
गंगा और रामगंगा नदियों के किनारे बसा बदायूं जिला अपनी गंगा-जमुनी तहजीब के साथ-साथ कृषि की संपन्नता के लिए भी जाना जाता है. यहां के खेतों में गेहूं, गन्ना, धान, आलू, दालें और बागवानी फसलों की खेती जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. खेती की इसी मजबूत नींव को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के संयुक्त प्रयास से संचालित ‘किसान तक’ का किसान कारवां अपने तीसरे पड़ाव पर बदायूं जिले के लखनपुर गांव पहुंचा. राज्य के 75 जिलों में प्रस्तावित इस अभियान के तहत बदायूं तीसरा जिला रहा, जहां किसानों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की.
किसानों को खेती में समय के साथ हो रहे बदलाव, नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा दी गई. कार्यक्रम के दौरान जादूगर द्वारा प्रस्तुत रोचक कलाओं ने किसानों का खूब मनोरंजन किया, वहीं इन कलाओं के माध्यम से खेती से जुड़ी उपयोगी जानकारियां भी साझा की गई.
पूरे दिन चले किसान कारवां के दौरान अलग-अल- चरणों में किसानों को खेती, पशुपालन और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी दी गई. वहीं, प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और आधुनिक कृषि पद्धतियों पर चर्चा की. कार्यक्रम कुल छह चरणों में आयोजित किया गया. इसके साथ ही इफको के प्रतिनिधि ने किसानों की आय बढ़ाने से जुड़ी जानकारियां दीं, और इफको का विशेष योगदान रहा.
पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र बदायूं के डॉ. रौशन कुमार सिंह (पशुधन वैज्ञानिक) ने एफएमडी रोग, जो बदायूं जिले में फैला हुआ है, उसके बारे में विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने इसके इलाज के देसी जुगाड़ के बारे में किसानों को बताया. इसके साथ ही उन्होंने विश्व में भारत के पशुधन के योगदान के बारे में भी पूरी जानकारी दी. पशुधन वैज्ञानिक से पशुपालक किसानों ने पशुओं में बांझपन की समस्या के बारे में सवाल किया, जिसके बारे में उन्होंने जानकारी दी. साथ ही पशुओं के सही खानपान को लेकर उन्होंने किसानों को पूरी जानकारी दी.
दूसरे चरण में जिला कृषि अधिकारी मनोज रावत द्वारा डिजिटल क्रॉप सर्वे को लेकर जानकारी दी गई. उन्होंने बताया कि जिले में डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से कौन-सी फसल कितने क्षेत्र में बोई गई है. साथ ही उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री के होने वाले फायदों के बारे में जानकारी दी. इसके अलावा कृषि अधिकारी द्वारा दीमक की रोकथाम को लेकर उसके इलाज के बारे में भी बताया गया. उन्होंने मक्का की खेती को लेकर कहा कि जिले में इसकी अच्छी खेती हो रही है. जिला कृषि अधिकारी ने नकली खाद और बीजों को लेकर भी पूरी जानकारी दी.
तीसरे चरण में पशुपालन विभाग से बदायूं जिले के उपमुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अब्दुल रहीम ने पशुओं में होने वाले रोगों सहित सरकार की ओर से जिले में चल रही पशुओं से जुड़ी योजनाओं के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि पशुओं के पेट से जुड़े कीटों की दवाइयां पर्याप्त मात्रा में सभी पशु अस्पतालों में उपलब्ध हैं. वहीं, चौथे चरण में जादूगर द्वारा अपने कलाओं के जरिए किसानों को खेती से जुड़ी जानकारी दी गई.
पांचवें चरण में मनोज कुमार, सीनियर टेक्निकल असिस्टेंट (ग्रुप-ए), कृषि विभाग द्वारा किसानों को राज्य सरकार द्वारा कृषि यंत्रों पर मिल रहे सब्सिडी को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई. बताया गया कि सरकार द्वारा मिलने वाली सुविधाओं को कैसे हासिल करें. साथ ही उन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि योजना की राशि न आने को लेकर भी पूरी जानकारी दी.
छठवें चरण में अनिल कुमार, इफको बदायूं द्वारा नैनो यूरिया के उपयोग को लेकर पूरी जानकारी दी गई. साथ ही गेहूं में इसके उपयोग को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई और प्रगतिशील किसान एफपीओ के अमन राठौर ने अपने अनुभव साझा किए.
किसान कारवां यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. किसान तक का किसान कारवां यूपी के हर जिले में पहुंचकर किसानों, ग्राम प्रधानों, प्रगतिशील किसानों और महिला किसानों को एक साझा मंच देगा. यहां खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी मिलेगी, सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा और उन सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं पर चर्चा होगी, जो आज के समय में किसानों के लिए वास्तव में उपयोगी हैं.
हमारे इस किसान कारवां में हर पड़ाव पर होंगे विशेषज्ञों के व्याख्यान, आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की प्रदर्शनियां, प्रशिक्षण सत्र और किसान गोष्ठियां. साथ ही, उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने नवाचार, मेहनत और समझदारी से खेती को एक नई दिशा दी है. किसानों के लिए यह मंच अनुभव साझा करने का भी होगा और सीखने का भी.