
किसान तक का किसान कारवां आज बुलंदशहर जनपद के बिहटा गांव में पहुंचा, जहां किसानों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली. 75 जिलों में चल रही इस विशेष कवरेज में यह 74वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम के दौरान जनपद के कृषि अधिकारियों ने किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी और उनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया. वहीं, पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने किसानों को पशुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं, जिससे उनकी आय बढ़ाने में मदद मिल सके. इसके अलावा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने आधुनिक खेती की तकनीकों और उन्नत कृषि पद्धतियों पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम में किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विशेषज्ञों से अपने सवालों के जवाब भी प्राप्त किए.
एफपीओ की महिला संचालिका संतोष राजपूत ने बताया कि वह एक खिलाड़ी होने के साथ-साथ प्रगतिशील महिला किसान भी हैं. उन्होंने मिलेट (श्री अन्न) से कुकीज बनाकर मूल्य संवर्धन का उदाहरण पेश किया. साथ ही हाईटेक नर्सरी के माध्यम से फल और सब्जियों की पौध तैयार कर किसानों को उपलब्ध करा रही हैं. उन्होंने उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकार के सहयोग से बुलंदशहर की ताजी सब्जियां दिल्ली तक पहुंचाने का संकल्प भी लिया.
कृषि विज्ञान केंद्र बुलंदशहर के वैज्ञानिक डॉ. ललित कुमार ने किसानों को पराली न जलाने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि पराली जलाने से मिट्टी के सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी सख्त हो जाती है. इससे ऑर्गेनिक मैटर की मात्रा घटती है. उन्होंने हरी खाद, गोबर की खाद और अन्य जैविक खाद के प्रयोग पर जोर दिया तथा गर्मी के मौसम में धान की फसल न लगाने की अपील की.
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार ने नंद बाबा योजना, नंदिनी योजना और मिनी नंदिनी योजना के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि नंदिनी योजना के तहत बड़े स्तर पर पशुपालन किया जाता है, जबकि मिनी नंदिनी में 10 देसी पशुओं का पालन किया जाता है, जिसके लिए एक हेक्टेयर जमीन आवश्यक है. इन योजनाओं में आवेदन पोर्टल के माध्यम से होता है और चयन लॉटरी से किया जाता है, जिसमें महिलाओं को 50% आरक्षण दिया गया है.
कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष एवं हेड डॉ. रिशु सिंह ने कहा कि जैसे हम अपने शरीर की जांच कराते हैं, उसी तरह खेत की मिट्टी की जांच भी जरूरी है. उन्होंने बताया कि मिट्टी को स्वस्थ रखने के लिए 17 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, लेकिन किसान केवल 3 तत्वों पर ध्यान देते हैं. उन्होंने किसानों से समय-समय पर मृदा परीक्षण कराकर आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति करने की अपील की.
इस्को एमसी के जिला प्रभारी बृजेश कुमार ने बताया कि कंपनी का उद्देश्य किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले और उचित दाम पर कीटनाशक उपलब्ध कराना है. उन्होंने कहा कि बाजार में कई बार किसान नकली या महंगे कीटनाशकों के कारण नुकसान झेलते हैं. कंपनी ने जापान की मित्सुबिशी के सहयोग से 2015 में शुरुआत की और आज 90 से अधिक उत्पाद उपलब्ध हैं.
प्रगतिशील किसान राकेश सिरोही ने बताया कि गन्ने की 0238 वैरायटी अब रोगग्रस्त हो चुकी है और रेड रॉट व टॉप बोरर जैसी बीमारियां फैल रही हैं. उन्होंने किसानों को 16202 और 18131 जैसी नई विकसित किस्मों को अपनाने की सलाह दी, जो रोग प्रतिरोधी हैं और बेहतर उत्पादन देती हैं.
कृषि विभाग के सब्जेक्ट मैटर स्पेशलिस्ट कुसुमपाल सिंह ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए बीज उपलब्ध हैं और ढैंचा (हरी खाद) के बीज की बुकिंग 10 मई तक की जा रही है. इसके अलावा यंत्रीकरण योजना और पीएम कुसुम योजना के तहत भी किसान आवेदन कर सकते हैं.
पद्मश्री से सम्मानित किसान भारत भूषण त्यागी ने कहा कि किसान अक्सर उन विषयों पर चर्चा करते हैं, जो उनके नियंत्रण में नहीं हैं. उन्होंने किसानों से सकारात्मक सोच अपनाने और अपनी ताकत को पहचानने की अपील की. उन्होंने कहा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि समाज के पोषणकर्ता हैं.
किसान तक के वरिष्ठ संवाददाता जेपी सिंह ने कहा कि आज किसान का बेटा खेती से दूर हो रहा है. उन्होंने किसानों से अपनी सोच बदलने और खुद को उद्यमी बनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि किसानों को प्रोसेसिंग प्लांट से जुड़कर अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त करना चाहिए, ताकि मुनाफा सीधे किसान को मिले.
जादूगर सलमान ने किसानों को देखा-देखी खेती से बचने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि अधिक उर्वरक डालने से उत्पादन नहीं बढ़ता, बल्कि नुकसान हो सकता है. उन्होंने कहा कि खेत की भी एक क्षमता होती है, इसलिए संतुलित खेती अपनाना जरूरी है.
कार्यक्रम के अंत में किसानों के लिए लकी ड्रा का आयोजन किया गया, जिसमें 500 रुपये के 10 इनाम वितरित किए गए. 1000 के पांच इनाम दिए गए जिनमें अशोक, जकारिया, भीष्म, पिंटू और अनु के नाम शामिल हैं.
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