Apple Farming: महाराष्ट्र में खिला सेब का बाग, 2 एकड़ में तैयार हुआ ‘मिनी कश्मीर’

Apple Farming: महाराष्ट्र में खिला सेब का बाग, 2 एकड़ में तैयार हुआ ‘मिनी कश्मीर’

आमतौर पर माना जाता है कि सेब की खेती सिर्फ ठंडे इलाकों में ही संभव है. लेकिन महाराष्ट्र के सतारा जिले के वाई तहसील के पसरणी गांव के एक किसान ने इस सोच को बदल कर रख दिया है.

सेब का बागसेब का बाग
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 12, 2026,
  • Updated Apr 12, 2026, 11:08 AM IST

सेब का नाम आते ही लोगों के जेहन में हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की ठंडी वादियां याद आती हैं. आमतौर पर माना जाता है कि सेब की खेती सिर्फ ठंडे इलाकों में ही संभव है. लेकिन महाराष्ट्र के सतारा जिले के वाई तहसील के पसरणी गांव के एक किसान ने इस सोच को बदल कर रख दिया है. दरअसल, पसरणी गांव के किसान बापू भिलारे ने अपनी मेहनत और आधुनिक तकनीक के दम पर ऐसे इलाके में सेब उगाकर सबको हैरान कर दिया है, जहां पहले इसकी कल्पना भी नहीं की जाती थी. उन्होंने करीब 2 एकड़ जमीन में सेब का बाग तैयार किया है, जिसमें लगभग 600 पेड़ लगाए गए हैं.

किसान ने तैयार किए 30 हजार सेब के पौधे

आज इन पेड़ों पर फूल आ चुके हैं और कई पेड़ों पर लाल, रसदार सेब भी लगने लगे हैं. यह नजारा देखने में बिल्कुल कश्मीर जैसा लगता है, इसलिए लोग इसे ‘मिनी कश्मीर’ कहने लगे हैं. किसान बापू भिलारे ने सिर्फ सेब उगाने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने इससे जुड़े नए अवसर भी तैयार किए हैं. उन्होंने अपने खेत में करीब 30 हजार सेब के पौधे भी तैयार किए हैं. पहले किसानों को सेब के पौधे खरीदने के लिए जम्मू-कश्मीर या शिमला तक जाना पड़ता था, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर ही पौधे उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे किसानों को काफी सुविधा मिल रही है.

मेहनत के बल पर तैयार किया सेब बागान

इस क्षेत्र में ज्यादा बारिश होती है, इसलिए यहां सेब की खेती को लेकर लोगों के मन में कई शंकाएं थीं. लेकिन किसान बापू भिलारे ने नई तकनीक, सही देखभाल और मेहनत के बल पर यह साबित कर दिया कि सही तरीका अपनाया जाए तो किसी भी फसल को उगाया जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक खेती तकनीक, जैसे सही किस्म का चयन, सिंचाई प्रबंधन और पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग, इस तरह की खेती को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं.

पसरणी गांव बना ‘मिनी कश्मीर’

आज बापू भिलारे का यह सेब बाग लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है. आसपास के किसान कृषि छात्र और पर्यटक यहां आकर इस अनोखे प्रयोग को देख रहे हैं और इससे सीख भी ले रहे हैं. खुद किसान बापू भिलारे का कहना है कि शुरुआत में उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. लगातार प्रयास करते रहे और अब उन्हें अच्छी पैदावार मिल रही है. यह कहानी इस बात का उदाहरण है कि अगर किसान नई तकनीक अपनाएं और मेहनत करें, तो वे किसी भी परिस्थिति में सफलता हासिल कर सकते हैं. पसरणी गांव का यह ‘मिनी कश्मीर’ अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. 

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