बेतिया के किसान ने बदली खेती की राह, एक बीघा में उगाया ड्रैगन फ्रूट, अब कमा रहे अच्छा मुनाफा

बेतिया के किसान ने बदली खेती की राह, एक बीघा में उगाया ड्रैगन फ्रूट, अब कमा रहे अच्छा मुनाफा

बेतिया के जयनगर गांव के किसान मंजय प्रसाद ने पारंपरिक खेती से हटकर एक बीघा जमीन में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है. कुशीनगर और बंगाल से बीज लाकर शुरू की गई इस खेती में करीब 18 महीने में पौधे फल देने लगते हैं. बाजार में ड्रैगन फ्रूट 200 से 250 रुपये किलो तक बिक रहा है.

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बेतिया के किसान ने बदली खेती की राह, एक बीघा में उगाया ड्रैगन फ्रूट, अब कमा रहे अच्छा मुनाफाबेतिया के किसान ने एक बीघा में किया कमाल

पारंपरिक खेती से हटकर किसान अब ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, जिनसे कम जमीन में बेहतर आमदनी की उम्मीद हो. बिहार के बेतिया जिले में भी एक किसान ने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू कर नई राह चुनी है. नौतन प्रखंड की बैकुंठवा पंचायत के जयनगर गांव के वार्ड नंबर 16 निवासी किसान मंजय प्रसाद करीब एक बीघा जमीन में पिछले दो साल से ड्रैगन फ्रूट उगा रहे हैं.

एक बीघा जमीन में शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती

मंजय प्रसाद ने पारंपरिक फसलों के बजाय ड्रैगन फ्रूट की खेती करने का फैसला किया. उन्होंने करीब एक बीघा जमीन में इसके पौधे लगाए हैं. किसान का कहना है कि इस फसल से उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद है. उनकी खेती को देखकर आसपास के दूसरे किसानों में भी इस फसल को लेकर रुचि बढ़ रही है.

कुशीनगर और बंगाल से लाए बीज

मंजय प्रसाद ने बताया कि उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और बंगाल से बीज मंगाए. इसके बाद अपनी जमीन पर इसकी खेती शुरू की. किसान के मुताबिक ड्रैगन फ्रूट के पौधे करीब 18 महीने में फल देने के लिए तैयार हो जाते हैं. पौधों को फल देने के बाद भी नियमित देखभाल जरूरी होती है. सही समय पर पानी, खाद और पौधों की देखभाल करने से उत्पादन को बेहतर करने की कोशिश की जा सकती है.

200 से 250 रुपये किलो तक बिक रहा ड्रैगन फ्रूट

मंजय प्रसाद के मुताबिक बाजार में ड्रैगन फ्रूट की अच्छी मांग है. फिलहाल उन्हें इसके करीब 200 से 250 रुपये प्रति किलो तक भाव मिलने की उम्मीद है. यही वजह है कि किसान इसे कम जमीन में अच्छी आमदनी देने वाली फसल के तौर पर देख रहे हैं. हालांकि ड्रैगन फ्रूट की खेती में मेहनत और समय दोनों लगते हैं. पौधों की नियमित देखभाल करनी पड़ती है और खेती के साथ बाजार की जानकारी होना भी जरूरी है. इसके बावजूद किसान को उम्मीद है कि पारंपरिक फसलों की तुलना में इससे बेहतर कमाई हो सकती है.

आसपास के किसानों की भी बढ़ी दिलचस्पी

बेतिया के इस गांव में ड्रैगन फ्रूट की खेती अब दूसरे किसानों का भी ध्यान खींच रही है. मंजय प्रसाद के खेत को देखकर किसान इस नई फसल के बारे में जानकारी ले रहे हैं. कम जमीन में इसकी खेती और बाजार में मिलने वाले अच्छे भाव के कारण किसानों की रुचि बढ़ रही है. ड्रैगन फ्रूट की खेती का यह प्रयोग दिखाता है कि किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ नई फसलों को भी आजमा रहे हैं. हालांकि किसी भी नई फसल की खेती शुरू करने से पहले स्थानीय मौसम, मिट्टी, पानी, बाजार और खेती की लागत की जानकारी लेना जरूरी है. (अभिषेक पांडेय का इनपुट)

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