बिहार के पोल्ट्री व्यवसायी रवि रंजनजो युवा 20 से 22,000 रुपये सैलरी के लिए प्राइवेट कंपनियों में दर-ब-दर ठोकर खाने को मजबूर हैं, उनके लिए रवि रंजन किसी उदाहरण से कम नहीं हैं. लेयर फार्मिंग को मेहनत का काम मानकर 12 से 16 घंटे काम करने की मजबूरी में जीने वाले लोगों के लिए रवि रंजन की कहानी प्रेरणा देने वाली है. अगर मैं आपको यह कहूं कि कभी रवि रंजन भी 20 से 22,000 रुपये की नौकरी के लिए धक्के खा रहे थे. मगर 22,000 रुपये हर महीने पाने की इस असफलता ने आज उन्हें करीब डेढ़ लाख रुपये से अधिक महीने की सैलरी बांटने वाला बना दिया. वहीं, आज वे अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहे हैं, जो कृषि या इससे जुड़े व्यवसाय में इसलिए नहीं आते हैं कि उन्हें यह क्षेत्र घाटे का सौदा लगता है.
नालंदा जिले के रहने वाले रवि रंजन आज से करीब 7 साल पहले भागलपुर में नौकरी किया करते थे. मगर आज पटना में उनका सालाना 80 से 90 लाख रुपये की कमाई वाला खुद का लेयर फार्मिंग का बिजनेस है. वर्ष 2019 में वह पटना आए थे. परिवार के दबाव में उन्होंने लेयर फार्मिंग का व्यवसाय शुरू किया. आज वह प्रतिदिन 11,000 अंडों का उत्पादन कर रहे हैं. उनका कहना है कि उन्हें लेयर फार्मिंग के व्यवसाय में लाने के लिए उनके जीजा और मां का सबसे बड़ा योगदान रहा. आज उनके निर्णय और सलाह की वजह से वह एक बेहतर जीवन जी रहे हैं. आगे उन्होंने 'किसान तक' को बताया कि अगर कोई भी व्यवसाय ईमानदारी और मेहनत से किया जाए, तो सफल होने से कोई रोक नहीं सकता.
रवि के पास फिलहाल 20,000 मुर्गियों की क्षमता वाला फार्म है, जिसमें इस वक्त 12,000 मुर्गियां हैं. जो रोजाना करीब 11,000 से अधिक अंडे देती हैं, जिससे उनकी कमाई करोड़ों तक पहुंच जाती है. अगर आमदनी और आंकड़ों की बात की जाए, तो मौजूदा समय में एक अंडे की कीमत 6 से 7 रुपये है, जो कभी-कभी बढ़ भी जाती है. मगर एक औसत कीमत भी उन्हें 70 से 75,000 रुपये प्रतिदिन की आमदनी दे देती है. फार्म को चलाने के सभी खर्चों को भी अलग कर दिया जाए, तो इस वक्त रवि रंजन करीब ढाई करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर वाले व्यवसायी कहे जा सकते हैं.
रवि रंजन खेती और लेयर फार्मिंग से दूरी रखने वाली पीढ़ी के लिए जबरदस्त उदाहरण हैं. रवि रंजन का कहना है कि युवा लेयर फार्मिंग में अपना भविष्य बना सकते हैं, जो उन्हें स्वतंत्रता के साथ बेहतर आमदनी भी देगा. रवि रंजन के चेहरे पर संतुष्टि के भाव हैं. वह कहते हैं कि आज मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं है. मैं अपनी आजादी और अपनी मर्जी से काम करता हूं. मगर जब मैं नौकरी करता था, तब मेरी अपनी मर्जी और इच्छा के लिए कोई जगह नहीं थी. एक दिन की छुट्टी लेने के लिए भी दूसरे के आदेश का इंतजार करना पड़ता था. लेकिन आज ऐसा नहीं है. कब काम करना है और कब छुट्टी लेनी है, यह मैं खुद तय करता हूं. अपनी जिंदगी का खुद बॉस हूं.
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