Explained: होर्मुज से राहत, लेकिन खाद की कीमतों पर खतरा बरकरार

Explained: होर्मुज से राहत, लेकिन खाद की कीमतों पर खतरा बरकरार

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारत के लिए खाद और उसके कच्चे माल से भरे 15 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर चुके हैं. सरकार का कहना है कि देश में खाद का पर्याप्त भंडार मौजूद है, लेकिन वर्ल्ड बैंक ने चेतावनी दी है कि 2026 में यूरिया, DAP और MOP की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. जानिए भारत में खाद की उपलब्धता, कीमतों और भविष्य की चुनौतियों की पूरी तस्वीर.

Fertilizer ShortageFertilizer Shortage
रवि कांत सिंह
  • New Delhi,
  • Jul 07, 2026,
  • Updated Jul 07, 2026, 1:56 PM IST

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन पर उसके असर के बीच भारत के लिए राहत की खबर आई है. खाद और खाद बनाने के कच्चे माल से लदे 15 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से गुजर चुके हैं और भारत की ओर बढ़ रहे हैं. सरकार का मानना है कि इन जहाजों के पहुंचने और पांच अन्य जहाजों के रवाना होने के बाद देश में खाद की उपलब्धता को लेकर किसी तरह की समस्या नहीं रहेगी. हालांकि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि वैश्विक बाजार में खादों की कीमतों पर दबाव अभी बना हुआ है और आने वाले समय में किसानों की लागत बढ़ सकती है.

भारत के लिए आ रहे 15 जहाजों में आठ जहाज 3.32 लाख मीट्रिक टन यूरिया, चार जहाज 2.57 लाख मीट्रिक टन डाय-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और तीन जहाज 1.11 लाख मीट्रिक टन सल्फर लेकर आ रहे हैं. सल्फर फॉस्फेट से बनने वाली खादों के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है. ऐसे में इन खेपों का समय पर पहुंचना कृषि क्षेत्र और खाद उद्योग दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

क्या कहती है विश्व बैंक की रिपोर्ट?

इस बीच विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट ने खाद बाजार को लेकर चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट के अनुसार 2026 में यूरिया की वैश्विक कीमतों में करीब 60 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है. इसके पीछे पश्चिम एशिया में उथल-पुथल, निर्यात में संभावित रुकावट और प्राकृतिक गैस की ऊंची कीमतों जैसी वजहें बताई गई हैं. विश्व बैंक का अनुमान है कि 2027 में हालात सामान्य होने और मध्य पूर्व से निर्यात बढ़ने पर कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है, लेकिन फिलहाल जोखिम खत्म नहीं हुए हैं.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि मध्य पूर्व से शिपिंग में लंबी बाधा बनी रहती है या अलग-अलग देशों द्वारा व्यापारिक प्रतिबंध बढ़ाए जाते हैं, तो यूरिया की कीमतें 2022 के औसत स्तर से भी ऊपर जा सकती हैं. चूंकि यूरिया उत्पादन में प्राकृतिक गैस प्रमुख कच्चा माल है, इसलिए गैस की बढ़ती कीमतें भी बाजार को प्रभावित कर सकती हैं.

फॉस्फेट उर्वरकों के क्षेत्र में भी दबाव लगातार बढ़ रहा है. साल की शुरुआत में स्थिर रहने के बाद अप्रैल में DAP की कीमतों में 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसकी प्रमुख वजह वैश्विक स्तर पर सप्लाई की तंगी, सल्फर और अमोनिया जैसे कच्चे माल की महंगी होती लागत और चीन का उर्वरक निर्यात पर लगाई गई सख्ती को माना जा रहा है. जनवरी के बाद से सल्फर की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं, जिसका सीधा असर DAP उत्पादन लागत पर पड़ा है.

विश्व बैंक का अनुमान है कि 2026 में DAP की कीमतों में करीब 6 प्रतिशत की और बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि 2027 में नई उत्पादन क्षमता शुरू होने के बाद इसमें लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना है. इसके बावजूद मोरक्को की प्रमुख फॉस्फेट कंपनी ओसीपी द्वारा अपने प्लांटों में रखरखाव का काम तेज किए जाने से वैश्विक सप्लाई को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं.

म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) के मामले में स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित मानी जा रही है. अनुमान है कि 2026 में इसकी कीमतें करीब 12 प्रतिशत बढ़ेंगी, जबकि 2027 में इनमें लगभग 6 प्रतिशत की कमी आ सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि पोटाश बाजार पर पश्चिम एशिया के तनाव का असर कुछ कम पड़ता है, लेकिन यदि यूरिया और DAP बहुत महंगे हो जाते हैं तो किसान पोटाश की खपत घटा सकते हैं, जिससे इसकी मांग और कीमतों पर दबाव आ सकता है.

भारत सरकार आश्वस्त

भारत में फिलहाल खाद की उपलब्धता को लेकर सरकार आश्वस्त नजर आ रही है. खाद मंत्रालय के अनुसार देश में 197.56 लाख मीट्रिक टन खाद का सुरक्षित भंडार मौजूद है, जो देश की सालाना जरूरत का 51 प्रतिशत से अधिक है. खरीफ सीजन के दौरान अप्रैल से सितंबर तक 383.9 लाख टन की मांग के मुकाबले 2 जुलाई तक 163.65 लाख टन का स्टॉक उपलब्ध था, जो कुल जरूरत का लगभग 43 प्रतिशत है.

मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2 जुलाई तक देश में 69.08 लाख टन यूरिया, 16.64 लाख टन DAP, 8.90 लाख टन म्यूरेट ऑफ पोटाश, 45.64 लाख टन कॉम्प्लेक्स खाद और 23.09 लाख टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) उपलब्ध था. इस प्रकार कुल खाद उपलब्धता 163 लाख टन से अधिक रही.

घरेलू उत्पादन भी सरकार के लिए राहत का कारण बना हुआ है. वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में यूरिया का उत्पादन 67.86 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 71.55 लाख टन रहा. इसी अवधि में DAP का उत्पादन 8.61 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 9.84 लाख टन दर्ज किया गया. वहीं कॉम्प्लेक्स खादों का उत्पादन 20.77 लाख टन और SSP का उत्पादन 13.50 लाख टन रहा.

सरकार ने यह भी बताया कि खाद प्लांटों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति, जो कुछ समय के लिए घटकर करीब 65 प्रतिशत रह गई थी, अब पूरी तरह बहाल हो चुकी है. इसके साथ ही आयात के लिए अलग-अलग देशों से माल मंगाया गया है. यूरिया के लिए ओमान, रूस, मिस्र, नाइजीरिया और मलेशिया जैसे देशों से आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, जबकि DAP और कॉम्प्लेक्स खादों के लिए रूस, मोरक्को, अमेरिका, जॉर्डन, सऊदी अरब और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों से आयात किया जा रहा है.

कुल मिलाकर, मौजूदा समय में भारत के पास खाद की पर्याप्त उपलब्धता है और खरीफ सीजन की मांग पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है. लेकिन वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितता, पश्चिम एशिया का तनाव और कच्चे माल की ऊंची कीमतें आने वाले वर्षों में खाद बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं. ऐसे में किसानों, उद्योग और सरकार सभी की नजरें अंतरराष्ट्रीय हालात पर टिकी रहेंगी.

MORE NEWS

Read more!