पारंपरिक खेती छोड़ी, अपनाई आधुनिक तकनीक; अब रोजाना 7 क्विंटल मशरूम से हो रही लाखों की कमाई

पारंपरिक खेती छोड़ी, अपनाई आधुनिक तकनीक; अब रोजाना 7 क्विंटल मशरूम से हो रही लाखों की कमाई

पारंपरिक खेती से सीमित आमदनी मिलने पर बिहार के एक किसान ने आधुनिक तकनीक के साथ मशरूम की खेती शुरू की और आज सफलता की नई मिसाल बन गए हैं. वातानुकूलित यूनिट में रोजाना करीब 7 क्विंटल मशरूम का उत्पादन कर वे हर साल लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं.

मशरूम की खेतीमशरूम की खेती
संदीप कुमार
  • Noida,
  • Jul 19, 2026,
  • Updated Jul 19, 2026, 5:46 PM IST

बिहार के सारण जिले के एक किसान ने यह साबित कर दिया है कि अगर खेती में नई तकनीक अपनाई जाए, तो कम जगह और सीमित संसाधनों में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है. दरियापुर प्रखंड के छुराई कोठिया गांव के किसान नागेंद्र साहनी ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए 'एयर कंट्रोल' मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीक अपनाई और आज वे न सिर्फ अच्छी कमाई कर रहे हैं, बल्कि अपने क्षेत्र के कई लोगों के लिए रोजगार का भी जरिया बन गए हैं. आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी.

पारंपरिक खेती से मशरूम उत्पादन तक का सफर

कभी सीमित कमाई वाली पारंपरिक खेती करने वाले नागेंद्र साहनी ने समय के साथ खेती में बदलाव लाने का फैसला किया. उन्होंने  इस तकनीक से मशरूम उत्पादन शुरू किया. इसके लिए उन्होंने वातानुकूलित यूनिट तैयार की, जहां तापमान और नमी को नियंत्रित रखकर पूरे साल बेहतर क्वालिटी वाला मशरूम तैयार किया जाता है. इस तकनीक की मदद से मौसम पर निर्भरता काफी कम हो जाती है और उत्पादन भी लगातार बना रहता है.

कम लागत से लाखों रुपये तक पहुंचा कारोबार

किसान ने बताया कि पारंपरिक व्यवस्था में जहां मशरूम उत्पादन शुरू करने के लिए करीब 2 से 3 लाख रुपये की लागत आती थी, वहीं आधुनिक तकनीक आधारित यूनिट पर करीब 63 लाख रुपये का निवेश किया. हालांकि, इस निवेश का परिणाम काफी अच्छा रहा. पहले जहां एक सीजन  में लगभग 500 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन होता था, वहीं अब आधुनिक तकनीक से रोजाना लगभग 7 क्विंटल मशरूम का उत्पादन हो रहा है.

रोजगार भी बढ़ा, कमाई भी कई गुना बढ़ी

नागेंद्र साहनी ने बताया कि इस तकनीक से केवल उत्पादन ही नहीं बढ़ा, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं. पहले जहां इस काम से करीब 5 लोगों को रोजगार दिया था, वहीं अब लगभग 50 लोगों को काम दिया है.  इसी तरह आय में भी बड़ा बदलाव आया है. पहले इस कार्य से करीब 1 लाख रुपये की शुद्ध आय होती थी, जबकि अब आधुनिक तकनीक अपनाने के बाद करीब 15 लाख रुपये तक की कमाई होने लगी है.

किसानों के लिए बन रहे प्रेरणा स्रोत

नागेंद्र साहनी की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि किसान नई तकनीकों को अपनाएं और वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, तो खेती को लाभदायक व्यवसाय में बदला जा सकता है. मशरूम उत्पादन ऐसी फसल है, जिसके लिए बहुत अधिक जमीन की जरूरत नहीं होती और इसकी बाजार में लगातार मांग बनी रहती है.

तकनीक से बदल रही खेती की तस्वीर

बिहार सरकार का उद्यान विभाग भी किसानों को बागवानी और मशरूम उत्पादन जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़ने पर जोर दे रहा है. विभाग का मानना है कि नियंत्रित वातावरण में खेती भविष्य की खेती है, जिससे उत्पादन, क्वालिटी और किसानों की आय तीनों में सुधार संभव है. नागेंद्र साहनी की कहानी यह संदेश देती है कि खेती में नई सोच, आधुनिक तकनीक और सही मार्गदर्शन के साथ किसान न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं, बल्कि गांव में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकते हैं. 

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