अल नीनो की आहट, कमजोर बारिश से बढ़ी चिंता! भारत सहित कई एशियाई देशों में खेती पर असर की आशंका

अल नीनो की आहट, कमजोर बारिश से बढ़ी चिंता! भारत सहित कई एशियाई देशों में खेती पर असर की आशंका

भारत में कमजोर मानसून और बढ़ते तापमान के बीच खरीफ फसलों की तैयारी चिंता का कारण बन रही है. वहीं थाईलैंड, इंडोनेशिया और दूसरे एशियाई देशों में भी सूखे जैसे हालात खेती और उत्पादन पर दबाव बढ़ाने की आशंका पैदा कर रहे हैं.

Advertisement
अल नीनो की आहट, कमजोर बारिश से बढ़ी चिंता! भारत सहित कई एशियाई देशों में खेती पर असर की आशंकाअल नीनो से खेती पर असर की आशंका गहराई (AI Image)

एशिया के कई देशों में सूखा और सामान्य से कम बारिश खेती के लिए चिंता बढ़ा रही है, लेकिन सबसे ज्यादा नजर भारत पर टिकी है, क्योंकि यहां की खेती बड़े पैमाने पर मॉनसून पर निर्भर करती है. गर्म मौसम और कमजोर बारिश की स्थिति ने कई इलाकों में खेती की तैयारियों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. ऐसे समय में अल नीनो के और मजबूत होने की आशंका ने आने वाले महीनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है. भारत मौसम विभाग ने हाल ही में चार महीने के मॉनसून सीजन को लेकर अपने अनुमान में और कमी की थी. देश में सालाना बारिश का बड़ा हिस्सा मॉनसून से आता है और इसी पर खरीफ सीजन की बुवाई निर्भर करती है. देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, जिससे गर्मी के मौसम की फसलों की समय पर बुवाई के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं मानी जा रही हैं.

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली स्थित एक ग्‍लोबल ट्रेडिंग हाउस से जुड़े एक डीलर ने कहा कि मॉनसून की देरी से शुरुआत होने पर बुवाई आगे खिसक सकती है, लेकिन इससे भी बड़ी चिंता मॉनसून आने के बाद लंबे सूखे अंतराल और सामान्य से कम बारिश की संभावना को लेकर है. भारत में खरीफ सीजन के दौरान मुख्य रूप से धान, सोयाबीन, दलहन, गन्ना और मक्का की खेती होती है. ऐसे में अगर बारिश कमजोर रहती है या बुवाई का समय प्रभावित होता है तो इसका असर उत्पादन और बाजार दोनों पर दिखाई दे सकता है. यही वजह है कि कृषि बाजार से जुड़े लोग मॉनसून की शुरुआती चाल पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.

भारत सहित पूरे एशिया की खेती पर दबाव

सूखे जैसी स्थिति केवल भारत तक सीमित नहीं है. थाईलैंड, इंडोनेशिया और एशिया के दूसरे हिस्सों में भी खेतों पर मौसम का असर दिख रहा है. थाईलैंड के चइ नात प्रांत के किसान नेरावत ओरामाह ने कहा कि पानी की उपलब्धता को देखते हुए दूसरी फसल लेना जोखिम भरा हो सकता है और फिलहाल इंतजार करना पड़ रहा है. 

थाईलैंड और फिलीपींस में जून-जुलाई के दौरान मुख्य धान फसल की बुवाई होती है, जबकि वियतनाम और इंडोनेशिया दूसरे सीजन की फसलों की तैयारी कर रहे हैं. इंडोनेशिया की मौसम एजेंसी के मुताबिक जावा, उत्तरी सुमात्रा, दक्षिण कालिमंतन और सुलावेसी के कुछ इलाकों में लगातार कई दिनों तक बारिश नहीं हुई और जून में भी कई क्षेत्रों में मध्यम से कम बारिश का अनुमान है.

अनाज और चावल बाजार में बढ़ी बेचैनी

खेती को लेकर बढ़ती चिंताओं का असर वैश्विक बाजार पर भी दिखने लगा है. इस साल गेहूं की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है, जबकि दक्षिण पूर्व एशिया के प्रमुख निर्यात केंद्रों में चावल महंगा हुआ है. कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय हो रही है जब बड़े स्तर पर आपूर्ति संकट नहीं दिख रहा, जिससे बाजार की चिंता साफ नजर आती है.

सिंगापुर स्थित एक ट्रेडर ने कहा कि भारत के पास अभी चावल का पर्याप्त भंडार है, लेकिन अगर मॉनसून के शुरुआती दौर में दिक्कतें बढ़ती हैं तो भविष्य में निर्यात को लेकर भी सतर्कता बढ़ सकती है.

मौसम की चुनौती ऐसे समय सामने आ रही है, जब किसान पहले से ही खाद और डीजल की उपलब्धता को लेकर दबाव महसूस कर रहे हैं. थाईलैंड के किआत्नाकिन फत्रा बैंक की रिसर्च यूनिट केकेपी रिसर्च ने कहा कि अगर खाद की कमी गहराती है तो सबसे खराब स्थिति में चावल उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है.

‘आगे और व्यापक हो सकता है असर’

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की सैटेलाइट डेटा और इमेजिंग कंपनी स्काईफाई के मौसम वैज्ञानिक क्रिस हाइड के मुताबिक, अल नीनो का शुरुआती असर अक्सर दक्षिण पूर्व एशिया, भारत और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देता है और इसके बाद इसका असर दुनिया के दूसरे हिस्सों तक जाता है. 

उन्होंने कहा कि एशिया के कई क्षेत्रों में शुरुआती सूखे के संकेत पहले से दिखाई देने लगे हैं. वहीं, वर्ल्ड वेदर इंक के अध्यक्ष और कृषि मौसम वैज्ञानिक ड्रू लर्नर ने कहा है कि अलग-अलग क्षेत्रों में अल नीनो का असर एक जैसा नहीं होता, लेकिन मौसम के पैटर्न में बदलाव आने वाले महीनों में कृषि बाजारों की दिशा तय कर सकते हैं

POST A COMMENT