बस्तर की गुंजवती पेगड़ बनीं ‘लखपति दीदी’, खेती और पशुपालन से बदली तकदीर

बस्तर की गुंजवती पेगड़ बनीं ‘लखपति दीदी’, खेती और पशुपालन से बदली तकदीर

गुंजवती पेगड़ ने जब राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” से जुड़कर अपने सपनों को दिशा दी, तो उनकी मेहनत ने उन्हें सीधे “लखपति दीदी” की पहचान तक पहुंचा दिया. उन्होंने हर कदम पर अपने जीवन की कहानी को नया मोड़ दिया है और आज वे पूरे गांव की प्रेरणा बन गई हैं.

गुंजवती पेगड़ बनीं ‘लखपति दीदी’गुंजवती पेगड़ बनीं ‘लखपति दीदी’
संदीप कुमार
  • Noida,
  • Apr 30, 2026,
  • Updated Apr 30, 2026, 6:10 PM IST

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की धरती से निकली एक साधारण सी शुरुआत आज आत्मनिर्भरता की बड़ी मिसाल बन चुकी है. कभी सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच जीवन जीने वाली गुंजवती पेगड़ ने जब राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” से जुड़कर अपने सपनों को दिशा दी, तो उनकी मेहनत ने उन्हें सीधे “लखपति दीदी” की पहचान तक पहुंचा दिया. दुर्गावती स्व सहायता समूह का हिस्सा बनने के बाद उन्होंने न सिर्फ नई चीजें सीखीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारकर अपनी आमदनी के रास्ते भी खुद बनाए. धान की खेती से शुरुआत कर उन्होंने धीरे-धीरे सब्जी उत्पादन, मुर्गी पालन, मुर्गी ब्रुडिंग और गाय पालन जैसे कई आजीविका कार्यों को अपनाया. उन्होंने हर कदम पर अपने जीवन की कहानी को नया मोड़ दिया है और आज वे पूरे गांव की प्रेरणा बन गई हैं.

“बिहान” योजना ने बदली गुंजवती पेगड़ की जिंदगी

सरकारी मदद ने उनकी इस सफलता की राह को और भी आसान बना दिया. “बिहान” योजना के तहत गुंजवती पेगड़ को अलग-अलग माध्यमों से आर्थिक सहयोग मिला. इसमें सीआईएफ के तहत 60 हजार रुपये, बैंक लिंकेज से 60 हजार रुपये, आईएफसी से 30 हजार रुपये और पीएफएमएम से 40 हजार रुपये शामिल थे. इस तरह उन्हें कुल 1 लाख 90 हजार रुपये का लोन मिला, जिसने उनके छोटे-छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ाने में बड़ी मदद की और उनकी आय को मजबूत आधार दिया.

पशुपालन और खेती से हो रही इतनी कमाई

इस आर्थिक सहयोग और लगातार मेहनत का नतीजा यह हुआ कि गुंजवती पेगड़ की सालाना आय में अच्छी बढ़ोतरी हुई है. गुंजवती धान की खेती से 60 हजार रुपये, सब्जी उत्पादन करके 15 हजार रुपये, मुर्गी पालन से 16 हजार रुपये, मुर्गी ब्रुडिंग से 10 हजार रुपये और गाय पालन से 40 हजार रुपये की आमदनी कमा रही है. इन सभी कामों को मिलाकर उनकी कुल कमाई बढ़ गई है और उनका परिवार पहले से ज्यादा आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बन गया है.

गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं गुंजवती  

गुंजवती पेगड़ का कहना है कि “बिहान” योजना ने उन्हें सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं दी, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाया है. स्व सहायता समूह से जुड़कर उन्हें बहुत कुछ सीखने और आगे बढ़ने का मौका मिला, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकीं. आज वे न सिर्फ अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं, बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं के लिए भी एक प्रेरणा बन गई हैं. उनकी सफलता यह साबित करती है कि अगर सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और समूह का साथ मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर अच्छी आमदनी कमा सकती हैं. “बिहान” योजना ग्रामीण महिलाओं के सपनों को पूरा करने का एक मजबूत जरिया बन रही है और यह संदेश दे रही है कि अब “समूह से लखपति बनना सपना नहीं, हकीकत है.”

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