Honey Bee farming: बाढ़ की मार झेलने वाले इलाके को आजाद ने बनाया शहद का हब

Honey Bee farming: बाढ़ की मार झेलने वाले इलाके को आजाद ने बनाया शहद का हब

मुजफ्फरपुर का शिवराहा चतुर्भुज और इसके आसपास का इलाका जो कभी बाढ़ और अपराध घटनाओं के लिए जाना जाता था. वो अब शहद का हब माना जाता है. सत्य नारायण आजाद ने खादी 1970 में की थी मधुमक्खी पालन की शुरुआत. 

मधुमक्खी पालन से किसानों को रहा हैं अच्छा मुनाफा मधुमक्खी पालन से किसानों को रहा हैं अच्छा मुनाफा
मणि भूषण शर्मा
  • Muzaffarpur,
  • Apr 02, 2023,
  • Updated Apr 02, 2023, 7:02 PM IST

केंद्र सरकार इन दिनों शहद उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है. क्योंकि इसमें कम लागत पर अच्छा मुनाफा है. इस बात को समझकर कई किसान मधुमक्खी पालन कर रहे हैं और इससे उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है.अब तो सरकार इस काम को मिशन मोड पर बढ़ावा दे रही है, लेक‍िन बिहार स्थ‍ित मुजफ्फरपुर के रहने वाले किसान सत्य नारायण आजाद साल 1970 से ही मधुमक्खी पालन कर अच्छी कमाई कर रहे हैं. उन्होंने अपनी इस मेहनत से पर‍िवार के साथ ही क्षेत्र की तस्वीर बदल कर रख दी है. उन्हें देखकर बीते कई सालों से पूरा गांव मधुमक्खी पालन से जुड़ा हुआ है. इस बदलाव से क्षेत्र की पहचान भी बदली है. नतीजत्तन, मुजफ्फरपुर का शिवराहा चतुर्भुज और इसके आसपास का इलाका जो कभी बाढ़ और अपराध घटनाओं के लिए जाना जाता था. वो आजाद की मेहनत से शहद का हब माना जाता है.

10 बॉक्स से शुरू क‍िया था मधुमक्खी पालन 

सत्य नारायण आजाद ने खादी ग्राम उद्योग से ट्रेनिंग लेकर 1970 में सब्स‍िडी में मिले दस बॉक्स से मधुमक्खी पालन की शुरुआत की थी, लेक‍िन आज पूरा परिवार और उनके कई रिश्तेदार इस कारोबार से जुड़ गए हैं. इस समय आजाद के पास चार हजार मधुमक्खी बॉक्स हैं. इतना ही नही आज आजाद के इस गांव में तकरीबन सभी लोग मधुमक्खी पालन से जुड़ गए हैं. इसके आसपास के दर्जनों गांव जैसे शिवराहा चतुर्भुज और मझौलिया म्हल्ला आदि के सैकड़ों लोग इसी काम में जुटे हुए हैं.

गांव में आई खुशहाली 

सत्य नारायण आजाद बताते है कि उन्होंने 1970 में मधु मखी पालन की शुरुआत की थी. इसके लिए उन्होंने खादी ग्रामोद्योग से ट्रेनिग ली थी, जहां से आजाद को 10 बॉक्स मधुमक्खी के मिले थे. आजाद आगे बताते है कि उस समय इलाके में बाढ़ काफी आती था और अपराधिक घटनाएं भी काफी होती थी. इसके बाद वो पहली मधुमखी के बॉक्स लेकर पंजाब गए. वहां से भी उन्हें मधुमक्खी के दस बक्सा मिला फिर कभी वो कभी पीछे मुड़कर नही देखे. आजाद का कहना है कि हमारे गांव के सभी लोग मधु मखी पालन करते है.इस व्यवसाय से आज पूरा गांव काफी समृद्ध हो गया है. 

सालाना हो रहा है अच्छा मुनाफा 

गांव के रहने वाले दूसरे किसान शिवजी पासवान बताते है कि उनके पास 300 बॉक्स मधुमक्खी के है, जिससे उन्हें सालाना 7 से आठ लाख की आमदनी होती है और लागत सिर्फ 4 से 5 हजार तक आती है. पासवान ने आगे बताया की शुरुआत में वो सत्य नारायण आजाद के यहां ही काम करते थे. काम सीखने के बाद वो फिर खुद की शुरुवात की और आज उनके गांव के बहुत से किसान आजाद से सीखकर आगे बढ़ रहे हैं. 

सत्य नारायण आजाद के बेटे राकेश कुमार जो पिता के कारोबार को अब आगे बढ़ा रहे हैंं, उन्होंने बताया कि आसपास के कई गांव के लोग इस कारोबार से जुड़ चुके हैं  और हमलोग के पास अपना चार हजार बॉक्स मधुमक्खी के है. इसके अलवा मधु प्यूरीफायर्ड मशीन भी लगा लिया है. पंजाब में सप्लाई करते है और वहा से इंपोर्ट होता है.  


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