10 बिस्वा में कमाल: जौनपुर के किसान बृजेश पटेल ने सब्जी खेती से कमाए लाखों, बने प्रगतिशील कृषक की मिसाल

10 बिस्वा में कमाल: जौनपुर के किसान बृजेश पटेल ने सब्जी खेती से कमाए लाखों, बने प्रगतिशील कृषक की मिसाल

जौनपुर के किसान बृजेश कुमार पटेल ने महज 10 बिस्वा जमीन पर वैज्ञानिक तरीके से सब्जी खेती कर लाखों की आय अर्जित की है. आधुनिक तकनीक और उद्यानिकी खेती अपनाकर उन्होंने यह साबित किया कि छोटी जोत में भी मेहनत और नई सोच से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है.

धर्मेंद्र सिंह
  • Jaunpur ,
  • May 27, 2026,
  • Updated May 27, 2026, 10:34 AM IST

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद के जलालपुर विकासखंड अंतर्गत आदत शाहपुर कलां गांव के किसान बृजेश कुमार पटेल ने यह साबित कर दिया है कि खेती में सफलता जमीन के आकार से नहीं, बल्कि नई सोच, आधुनिक तकनीक और सही मार्गदर्शन से मिलती है. महज 0.506 हेक्टेयर भूमि वाले इस छोटे किसान ने वैज्ञानिक तरीके से उद्यानिकी खेती अपनाकर न सिर्फ अपनी आय बढ़ाई, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं.

परंपरागत खेती से नहीं मिल रही थी पर्याप्त आय

इंटरमीडिएट शिक्षित बृजेश कुमार पटेल पहले अपनी छोटी जोत पर पारंपरिक रूप से धान और गेहूं की खेती करते थे. बढ़ती लागत और घटती आमदनी के कारण खेती से परिवार का खर्च चलाना कठिन हो रहा था. सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी और आधुनिक तकनीकी जानकारी का भी अभाव था. कम भूमि होने के कारण उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ऐसी कौन-सी खेती की जाए जिससे कम समय में बेहतर आय प्राप्त हो सके.

उद्यान विभाग से जुड़ने के बाद बदली तस्वीर

बृजेश कुमार पटेल के जीवन में बड़ा बदलाव तब आया जब उन्होंने अपने पिता के मार्गदर्शन में उद्यान विभाग से संपर्क किया. जिला उद्यान अधिकारी सीमा सिंह राणा द्वारा संचालित हाइटेक नर्सरी और उन्नत बीज वितरण योजनाओं की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ाया.

विभागीय प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग से उन्हें यह समझ आया कि खेती को वैज्ञानिक तरीके से कर अधिक लाभ कमाया जा सकता है. हाइटेक नर्सरी से उन्नत पौधे मिलने के बाद उन्होंने व्यावसायिक स्तर पर भिंडी की खेती शुरू की.इसके साथ ही कद्दू, टमाटर, करेला और बैंगन जैसी संकर सब्जियों की खेती भी अपनाई.

वैज्ञानिक तकनीक से बढ़ा उत्पादन और मुनाफा

बृजेश ने भिंडी की खेती में आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों का इस्तेमाल किया. उन्होंने बेड बनाकर रोपाई की, खरपतवार नियंत्रण की वैज्ञानिक तकनीक अपनाई और पौधों की उचित दूरी रखी.लाइन से लाइन की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 सेंटीमीटर रखकर खेती की गई, जिससे उत्पादन बेहतर हुआ.

सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने केवल 10 बिस्वा भूमि पर करीब 8 हजार रुपये की लागत लगाकर मात्र 60 दिनों में लगभग 60 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया.वर्तमान में भिंडी की लगातार तुड़ाई से उन्हें लगभग 20 हजार रुपये अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है.

इसके अलावा कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा की हाइटेक नर्सरी से प्राप्त कद्दू, टमाटर, करेला और बैंगन के पौधों से भी उन्हें करीब 20 हजार रुपये का अतिरिक्त लाभ मिला. इस तरह सीमित भूमि से उन्होंने लगभग 1 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर ली.

“खेती में बड़ी जमीन नहीं, नई सोच जरूरी”

बृजेश कुमार पटेल का कहना है कि खेती में सफलता के लिए बड़ी जमीन नहीं, बल्कि आधुनिक सोच और वैज्ञानिक तकनीक की आवश्यकता होती है. वे अन्य किसानों को संदेश देते हैं कि परंपरागत खेती के सीमित दायरे से बाहर निकलकर आधुनिक और तकनीकी खेती अपनानी चाहिए. यदि किसान विभागीय योजनाओं, प्रशिक्षण और उन्नत तकनीकों का सही उपयोग करें तो कम भूमि से भी अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है.

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन, उद्यान विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा को दिया. उनका मानना है कि सरकार की योजनाओं और विभागीय मार्गदर्शन का सही लाभ लेकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं. 

 

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