
मई का महीना आते ही देश के लगभग सभी राज्यों में किसान धान का बिचड़े के लिए बीज डालने लगे हैं. दरअसल, धान खरीफ सीजन की मुख्य फसल है. वहीं, किसान जून के अंत और जुलाई महीने में धान खेती करने लगते हैं. बता दें कि धान की खेती के लिए ज्यादा मात्रा में पानी की जरूरत होती है. ऐसे में जो किसान अभी तक धान की रोपाई नहीं किए हैं और धान की जल्दी तैयार होने वाली वैरायटी के बीज ढुंढ रहे हैं तो ये खबर उनके लिए है. दरअसल, राष्ट्रीय बीज निगम किसानों के लिए धान की पूसा बासमती-1718 किस्म का बीच बेच रहा है. ऐसे में अगर आप कम पानी में धान की खेती करना चाहते हैं तो आप इस बीज को घर बैठे मंगवा सकते हैं और धान की खेती कर सकते हैं. आइए जानते हैं कैसे.
भारतीय किसान देश में बड़े स्तर पर धान की खेती करते हैं. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम (National Seeds Corporation) किसानों की सुविधा के लिए ऑनलाइन धान की उन्नत किस्म पूसा बासमती-1718 का बीच बेच रहा है. इस बीज को आप ओएनडीसी के ऑनलाइन स्टोर से खरीद सकते हैं. यहां किसानों को कई अन्य प्रकार की फसलों के बीज भी आसानी से मिल जाएंगे. किसान इसे ऑनलाइन ऑर्डर करके अपने घर पर डिलीवरी करवा सकते हैं.
ये धान की एक खास किस्म है, जिसकी खेती जून के अंत तक आसानी से की जा सकती है. ये किस्म सिंचित अवस्था के लिए उपयुक्त मानी जाती है. PB-1718 (पूसा बासमती 1718) धान की एक उन्नत, सुगंधित और उच्च उपज वाली किस्म है, जो 135-140 दिनों में पकती है. यह 1121 किस्म का सुधरा हुआ संस्करण है, जो झुलसा रोग (BLB) के प्रति प्रतिरोधी है. इसकी पैदावार 20-30 क्विंटल प्रति एकड़ तक होती है, और दाने लंबे, पतले और वजनदार होते हैं, जो इसे अच्छा मुनाफा दिलाते हैं.
अगर आप धान की खेती करना चाहते हैं तो पूसा बासमती 1718 किस्म के 10 किलो वाले बीज का पैकेट फिलहाल 12 फीसदी छूट के साथ 960 रुपये में राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट से खरीद सकते हैं. इसे खरीद कर आप आसानी से धान की खेती कर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.
धान की खेती करने के लिए सबसे पहले खेत को तैयार करना होता है. इसके लिए किसान खेत को अच्छी तरह से जोतकर समतल करें. अगर धान की सीधी बुवाई कर रहे हैं तो खेत में हल्की नमी बनाए रखें. साथ ही अगर परंपरागत तरीके से रोपाई कर रहे हैं तो खेत में पानी जमा कर दें. वहीं, सीधी बुवाई के लिए बीज को खेत में सीधे बुवाई करें, जैसे कि गेहूं की बुवाई करते हैं. इसके साथ ही रोपाई के लिए नर्सरी में उगाए गए धान के पौधों की खेत में रोपाई करें.