
बिहार के भागलपुर जिले की एक महिला किसान ने मेहनत, वैज्ञानिक खेती और समूह आधारित मॉडल के दम पर सफलता की ऐसी कहानी लिखी है, जो आज दूसरे किसानों, खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है. जगदीशपुर प्रखंड के खिरीबांध गांव की रहने वाली राजलक्ष्मी कुमारी ने मशरूम उत्पादन और जैविक खेती के जरिए न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि गांव की कई महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है. आइए जानते हैं राजलक्ष्मी की सफलता की कहानी.
आत्मा (ATMA) भागलपुर के मार्गदर्शन में वर्ष 2025 में उन्होंने 25 महिला किसानों को साथ लेकर 'हरी मशरूम उत्पादन समूह' का गठन किया. इस समूह के माध्यम से महिलाओं को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे क्वालिटी से भरपूर और सुरक्षित मशरूम का उत्पादन करने लगीं. इससे महिलाओं के लिए आय का एक नया और स्थायी स्रोत तैयार हुआ.
राजलक्ष्मी कुमारी ने खेती में केवल मशरूम तक खुद को सीमित नहीं रखा. उन्होंने स्ट्रॉबेरी, ब्रोकली, पपीता और अलग-अलग मौसमी सब्जियों की भी खेती शुरू की. फसलों में विविधता अपनाने और आधुनिक कृषि तकनीकों के इस्तेमाल से उनकी आय में अच्छी बढ़ोतरी हुई, जिससे उन्होंने एक वर्ष में करीब 2 लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई कीं. समूह की अध्यक्ष के रूप में राजलक्ष्मी कुमारी अन्य महिला किसानों को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ रही हैं. उनकी पहल से गांव की कई महिलाएं अब खेती को रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बना चुकी हैं. इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ी है, बल्कि समाज में उनकी पहचान और आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है.
बिहार कृषि विभाग का मानना है कि यदि किसानों को समय पर प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और समूह आधारित खेती का सहयोग मिले तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है. राजलक्ष्मी कुमारी की सफलता इसी बात का उदाहरण है कि आधुनिक तकनीक, जैविक खेती और सामूहिक प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं. आज राजलक्ष्मी कुमारी अपने गांव और जिले की पहचान बन चुकी हैं. उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सही दिशा, मेहनत और नवाचार के साथ खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है. उनकी यह उपलब्धि बिहार की अन्य महिला किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है.