
मध्य प्रदेश में इस बार मॉनसून की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है. 1 जून से अब तक राज्य में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में प्रदेश में 335.3 मिमी के सामान्य औसत के मुकाबले केवल 286.8 मिमी बारिश हुई है. बारिश के असमान वितरण का असर कई जिलों में खेती और फसलों की स्थिति पर साफ दिखाई देने लगा है. प्रदेश का आदिवासी बहुल अलीराजपुर जिला सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल है.
यहां सामान्य 297.9 मिमी के मुकाबले अब तक केवल 64.8 मिमी बारिश हुई है, जो 78 प्रतिशत की भारी कमी दर्शाती है. कम बारिश के कारण खेतों में नमी नहीं बन सकी, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार दोनों प्रभावित हुई हैं.
कृषि विज्ञान केंद्र, अलीराजपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आर. के. यादव ने कहा कि जिले में अब तक सोयाबीन, मक्का, उड़द, कपास और मूंगफली जैसी फसलों की बुवाई करीब 1.16 लाख हेक्टेयर में ही हो सकी है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1.89 लाख हेक्टेयर था. उन्होंने कहा कि अगर अगले कुछ दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली और कम पानी में उगाई जा सकने वाली फसलें, जैसे मूंग, ज्वार और बाजरा अपनाने की सलाह दी जा रही है.
IMD के अनुसार, पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 18 प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 11 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. पूर्वी क्षेत्र में रीवा सबसे अधिक प्रभावित जिला रहा, जहां सामान्य से 59 प्रतिशत कम बारिश हुई. इसके अलावा मैहर, सिंगरौली, नरसिंहपुर और सीधी में भी बारिश में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई. वहीं, निवाड़ी ऐसा जिला रहा, जहां सामान्य से 10 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है.
वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की स्थिति एक जैसी नहीं रही. देवास राज्य का सबसे अधिक बारिश वाला जिला बनकर उभरा, जहां सामान्य से 51 प्रतिशत अधिक यानी 460.3 मिमी बारिश दर्ज की गई. इंदौर, भिंड, बुरहानपुर और भोपाल में भी सामान्य से अधिक बारिश हुई है.
दूसरी ओर झाबुआ, नर्मदापुरम, धार, दतिया, शिवपुरी और मुरैना में 33 से 45 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई. रतलाम, बड़वानी, शाजापुर, अशोकनगर और ग्वालियर में भी बारिश सामान्य से कम रही, जबकि खंडवा, खरगोन, राजगढ़ और उज्जैन में बारिश का स्तर सामान्य के आसपास बना हुआ है. (पीटीआई)