फूलों की खेती से किसान ने पेश की सफलता की नई कहानी, गुलाब-जरबेरा से 10 गुना अधिक कमाई

फूलों की खेती से किसान ने पेश की सफलता की नई कहानी, गुलाब-जरबेरा से 10 गुना अधिक कमाई

प्रगतिशील किसान सरदानंद प्रधान आज गुलाब, जरबेरा और लिली जैसे फूलों की खेती करते हैं और उन्हें देशभर के बाजारों में भेजते हैं. सरदानंद प्रधान बताते हैं कि अच्छी क्वालिटी के फूल उगाने में आधुनिक तकनीक की बड़ी भूमिका है.

फूलों की खेतीफूलों की खेती
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 27, 2026,
  • Updated Apr 27, 2026, 6:44 PM IST

जहां कभी खेतों में सिर्फ पारंपरिक फसलें लहराती थीं, वहां अब तकनीक और तरक्की के फूल खिल रहे हैं. दरअसल, उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले का तिगरी गांव खेती की नई तस्वीर पेश कर रहा है, जहां खुले खेतों की जगह आधुनिक पॉलीहाउस ने ले ली है. यहां किसान स्मार्ट खेती अपनाकर कम जमीन से ज्यादा कमाई कर रहे हैं. इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल बने हैं प्रगतिशील किसान सरदानंद प्रधान, जिन्होंने खेती को मुनाफे का मॉडल बना दिया है. उन्होंने साल 2000 में सिर्फ 500 वर्ग मीटर के छोटे पॉलीहाउस से अपनी शुरुआत की थी. मेहनत और नई तकनीक के दम पर आज उन्होंने अपने काम को बढ़ाकर 14 एकड़ जमीन तक फैला दिया है, जहां आधुनिक सुविधाओं से लैस खेती की जा रही है. आइए जानते हैं प्रगतिशील किसान सरदानंद प्रधान के सफलता की कहानी.

फूल उगाने में आधुनिक तकनीक की बड़ी भूमिका

प्रगतिशील किसान सरदानंद प्रधान आज गुलाब, जरबेरा और लिली जैसे फूलों की खेती करते हैं और उन्हें देशभर के बाजारों में भेजते हैं. सरदानंद प्रधान बताते हैं कि अच्छी क्वालिटी के फूल उगाने में आधुनिक तकनीक की बड़ी भूमिका है. उन्होंने कहा कि पॉलीहाउस के बिना इतने अच्छे फूल तैयार करना संभव नहीं है. पौधों की सही देखभाल बहुत जरूरी होती है. फूलों की कलियों को भी कैप से ढका जाता है, ताकि वे सुरक्षित रहें और बेहतर तरीके से विकसित हों. उन्होंने बताया कि फूलों की पंखुड़ियां जितनी अच्छी और ज्यादा विकसित होती हैं, बाजार में उनकी कीमत भी उतनी ही ज्यादा मिलती है. पारंपरिक खुले खेत की खेती की तुलना में पॉलीहाउस खेती से करीब दस गुना ज्यादा मुनाफा होता है.

स्मार्ट तकनीक खेती के क्या-क्या हैं तरीके

प्रधान जैसे किसान अब तेजी से ड्रिप सिंचाई, मौसम की जानकारी देने वाली तकनीक और स्मार्ट खेती के तरीके अपना रहे हैं. इन नई तकनीकों से खेती न सिर्फ ज्यादा उत्पादन देने लगी है, बल्कि अब यह पहले से ज्यादा आसान, बेहतर और योजनाबद्ध भी हो गई है. साथ ही अब बड़ी संख्या में युवा भी खेती और इससे जुड़े कारोबार में आगे आ रहे हैं. इसका अच्छा उदाहरण सना खान हैं, जो पेशे से इंजीनियर हैं. कॉलेज प्रोजेक्ट के दौरान उन्हें खेती और जैविक खाद के क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा मिली.

इसके बाद उन्होंने साल 2014 में अपना कारोबार शुरू किया. आज उनकी कंपनी हर महीने करीब 400 टन जैविक खाद तैयार करती है. सिर्फ व्यवसाय ही नहीं, सना खान लोगों को जागरूक करने का भी काम कर रही हैं. वह 100 से ज्यादा स्कूलों के साथ मिलकर कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाती हैं, जहां बच्चों और लोगों को टिकाऊ खेती और जैविक खेती के बारे में जानकारी दी जाती है.

सना खान ने अपने ग्राहकों के बारे में बताया

अपने ग्राहकों के बारे में सना खान ने बताया कि उनके मुख्य ग्राहक किसान, बीज की दुकान चलाने वाले लोग और शहरों में बागवानी करने वाले लोग हैं. उन्होंने कहा कि कोविड के बाद कई लोगों ने अपनी छत और टेरेस पर सब्जियां उगाना शुरू किया, जो अब उनके बड़े ग्राहक बन चुके हैं. इसके अलावा बड़ी संख्या में आलू किसान भी उनकी जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं.

जैविक और बिना रसायन वाली खेती की बढ़ती मांग से ऐसे कारोबार तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. अब लोग सेहत को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं और अच्छी क्वालिटी वाले उत्पाद चाहते हैं. यही वजह है कि वर्मीकम्पोस्ट जैसी जैविक खाद की मांग लगातार बढ़ रही है. यह किसानों के लिए फायदेमंद और अच्छा विकल्प बनकर उभरी है. आज खेती का रूप तेजी से बदल रहा है. खेत अब सिर्फ फसल उगाने की जगह नहीं रह गए हैं, बल्कि नवाचार, रोजगार और नए कारोबार के केंद्र बनते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रगतिशील किसान और युवा उद्यमी मिलकर भारतीय कृषि को आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए मजबूत बना रहे हैं. (ANI)

 

MORE NEWS

Read more!