
भारत में दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिने जाने वाले जापानी मियाजाकी आम की खेती का चलन बढ़ रहा है. मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के किसान संकल्प सिंह परिहार ने अपने बगीचे में इस खास किस्म के आम को उगाकर नई पहचान बनाई है. मजबूत संकल्प और प्रयोगधर्मी खेती के दम पर उन्होंने विदेशी फल उत्पादन को स्थानीय स्तर पर सफल बनाकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है. मियाजाकी आम को जापान के मियाजाकी शहर के नाम पर जाना जाता है. इसे “एग ऑफ सन” यानी सूर्य का अंडा भी कहा जाता है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 2 लाख 70 हजार रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है. संकल्प सिंह परिहार ने बताया कि शुरुआत में उन्हें इस आम की असली कीमत और लोकप्रियता का अंदाजा नहीं था, लेकिन जैसे-जैसे इसकी चर्चा बढ़ी, वैसे-वैसे इसकी मांग भी बढ़ती गई. उन्होंने इस आम को 50 हजार रुपये प्रति किलो तक बेचा है.
जबलपुर जिले से करीब 25 किलोमीटर दूर चरगवां रोड स्थित हिनौता गांव में संकल्प परिहार ने अपने बगीचे में जापान, चीन, अमेरिका और नेपाल समेत कई विदेशी नस्ल के आमों के पेड़ लगाए हैं. इसके साथ ही भारत की भी कई उन्नत किस्मों की खेती की जा रही है. इस बगीचे में एक ऐसी दुर्लभ किस्म भी मौजूद है, जिसका एक आम करीब 4 किलो तक वजन का हो जाता है.
संकल्प परिहार ने बताया कि पिछले वर्षों में आमों की चोरी की घटनाएं सामने आने के बाद इस बार बगीचे की सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं. आमों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. साथ ही एक दर्जन जर्मन शेफर्ड कुत्तों को भी सुरक्षा में तैनात किया गया है. ये कुत्ते और कैमरे 24 घंटे बगीचे की निगरानी करते हैं, ताकि किसी तरह की चोरी या नुकसान की घटना न हो.
किसान ने बताया कि मियाजाकी आम और विदेशी किस्मों के इस बगीचे को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. आम प्रेमियों के साथ किसान भी यहां आकर नई तकनीक और विदेशी किस्मों की जानकारी ले रहे हैं. संकल्प परिहार की यह पहल अब क्षेत्र में आधुनिक और प्रयोगधर्मी खेती का उदाहरण बनती जा रही है. (धीरज शाह की रिपोर्ट)