Cotton Import: कपास पर जीरो हुई इंपोर्ट ड्यूटी, किसानों को झटका, टेक्सटाइल इंडस्ट्री को तोहफा

Cotton Import: कपास पर जीरो हुई इंपोर्ट ड्यूटी, किसानों को झटका, टेक्सटाइल इंडस्ट्री को तोहफा

केंद्र सरकार ने कपास आयात पर लगने वाली करीब 11 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी (कस्टम ड्यूटी) को 31 अक्टूबर 2026 तक के लिए हटा दिया है. फैसले से टेक्सटाइल उद्योग को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन नई फसल सीजन से पहले कपास किसानों की चिंता बढ़ गई है.

cotton custom duty waived till 31st october 2026cotton custom duty waived till 31st october 2026
क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 30, 2026,
  • Updated May 30, 2026, 6:12 PM IST

केंद्र सरकार ने कपास के आयात पर लगने वाली करीब 11 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी (कस्टम ड्यूटी) को 1 जून 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक के लिए हटा दिया है. सरकार का कहना है कि यह फैसला टेक्सटाइल उद्योग के लिए कपास की उपलब्धता बढ़ाने और कच्चे माल की लागत कम करने के उद्देश्य से लिया गया है. वहीं, जीरो इंपोर्ट ड्यूटी इंपोर्ट के इस फैसले को कपास किसानों के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है. सरकार की ओर से दी गई छूट ठीक उस अवधि तक लागू रहेगी जब देश में कपास फसल की खेती चल रही होती है. वहीं, कई कपास उत्पादक क्षेत्रों में अक्टूबर से नई फसल की आवक शुरू हो जाती है. ऐसे में किसानों को आशंका है कि शुल्क मुक्त आयातित कपास की उपलब्धता बढ़ने से घरेलू बाजार पर दबाव बन सकता है और उन्हें अपनी उपज के बेहतर दाम हासिल करने में दिक्‍कत होगी.

MSP हासिल करना हो सकता है मुश्किल

कपास उत्पादक किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर आयातित कपास सस्ती दरों पर बाजार में पहुंचती है तो घरेलू खरीददारों के पास विकल्प बढ़ जाएंगे. इससे स्थानीय मंडियों में कीमतों पर असर पड़ सकता है. ऐसे हालात में किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के आसपास या उससे ऊपर कीमत प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर तब जब बाजार में सप्‍लाई पहले से पर्याप्त हो. केंद्र सरकार ने खरीफ मार्कटिंग सीजन 2026-27 के लिए मीडियम स्‍टेपल कपास का MSP- 8267 रुपये प्रति क्विंटल और लॉन्ग स्टेपल कपास का MSP- 8667 रुपये प्रति क्विंटल तय‍ किया है.

पिछले साल का अनुभव बढ़ा रहा चिंता

किसान संगठनों और बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले साल भी जब सरकार ने अगस्‍त के अंत से लेकर 31 दिसंबर तक कपास आयात पर ड्यूटी में राहत दी थी, तब भी घरेलू बाजार में कीमतों पर भारी दबाव देखने को मिला था. वहीं, अब 5 महीने के बाद सरकार ने एक बार फिर शुल्‍क मुक्‍त आयात का द्वार खोल दिया है. इसी वजह से इस बार भी किसानों को डर है कि आयात को प्रोत्साहन मिलने का असर स्थानीय भावों पर पड़ सकता है.

इस बार रकबा बढ़ने की उम्मीद

वहीं, इस बार देश में कपास का रकबा 7 प्रतिशत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. कई राज्यों में किसान बढ़े हुए एमएसपी और बेहतर कीमतों की उम्मीद के साथ कपास की बुवाई बढ़ा सकते हैं. लेकिन, दूसरी ओर मौसम को लेकर अनिश्चितता भी बनी हुई है. कमजोर मॉनसून की आशंकाओं के साथ ला-नीना की सक्रियता को लेकर भी चर्चा है, जिससे उत्पादन और पैदावार पर असर पड़ सकता है. ऐसे में सस्‍ते आयात से किसानों को आगे नुकसान हुआ तो यह उनके लिए बड़ा झटका साबित होगा.

एक तरफ सरकार टेक्सटाइल उद्योग को सस्ता कच्चा माल उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कपास उत्पादक किसानों के सामने भविष्य की कीमतों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. अगर घरेलू उत्पादन बढ़ता है और साथ ही शुल्क मुक्त आयातित कपास भी बाजार में आती है तो नई फसल के सीजन में कीमतों पर दबाव की स्थिति बन सकती है. इसी कारण कृषि क्षेत्र के कई जानकार इस फैसले को कपास किसानों के लिए 'घातक' कदम मान रहे हैं.

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