
इथेनॉल मिले पेट्रोल के भविष्य को लेकर नए विवाद और अटकलों के बीच, सरकारी सूत्रों ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया है कि भारत E-25 (25% इथेनॉल मिश्रण) शुरू करने की तैयारी कर रहा है. सूत्रों ने जोर देकर कहा कि ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है और मौजूदा ब्लेंडिंग स्तर से आगे कोई भी कदम पूरी तरह से वैज्ञानिक परीक्षण पर निर्भर करेगा.
सूत्रों ने 'इंडिया टुडे' को बताया कि चल रहे E-20 पेट्रोल प्रोग्राम के बारे में "चिंता करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है". सूत्रों ने इस बात पर जोर दिया कि टेस्ट और वेरिफिकेशन के बाद देश भर में ढाई साल से ज्यादा समय से इथेनॉल-ब्लेंडेड ईंधन का इस्तेमाल हो रहा है.
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इथेनॉल के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है-
E-15 इथेनॉल अप्रैल 2023 से चल रहा है.
E-19 इथेनॉल अप्रैल 2024 में शुरू हुआ.
E-20 इथेनॉल अप्रैल 2025 से चल रहा है.
अधिकारियों ने कहा कि यह बदलाव धीरे-धीरे और अचानक नीतिगत बदलावों के बजाय तकनीकी आकलन के आधार पर किया गया है. 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन इथेनॉल मिसे पेट्रोल पर चल रहे हैं.
सरकारी सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में लगभग 20 करोड़ पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहन और लगभग 20 लाख पेट्रोल वाले चार-पहिया वाहन इथेनॉल मिले पेट्रोल का उपयोग कर रहे हैं, जो यह बताता है कि प्रोग्राम ने बिना किसी बड़ी तकनीकी समस्या के पहले ही बड़े पैमाने पर सफलता हासिल कर ली है.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा ब्लेंडिंग प्रोग्राम ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों, ईंधन कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों की विस्तृत समीक्षा के बाद ही शुरू किया गया था.
उन रिपोर्टों का जवाब देते हुए जिनमें दावा किया गया था कि E-25 ब्लेंडिंग का कार्यक्रम पहले ही तय हो चुका है, सरकारी सूत्रों ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया. एक सूत्र ने कहा, "यह बिल्कुल गलत है. जब टेस्ट ही अभी चल रहा है, तो E-25 का कार्यक्रम कैसे तय किया जा सकता है?"
अधिकारियों के अनुसार, E-25 ईंधन की अनुकूलता के लिए कई ऑटोमोबाइल ब्रांडों और अलग-अलग वाहन मॉडलों में परीक्षण अभी भी किया जा रहा है. सरकार को अंतिम परीक्षण के रिजल्ट नहीं मिले हैं, और टेस्ट की प्रक्रिया पूरी होने तक कोई नीतिगत निर्णय नहीं लिया जाएगा.
सूत्रों ने जोर देकर कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग में भविष्य में कोई भी वृद्धि पूरी तरह से वाहन सुरक्षा, इंजन के प्रदर्शन और टिकाऊपन से जुड़े वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होगी.
यह स्पष्टीकरण तब आया है जब सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच इस बात को लेकर चिंताएं सामने आईं कि क्या मौजूदा गाड़ियां ज्यादा इथेनॉल वाले मिश्रण (ब्लेंड) के साथ चल पाएंगी. अधिकारियों ने कहा कि E-25 के लिए कोई प्रस्ताव लागू नहीं किया जा रहा है और लोगों से अपील की कि वे अटकलों वाली खबरों पर भरोसा न करें.
सरकारी सूत्रों ने यह भी कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर फैलाई जा रही गलत जानकारी भारत की ऊर्जा रणनीति को कमजोर करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा हो सकती है. सूत्रों के अनुसार, इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर फैलाई जा रही घबराहट उन ताकतों की एक "अंतरराष्ट्रीय साजिश" लगती है जो नहीं चाहतीं कि भारत ऊर्जा के मामले में ज्यादा आत्मनिर्भर बने. उनका तर्क है कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते कच्चे तेल के बाजारों में से एक है, और घरेलू स्तर पर इथेनॉल उत्पादन के जरिए आयातित तेलों पर निर्भरता कम करना एक रणनीतिक राष्ट्रीय लक्ष्य है.
अधिकारियों ने फिर से कहा कि भारत के इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के हर चरण को वैज्ञानिक परीक्षण, रेगुलेटरी मंजूरी और तकनीकी जांच के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है, और ब्लेंडिंग के स्तर में भविष्य में किसी भी बढ़ोतरी का फैसला सभी जरूरी अध्ययन पूरे होने के बाद ही लिया जाएगा.(पीयूष मिश्रा की रिपोर्ट)