तेलंगाना में पिछले कुछ दिनों से जारी उर्वरक संकट ने अब एक बड़ा रूप ले लिया है. यहां पर पिछले कुछ दिनों से इसका खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है. उर्वरक संकट के खिलाफ यहां के गन पार्क में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन भी आयोजित किया गया है. प्रदर्शन की अगुवाई भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) कर रहा है और पार्टी के नेताओं ने खाली यूरिया बैग के साथ विरोध प्रदर्शन किया. यूरिया की कमी के लिए कांग्रेस पार्टी को जिम्मेदार ठहराते हुए नारे लगाए. पिछले काफी दिनों से यहां के प्राथमिक कृषि सहकारी समिति केंद्रों पर घंटों लंबी कतारें नजर आ रही है और कहीं-कहीं पर किसान तो सुबह से ही लाइनों में खड़े नजर आते हैं. किसानों का यूं लाइन में लगना अब जैसे आम बात हो गई है. कुछ किसानों की मानें तो इस तरह के नजारे काफी सालों से नजर नहीं आए थे.
राज्य में किसान यूरिया की भारी कमी का सामना करने को मजबूर हैं और बीआरएस ने इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है. पार्क में किसानों ने सरकार विरोधी कुछ नारे भी लगाए जो कुछ इस तरह से थे, 'इस सरकार ने त्योहारों के मौसम में भी किसानों को सड़कों पर खड़ा होने पर मजबूर कर दिया है.' 'गणपति बप्पा मोरया - हमें यूरिया चाहिए!' प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए. इसके अलावा, 'किसानों को उर्वरक न दे पाने वाली कांग्रेस सरकार को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए,' 'किसानों को बिना किसी देरी के यूरिया की आपूर्ति की जानी चाहिए,' और 'रेवंत की गलती, किसानों के साथ विश्वासघात'.
पार्टी के मुखिया केटीआर ने कहा, 'राज्य सरकार को कम से कम 15 दिनों का विधानसभा सत्र आयोजित करना ही होगा. अगर इसे उससे आगे भी बढ़ाया जाता है, तो भी हम तैयार हैं. सरकार विधानसभा में जो भी विषय रखेगी, हम उसका सही जवाब देने के लिए तैयार हैं. कृषि क्षेत्र से लेकर किसी भी अन्य मुद्दे पर, अगर वे चर्चा के लिए उसे उठाते हैं, तो हम उसका सामना करने के लिए तैयार हैं. हम कृषि के विकास और कल्याण के लिए केसीआर सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं और कार्यक्रमों का विवरण प्रस्तुत करेंगे.'
उनका कहना था कि राज्य सरकार विधानसभा की कार्यवाही को अपनी सुविधानुसार चलाने की कोशिश कर रही है. वे किसानों और राज्य में उर्वरक संकट के मुद्दों पर कुछ नहीं बोल रहे हैं. केटीआर ने दावा किया कि केसीआर की 10 साल की सरकार के दौरान, एक बार भी उर्वरक की इतनी कमी का सामना नहीं करना पड़ा. किसानों को कभी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ा. इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि ऐसा क्यों है कि कांग्रेस के सत्ता में आते ही किसान यूरिया लेने के लिए चप्पल और आधार कार्ड लेकर कतार में लगने को मजबूर हो जाते हैं? किसान त्योहारों के दिनों में भी कतारों में क्यों खड़े रहते हैं, बारिश में भीगते हैं और सिर्फ खाद पाने के लिए परेशान होते हैं?
केटीआर के मुताबिक जिन किसानों की फसलें बर्बाद हुईं और भारी बारिश से हुई परेशानियों पर विधानसभा में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए. राज्य में कृषि संकट पर विधानसभा में बहस होनी चाहिए. उन्होंने दावा किया कि 600 से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं. वहीं आज करीब 75 लाख किसान पीड़ित हैं. केटीआर के शब्दों में कांग्रेस ने किसानों के साथ विश्वासघात किया है जिस पर विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए. छह गारंटियों को लागू करने में विफलताओं से लेकर 420 अन्य वादों तक, हर मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए.
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