में होती है खेती

जम्मू-कश्मीर में केसर ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ी है. सरकार के मुताबिक बीते पांच साल में 90 मीट्रिक टन से ज्यादा उत्पादन हुआ, जबकि निर्यात ने भी रिकॉर्ड छुआ. नेशनल मिशन के असर और किसानों को मिले बेहतर दामों ने तस्वीर बदल दी है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Feb 13, 2026,
  • Updated Feb 13, 2026, 12:06 PM IST

जम्मू-कश्मीर में केसर उत्पादन को लेकर सरकार ने विधानसभा में विस्तृत जानकारी दी है, जिसमें बीते पांच वर्षों में इस पारंपरिक फसल की वापसी और बेहतर होती उत्पादकता का जिक्र किया गया है. प्रदेश सरकार ने कहा कि 2021 से 2025 के बीच केंद्र शासित प्रदेश में कुल 90.28 मीट्रिक टन केसर का उत्पादन दर्ज किया गया, जबकि 80 मीट्रिक टन से अधिक केसर का निर्यात हुआ है.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक हसनैन मसूदी के सवाल के लिखित जवाब में कृषि मंत्री जाविद अहमद डार ने बताया कि नेशनल मिशन ऑन सैफरन शुरू होने से पहले केसर की खेती का रकबा और उत्पादकता दोनों ही गंभीर गिरावट के दौर से गुजर रहे थे. वर्ष 2000-01 में उत्पादकता घटकर 1.27 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई थी, जिससे उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ.

5 सालों में इतना रहा केसर का उत्‍पादन

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में केसर उत्पादन 17.33 मीट्रिक टन रहा, जो 2021-22 और 2022-23 में लगभग 15 मीट्रिक टन के आसपास था. इसके बाद 2023-24 में इसमें उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला और उत्पादन 23.53 मीट्रिक टन तक पहुंच गया. 2024-25 में यह 19.58 मीट्रिक टन रहा. इस अवधि में औसत उत्पादकता 4 से 6.33 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच दर्ज की गई.

केसर का रकबा 3,715 हेक्टेयर पर स्थिर

मंत्री ने बताया कि 2010-11 में शुरू की गई “इकोनॉमिक रिवाइवल ऑफ जम्मू-कश्मीर सैफरन सेक्टर” परियोजना ने गिरावट के रुझान पर ब्रेक लगाया. इसके बाद से केसर की खेती का कुल रकबा 3,715 हेक्टेयर पर स्थिर है, जिसमें कश्मीर संभाग के 3,665 हेक्टेयर और किश्तवाड़ के 50 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल हैं.

मिशन के तहत 2,598.73 हेक्टेयर क्षेत्र का कायाकल्प किया गया, जहां 2023-24 में उत्पादकता 6.96 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंची. हालांकि, कुछ वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं ने नुकसान भी पहुंचाया. 2014-15 और 2017-18 में बाढ़ व सूखे जैसे हालात के कारण उत्पादकता में गिरावट आई और यह 1.50 से 1.75 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक सिमट गई.

सैफरन पार्क बनने से किसानों को मिल रहा बेहतर दाम

पोस्ट-हार्वेस्ट प्रोसेसिंग को लेकर मंत्री ने कहा कि किसानों द्वारा भारतीय कश्मीर केसर और प्रौद्योगिकी केंद्र संस्थान (IIKSTC) में लाए गए केसर का सालाना रिकॉर्ड रखा जा रहा है, जहां प्रोसेसिंग, जीआई टैगिंग और बिक्री की सुविधा दी जाती है. सैफरन पार्क की स्थापना से किसानों को बेहतर दाम मिले हैं और कीमतें 80 हजार रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2021-22 में 2.20 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गईं.

पीएम सैफरन मिशन पर दी जानकारी

प्रधानमंत्री सैफरन मिशन की वित्तीय स्थिति पर मंत्री ने बताया कि 2010-11 में 400.11 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना स्वीकृत हुई थी. अब तक केंद्र की ओर से करीब 269.9 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जबकि कुल खर्च 321.37 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.

सिंचाई व्यवस्था के तहत 124 सामुदायिक बोरवेल की योजना बनाई गई थी, जिनमें से 85 कृषि विभाग को सौंपे जा चुके हैं. शेष बोरवेल टेंडर प्रक्रिया और रखरखाव खर्च को लेकर किसानों की अनिच्छा के कारण अटके हुए हैं. सरकार ने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद केसर क्षेत्र में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों मोर्चों पर सुधार साफ दिख रहा है. (पीटीआई)

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