4,000 किसानों ने मिलकर बदली तस्वीर, छत पर सोलर लगाकर हर साल बचा रहे ₹23 लाख

4,000 किसानों ने मिलकर बदली तस्वीर, छत पर सोलर लगाकर हर साल बचा रहे ₹23 लाख

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में 4,000 किसानों के एक एफपीओ ने 221 किलोवाट का रूफटॉप सोलर प्लांट लगाकर नई मिसाल कायम की है. इस पहल से संगठन हर साल करीब 23 लाख रुपये की बचत कर रहा है. सौर ऊर्जा ने बिजली खर्च कम करने, उत्पादन बढ़ाने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

सोलर प्लांट से बचा रहे लाखों रुपयेसोलर प्लांट से बचा रहे लाखों रुपये
प्राची वत्स
  • Noida,
  • Jun 04, 2026,
  • Updated Jun 04, 2026, 1:43 PM IST

महाराष्ट्र का मराठवाड़ा इलाका लंबे समय से सूखे और पानी की कमी की समस्या से जूझ रहा है. यहां बारिश कम होती है और कई बार किसान मौसम की मार झेलते हैं. खेती ही यहां के लोगों की मुख्य आय का साधन है, लेकिन पानी की कमी, बढ़ते बिजली बिल और बार-बार बिजली कटौती ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं. ऐसे हालात में मराठवाड़ा के हजारों किसानों ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने उनकी परेशानियों को काफी हद तक कम कर दिया.

4,000 किसानों ने मिलकर बनाया मजबूत संगठन

धाराशिव जिले के कलंब क्षेत्र में 4,000 से अधिक किसान मिलकर "मराठवाड़ा एग्रो प्रोसेस फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी" नाम से एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) चला रहे हैं. यह संगठन किसानों की उपज को बेहतर तरीके से संभालने, दूध प्रसंस्करण और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम करता है. लेकिन इन सभी कामों के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत पड़ती थी, जिससे खर्च लगातार बढ़ रहा था.

छत पर सोलर प्लांट लगा, बदल गई कहानी

बढ़ते बिजली खर्च से राहत पाने के लिए संगठन ने अपनी इमारत की छत पर 221 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर प्लांट लगवाया. इस सोलर सिस्टम से सालभर में लगभग 3.16 लाख यूनिट बिजली पैदा होती है. यह संगठन की कुल बिजली जरूरत का करीब 61 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर देता है.

अब दूध प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज और अन्य जरूरी कामों के लिए काफी हद तक सौर ऊर्जा का उपयोग किया जा रहा है. इससे बिजली कटौती का असर भी कम हुआ है और काम पहले की तुलना में ज्यादा सुचारू रूप से होने लगा है.

हर साल ₹23 लाख से ज्यादा की बचत

सोलर प्लांट लगने के बाद संगठन को हर साल लगभग 23 लाख रुपये की बचत हो रही है. पहले जो पैसा बिजली बिल में खर्च होता था, अब वह किसानों और संगठन के विकास में लगाया जा रहा है. सबसे खास बात यह है कि सोलर सिस्टम पर किया गया निवेश केवल 3 से 4 साल में वापस आने की उम्मीद है. इसके बाद कई वर्षों तक सस्ती और लगभग मुफ्त बिजली का लाभ मिलता रहेगा.

किसानों की बढ़ी ताकत और आत्मविश्वास

सोलर ऊर्जा ने केवल बिजली खर्च ही कम नहीं किया, बल्कि किसानों को भरोसेमंद ऊर्जा का स्रोत भी दिया है. अब कोल्ड स्टोरेज बेहतर तरीके से काम कर रहे हैं, दूध और कृषि उत्पादों को सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है और पूरे संगठन की कार्यक्षमता बढ़ी है. इससे किसानों का आत्मविश्वास भी बढ़ा है और उनकी आय पर सकारात्मक असर पड़ा है.

दूसरे किसानों के लिए भी बना प्रेरणा स्रोत

मराठवाड़ा के इस किसान संगठन की सफलता यह दिखाती है कि नई तकनीक अपनाकर खेती और कृषि व्यवसाय को ज्यादा लाभदायक बनाया जा सकता है. आज यह FPO हजारों किसानों के लिए प्रेरणा बन चुका है. जहां एक तरफ सौर ऊर्जा से खर्च कम हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण की भी रक्षा हो रही है.

मराठवाड़ा के 4,000 किसानों की यह कहानी बताती है कि जब किसान मिलकर काम करते हैं और नई तकनीकों को अपनाते हैं, तो बड़ी से बड़ी चुनौती का समाधान निकाला जा सकता है. छत पर लगा सोलर प्लांट आज इन किसानों के लिए सिर्फ बिजली का स्रोत नहीं, बल्कि बचत, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की नई रोशनी बन गया है.

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