
केंद्र सरकार ने आगामी त्योहारी सीजन से पहले गेहूं के भंडारण को लेकर राहत भरा कदम उठाया है. बाजार में पर्याप्त आपूर्ति और कीमतों में नरमी के संकेतों को देखते हुए सरकार ने 27 मई 2025 को जारी गेहूं स्टॉक लिमिट आदेश को वापस लेने का फैसला किया है. यह आदेश सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू था, जिसे अब प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया गया है. सरकारी आकलन के मुताबिक, निजी क्षेत्र के पास इस समय गेहूं का भंडार बीते साल की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है. सरकार के इस फैसले के बाद व्यापारी अपने हिसाब से गेहूं का भंडारण कर सकेंगे.
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में निजी इकाइयों के पास कुल गेहूं स्टॉक करीब 81 लाख मीट्रिक टन दर्ज किया गया है. यह सालाना आधार पर लगभग 30 लाख मीट्रिक टन ज्यादा है, जो देश में सप्लाई के लिहाज से सहज स्थिति को दर्शाता है.
एक सरकारी बयान में कहा गया कि कीमतों के मोर्चे पर भी दबाव कम हुआ है. उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, थोक बाजार में गेहूं के दामों में गिरावट दर्ज की गई है. पिछले वर्ष जहां थोक कीमतें करीब 2970 रुपये प्रति क्विंटल थीं, वहीं अब यह घटकर लगभग 2852 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गई हैं. यानी बाजार में मांग अपेक्षाकृत कमजोर है और आपूर्ति पर्याप्त बनी हुई है.
वहीं, गेहूं की खेती के रकबे में भी सकारात्मक संकेत मिले हैं. चालू रबी सीजन में गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़कर लगभग 334.17 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जो पिछले साल के 328.04 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है और सामान्य अनुमान से भी ऊपर है. यह स्थिति किसानों के गेहूं की ओर झुकाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद पर भरोसे को दर्शाती है.
सरकार ने कहा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली, अन्य कल्याणकारी योजनाओं और जरूरत पड़ने पर बाजार हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त गेहूं उपलब्ध है. हालांकि, स्टॉक लिमिट हटाई गई है, लेकिन सभी गेहूं भंडारण इकाइयों को हर शुक्रवार को अनिवार्य रूप से अपने स्टॉक की जानकारी खाद्य स्टॉक पोर्टल पर दर्ज करनी होगी. विभाग लगातार कीमतों और भंडार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है, ताकि देशभर में गेहूं की सहज और सुचारु आपूर्ति बनी रहे.