
उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने कहा है कि देश में खाद की कोई कमी नहीं है और किसानों को घबराकर खरीदारी करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने बताया कि सरकार की तय नीति के अनुसार ही खाद की कीमतें तय की जाती हैं और फिलहाल खरीफ सीजन के लिए करीब 51 प्रतिशत खाद का स्टॉक पहले से मौजूद है.
अपर्णा शर्मा ने कहा कि सरकार देशभर में संतुलित तरीके से खाद के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है. इसके लिए राज्यों के स्तर पर कई कदम उठाए गए हैं ताकि खाद की जमाखोरी, कालाबाजारी और गलत इस्तेमाल रोका जा सके. शुरुआत में कुछ जगहों पर घबराकर खरीदारी देखी गई थी, लेकिन अब स्थिति सामान्य है और आगे भी पर्याप्त मात्रा में आयात होने वाला है.
सचिव ने जानकारी दी कि यूरिया उत्पादन सामान्य कार्यक्रम के अनुसार चल रहा है. देश में करीब 98 प्रतिशत गैस उपलब्ध है और यूरिया प्लांट पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं. पीएनके (फॉस्फेट और पोटाश आधारित) उर्वरकों का उत्पादन भी देश में जारी है. अमोनिया और सल्फर की उपलब्धता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार अतिरिक्त अमोनिया के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रयास कर रही है. पीएनके खाद बनाने वाली कंपनियों को आपस में बातचीत कर अतिरिक्त अमोनिया का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं.
वित्तीय सहायता के बारे में उन्होंने बताया कि यह सरकार की नीति के अनुसार दी जाती है. पिछले वित्त वर्ष में उर्वरक सब्सिडी के लिए 2.21 लाख करोड़ रुपये का बजट था, जबकि इस साल लगभग 1.77 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. बाजार में कुछ खादों की कीमतें बढ़ी हैं, ऐसे में सरकार सब्सिडी और कंसेशन की राशि तय कर समय पर कंपनियों को भुगतान करेगी, ताकि उनकी नकदी स्थिति बनी रहे.
केंद्रीय सचिव ने कहा कि राज्यों के प्रयासों से खाद की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है और किसानों को जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जाएगी. प्रमुख खादों का MRP (अधिकतम खुदरा मूल्य) जस का तस बना हुआ है. संकट काल के बाद खादों का घरेलू उत्पादन और आयात बढ़कर 76.78 LMT (लाख मीट्रिक टन) तक पहुंच गया है, और आयात 19.94 LMT तक पहुंच गया है. संकट की स्थिति के बाद, खादों की उपलब्धता में कुल 97 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि हुई है.