पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 में Croplife India ने फसल संरक्षण पर दिया जोर, नकली उत्पादों को लेकर किया आगाह

पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 में Croplife India ने फसल संरक्षण पर दिया जोर, नकली उत्पादों को लेकर किया आगाह

पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 में क्रॉपलाइफ इंडिया ने किसानों को फसल संरक्षण उत्पादों के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया. नकली दवाओं के खतरे, सही खुराक और लेबल पालन पर जोर रहा. लोक गीत के जरिए तकनीकी बातें आसान भाषा में समझाई गईं.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Feb 25, 2026,
  • Updated Feb 25, 2026, 8:03 PM IST

नई दिल्‍ली में “विकसित कृषि-आत्मनिर्भर भारत” थीम के साथ शुरू हुए पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 में फसल संरक्षण उत्पादों के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया. फसल संरक्षण क्षेत्र की अनुसंधान-आधारित कंपनियों के संगठन क्रॉपलाइफ इंडिया (Croplife India) ने इस राष्ट्रीय मंच पर किसानों को जागरूक करने और नकली व अवैध उत्पादों के खतरे से सतर्क करने पर विशेष जोर दिया.

पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 का आयोजन आईसीएआर–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान परिसर में किया गया है, जहां तीन दिनों के लिए 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं. मेले में देशभर से एक लाख से ज्यादा किसान, कृषि उद्यमी, शोधकर्ता, राज्य अधिकारी और छात्र हिस्सा ले रहे हैं.

किसानों के साथ वन-टू-वन बातचीत

इस दौरान क्रॉपलाइफ इंडिया ने तकनीकी स्टीवर्डशिप को सीधे खेत-स्तर की व्यवहारिक जानकारी में बदलने पर जोर दिया. संगठन की ओर से किसानों के साथ वन-टू-वन संवाद, विशेष रूप से तैयार किए गए शैक्षिक ब्रोशर और सूचनात्मक बैनर के माध्यम से सही खुराक, छिड़काव के तरीके, सुरक्षा उपाय, भंडारण नियम और उत्पाद की प्रामाणिकता पहचानने के तरीकों की जानकारी दी जा रही है. 

मेले के पहले दिन किसानों को यह भी समझाया गया कि फसल संरक्षण उत्पाद केवल लाइसेंस प्राप्त डीलरों से ही खरीदें, पक्का बिल लें, पैकेजिंग और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें और लेबल पर दिए गए निर्देशों का सख्ती से पालन करें. क्रॉपलाइफ इंडिया के स्टॉल का सबसे बड़ा आकर्षण एक लोक शैली का जीवंत प्रदर्शन रहा, जिसमें खास तौर पर रचे गए हिंदी गीत के जरिए किसानों तक संदेश पहुंचाया गया.

गीत के जरिए दवा प्रयोग की दी समझाइश

गीत के बोलों के माध्यम से यह बताया गया कि कितनी मात्रा में दवा का प्रयोग करना है, कैसे घोल बनाना है, कब छिड़काव करना है, फसल कटाई से पहले प्रतीक्षा अवधि क्या होनी चाहिए और कौन-कौन से सुरक्षा उपाय जरूरी हैं. सरल और रोजमर्रा की भाषा में दिए गए इन संदेशों ने तकनीकी जानकारी को याद रखने योग्य और व्यवहारिक बना दिया.

विकसित कृषि और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्‍य पर काम

आयोजकों का मानना है कि परिचित सांस्कृतिक माध्यमों के जरिए गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज को समझाना किसानों के लिए ज्यादा प्रभावी साबित होता है. यही वजह है कि यह पहल न केवल सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारी को सुलभ बना रही है, बल्कि सतत और जिम्मेदार खेती की दिशा में भी मजबूत कदम मानी जा रही है.

पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 में क्रॉपलाइफ इंडिया की सक्रिय भागीदारी विकसित कृषि और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप जिम्मेदार फसल संरक्षण, किसान जागरूकता और टिकाऊ कृषि प्रथाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है.

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