
आज भी कई किसान खेती को घाटे का सौदा मानते हैं, लेकिन बिहार के गया जिले की महिला किसान कविता कुमारी ने अपनी मेहनत, सीखने की लगन और आधुनिक खेती की मदद से इस सोच को बदल दिया है. कभी पारंपरिक खेती से पहले उनकी कम कमाई होती थी. लेकिन अब इंटीग्रेटेड फार्मिंग अपनाने के बाद उन्हें सालभर अलग-अलग फसलों से अच्छी कमाई होने लगी है. कृषि विभाग से मिले प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का सही इस्तेमाल कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, तो कम जमीन से भी अच्छी कमाई की जा सकती है.
गया जिले के बेलाखेरिया पंचायत के हरिहरपुर गांव की रहने वाली कविता कुमारी किसान परिवार से हैं. उनके पति प्रभात कुमार भी खेती करते हैं. पहले उनका परिवार पारंपरिक खेती पर निर्भर था, जिससे कमाई बहुत कम होती थी और खेती में जोखिम भी ज्यादा था. लेकिन समय के साथ उन्होंने खेती का तरीका बदला. कृषि विभाग की सलाह और प्रशिक्षण के बाद उन्होंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग को अपनाया और यही फैसला उनके परिवार के लिए बड़ा बदलाव लेकर आया.
कविता कुमारी बताती हैं कि उन्हें 'आत्मा (ATMA) योजना' के तहत किसान पाठशाला में प्रशिक्षण लेने का मौका मिला. यहां उन्होंने आधुनिक खेती, फसल प्रबंधन, इंटीग्रेटेड फार्मिंग तकनीक के बारे में विस्तार से सीखा. इसके साथ ही कृषि विभाग की अलग-अलग योजनाओं और कृषि यंत्रों का भी लाभ मिला. इस प्रशिक्षण ने उनकी खेती की पूरी तस्वीर बदल दी.
आज उनके खेत में एक साथ कई तरह की फसलें और बागवानी की जा रही है. वे प्याज, फूलगोभी, पत्तागोभी, टमाटर और बैंगन जैसी सब्जियों की खेती करती हैं. इसके अलावा देशी और CO-0446 किस्म के गन्ने की खेती भी कर रही हैं. बागवानी के तहत उन्होंने जर्दालू और मालदा किस्म के 25 आम के पौधे लगाए हैं. इसके साथ ही अमरूद, केला और पपीता जैसे फलदार पौधे भी उनकी आय का बेहतर जरिया बन चुके हैं.
रबी सीजन में वे गेहूं, सरसों और प्याज की खेती करती हैं. अलग-अलग मौसम में अलग-अलग फसलों की खेती करने से उन्हें पूरे साल किसी न किसी फसल से आमदनी मिलती रहती है. इससे एक ही फसल पर निर्भरता कम हुई है और मौसम या बाजार की मार का जोखिम भी काफी घट गया है. कविता कुमारी का कहना है कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग अपनाने के बाद उनकी आमदनी पहले के मुकाबले काफी बेहतर हुई है. अब उन्हें सालभर की अच्छी होती है और खेती पहले से कहीं ज्यादा फायदेमंद बन गई है. आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से उत्पादन बढ़ा है, जबकि खेती की लागत पर भी काफी हद तक नियंत्रण हुआ है.
वे मानती हैं कि अगर किसान केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रहकर नई तकनीकों को अपनाएं और सरकार की योजनाओं का लाभ उठाएं, तो खेती को एक सफल और मुनाफे वाला व्यवसाय बनाया जा सकता है. उनका कहना है कि सही जानकारी, वैज्ञानिक सलाह और समय पर प्रशिक्षण किसी भी किसान की आर्थिक स्थिति बदल सकते हैं. अब कविता कुमारी का सपना सिर्फ अपनी खेती को आगे बढ़ाना नहीं है, बल्कि वे चाहती हैं कि उनके गांव और आसपास के दूसरे किसान, खासकर महिलाएं भी आधुनिक खेती अपनाकर आत्मनिर्भर बनें.