धान छोड़ अपनाई ग्राफ्टेड बैंगन की खेती, छत्‍तीसगढ़ के किसान की आय में हुआ बड़ा इजाफा, पढ़ें सक्‍सेस स्‍टोरी

धान छोड़ अपनाई ग्राफ्टेड बैंगन की खेती, छत्‍तीसगढ़ के किसान की आय में हुआ बड़ा इजाफा, पढ़ें सक्‍सेस स्‍टोरी

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के किसान नवीन साव ने पारंपरिक धान खेती छोड़ ग्राफ्टेड बैंगन की खेती अपनाई और आधुनिक तकनीकों की मदद से प्रति एकड़ 155 क्विंटल तक उत्पादन हासिल किया. इस खेती से उन्हें लाखों रुपए का शुद्ध लाभ मिला.

Farmer Naveen SavFarmer Naveen Sav
क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 24, 2026,
  • Updated May 24, 2026, 7:12 PM IST

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना विकासखंड स्थित बोहारपार गांव के किसान नवीन साव ने पारंपरिक धान खेती से हटकर आधुनिक उद्यानिकी खेती को अपनाकर नई मिसाल पेश की है. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उन्होंने ग्राफ्टेड बैंगन की खेती शुरू की और कम समय में बेहतर उत्पादन और ज्‍यादा मुनाफा हासिल कर रहे हैं. आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से उनकी खेती अब आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है.

ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक से बढ़ा उत्पादन

छत्‍तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के मुताबिक, नवीन साव पहले अपने खेतों में धान की खेती करते थे, लेकिन इससे सीमित आमदनी ही हो पाती थी. धान की फसल से प्रति एकड़ करीब 21 क्विंटल उत्पादन मिलता था और लगभग 45 हजार 600 रुपये तक का लाभ होता था. आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2025-26 में 1.31 हेक्टेयर भूमि पर ग्राफ्टेड बैंगन की खेती शुरू की. इस दौरान उन्होंने ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल किया, जिससे फसल प्रबंधन बेहतर हुआ और उत्पादन में बड़ा इजाफा देखने को मिला.

प्रति एकड़ 155 क्विंटल तक पहुंचा बैंगन उत्पादन

वैज्ञानिक पद्धति से की गई खेती का असर उत्पादन पर साफ दिखाई दिया. नवीन साव को प्रति एकड़ करीब 155 क्विंटल बैंगन की पैदावार मिली, जो पारंपरिक धान खेती की तुलना में कई गुना अधिक रही. ग्राफ्टेड बैंगन की खासियत यह है कि इसमें रोगों का असर कम होता है और पौधों की उत्पादन क्षमता अधिक रहती है. जानकारी के मुताबिक एक पौधे से करीब 50 किलो तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.

सरायपाली और ओडिशा की मंडियों में मिली अच्छी कीमत

नवीन साव ने अपनी उपज को सरायपाली और पड़ोसी राज्य ओडिशा की मंडियों में बेचा. उन्हें बैंगन का थोक भाव करीब 30 रुपए प्रति किलो मिला. सभी खर्च निकालने के बाद उन्होंने लगभग 2 लाख 45 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया. यह कमाई धान की खेती से होने वाली आय की तुलना में पांच गुना से भी अधिक बताई जा रही है.

उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से मिली सफलता

किसान नवीन साव ने अपनी सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और शासकीय योजनाओं को दिया है. उन्‍होंने कहा कि नई तकनीकों को सीखने और खेत में प्रयोग करने की सोच ने उन्हें बेहतर परिणाम दिए. अब आसपास के गांवों के किसान भी उनके खेत का दौरा कर आधुनिक उद्यानिकी खेती की जानकारी ले रहे हैं. इससे क्षेत्र में पारंपरिक फसलों के साथ लाभकारी उद्यानिकी खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ता दिखाई दे रहा है.

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