
झांसी के किसान की अनोखी पहलझांसी के चिरगांव के रहने वाले किसान धर्मेंद्र नामदेव ने साबित कर दिया है कि मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर हो तो खेती में किसान को भरपूर उत्पादन मिल सकता है. पेशे से शिक्षक धर्मेंद्र नामदेव मिट्टी में घटते कार्बनिक तत्व की मात्रा को देखकर चिंतित थे. तब उन्होंने अपने खेतों में एक नया प्रयोग शुरू किया. पिछले 5 साल से वे देशी गाय के गोमूत्र का उपयोग करते हुए सरसों और दलहन की फसलों की खेती कर रहे हैं. शुरू में उत्पादन सामान्य रहा, लेकिन मिट्टी का स्वास्थ्य लगातार बेहतर होता गया. आज उनके खेत की मिट्टी में कार्बनिक तत्व (ऑर्गेनिक कार्बन) का प्रतिशत 1 फीसदी से ज्यादा हो चुका है. इसी की बदौलत उन्हें अपनी फसलों से भरपूर उत्पादन मिल रहा है.
धर्मेंद्र नामदेव बताते हैं कि उन्होंने रासायनिक उर्वरक का प्रयोग बिल्कुल बंद नहीं किया, बल्कि इसे कम कर दिया और गोमूत्र का उपयोग बढ़ा दिया.

सरकार की मंशा के अनुरूप धर्मेंद्र दलहन और तिलहन फसलों पर फोकस कर रहे हैं. इस साल उन्होंने 2 एकड़ से ज्यादा में सरसों और 1 एकड़ में चने की खेती की. रासायनिक उर्वरक के साथ गोमूत्र के उपयोग से न सिर्फ मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर हुआ, बल्कि सरसों की फसल की लंबाई 8 फीट तक पहुंच गई. कुल उत्पादन में 30 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई.
धर्मेंद्र नामदेव के प्रयोग का सबसे बड़ा असर चने की फसल में देखने को मिला।. पहले वे बिना गोमूत्र के खेती करते थे, जिससे उत्पादन तो अच्छा मिलता था लेकिन पोषक तत्व सीमित रहते थे. गोमूत्र के उपयोग के बाद उन्होंने अपनी फसल की जांच कराई, जिसमें हैरान करने वाले नतीजे सामने आए. पहले चने में प्रोटीन 19%, फाइबर 11%, आयरन 2.5%, कैल्शियम 68% और फास्फोरस 82% था. लेकिन गोमूत्र के उपयोग के बाद प्रोटीन बढ़कर 23.5%, फाइबर 18.9%, आयरन 8.3%, कैल्शियम 173.52% और फास्फोरस 325.41% तक पहुंच गया. यह नतीजे बताते हैं कि प्राकृतिक तरीकों से न सिर्फ उत्पादन, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बेहतर की जा सकती है.
इस प्रयोग के परिणामों से धर्मेंद्र नामदेव ने साबित किया है कि अगर किसान गाय के गोबर और गोमूत्र का सही उपयोग करें तो:
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