
कोटा में एक किसान ने ऐसी खेती को कमाई का जरिया बनाया है, जिसमें पानी की जरूरत बेहद कम होती है. हम बात कर रहे हैं कैक्टस की खेती की. कोटा के फिरोज खान ने शुरुआत में इसे शौक के तौर पर उगाना शुरू किया था, लेकिन पौधों की अलग-अलग प्रजातियों और उनकी मांग को समझने के बाद उन्होंने इसे व्यावसायिक रूप दे दिया. आज वे घर पर ही कैक्टस के पौधे तैयार कर लोगों तक पहुंचा रहे हैं. वे नर्सरी में तैयार पौधों से सालाना करीब 4 से 5 लाख रुपये की आमदनी होने का दावा करते हैं.
फिरोज खान बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही पेड़-पौधों में दिलचस्पी रही है. इसी शौक के चलते उन्होंने अलग-अलग पौधों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की. कृषि विज्ञान केंद्रों, पौधों की प्रदर्शनियों और सेमिनारों में जाकर उन्होंने विशेषज्ञों से खेती और पौधों की किस्मों के बारे में सीखा. इसी दौरान उनका ध्यान कैक्टस की अलग-अलग प्रजातियों और उनके उपयोगों की ओर गया.
फिरोज ने पहले कुछ कैक्टस के पौधे शौक के तौर पर लगाए. धीरे-धीरे उन्हें इसकी व्यावसायिक संभावनाओं का अंदाजा हुआ और उन्होंने पौधों की संख्या बढ़ानी शुरू कर दी. अब वे घर पर ही कैक्टस की नई पौध तैयार करते हैं और तैयार पौधों को बेचते हैं.
फिरोज ने बताया कि कैक्टस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे दूसरी कई फसलों की तुलना में कम पानी की जरूरत होती है. साथ ही इसकी देखरेख भी अपेक्षाकृत आसान है. पौधों की कटिंग के जरिए नए पौधे तैयार किए जा सकते हैं, जिससे एक पौधे से आगे कई पौधे तैयार करने का रास्ता खुल जाता है.
फिरोज बताते हैं कि कृषि विज्ञान केंद्रों और विभिन्न प्रदर्शनियों में जाने के दौरान उनकी मुलाकात किसानों और पौधों के विशेषज्ञों से होती रही. वहां से उन्हें नई किस्मों के बारे में जानकारी मिली. दूसरे लोगों से पौधे और कटिंग लेकर उन्होंने धीरे-धीरे कैक्टस की अलग-अलग प्रजातियां जुटाईं.
समय के साथ उनका यह कलेक्शन बढ़ता गया और कैक्टस की खेती शौक से आगे बढ़कर उनकी नियमित व्यावसायिक गतिविधि बन गई. अब वे खुद पौधे तैयार करने के साथ उन्हें दूसरे लोगों तक भी पहुंचा रहे हैं.
कैक्टस की कई प्रजातियां अपने अनोखे आकार और फूलों के कारण आकर्षण का केंद्र रहती हैं. फिरोज के मुताबिक, उनके द्वारा उगाई जा रही कुछ प्रजातियों में एंटीऑक्सीडेंट जैसे गुणों की चर्चा भी होती है और इन्हें विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी उपयोगों से जोड़ा जाता है. हालांकि ऐसे औषधीय दावों को चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए.
फिरोज का कहना है कि कम पानी में तैयार होने वाले ऐसे पौधे किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन सकते हैं. उनका मानना है कि खेती में पारंपरिक फसलों के साथ ऐसी वैकल्पिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाए, तो कम संसाधनों में आय के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं.