30% आयात खतरे में, फिर भी खाद पर कोई संकट नहीं! सरकार ने दी गारंटी

30% आयात खतरे में, फिर भी खाद पर कोई संकट नहीं! सरकार ने दी गारंटी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में तेल और खाद की कोई कमी नहीं है. भारत के पास 78 दिनों से अधिक का ऊर्जा भंडार है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक स्रोतों से सप्लाई सुनिश्चित की गई है.

Fertilizer ShortageFertilizer Shortage
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • May 25, 2026,
  • Updated May 25, 2026, 6:17 PM IST

सरकार ने पश्चिम एशिया तनाव के बीच स्पष्ट किया है कि देश में खाद या तेल की कोई कमी नहीं है. संसदीय स्थायी समिति की बैठक में सरकार ने यह बात कही. सूत्रों ने बताया कि बैठक में सरकार ने कहा कि "ऊर्जा स्रोतों या उर्वरक को लेकर कोई संकट नहीं है. सरकार अमेरिका और अन्य देशों सहित, सभी उपलब्ध बाजारों के संपर्क में है." सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने यह भी कहा कि अगर युद्ध खत्म होता है, तो सिर्फ 4-5 दिनों में ही हालात सामान्य हो जाएंगे.

परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने संसद में, पश्चिम एशिया संकट के कारण पैदा हुई बदलती स्थिति पर बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के सचिवों के साथ बैठक की. विदेश मंत्रालय (MEA), वाणिज्य मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने भी इस बैठक में हिस्सा लिया और अपने विचार रखे. यह बैठक लगभग 2 घंटे तक चली.

78 दिनों से भी अधिक का ऊर्जा भंडार

विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधियों ने बताया कि भारत के पास 78 दिनों से भी अधिक का ऊर्जा भंडार उपलब्ध है. उर्वरक की खरीद एक बड़ी चिंता का विषय थी, क्योंकि इसका 30 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से आता है, लेकिन सरकार ने इसे अन्य स्रोतों से हासिल करने का इंतजाम कर लिया है और अपने बाजारों को अलग-अलग सोर्स तक बढ़ाया है.

सूत्रों ने सरकार के बयान के बारे में बताया, "ऊर्जा स्रोतों या उर्वरक को लेकर कोई संकट नहीं है. सरकार अमेरिका और अन्य देशों सहित, सभी उपलब्ध बाजारों के संपर्क में है."

मीटिंग में मौजूद सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों ने कमेटी को बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता के बावजूद, देश में एनर्जी सप्लाई या फर्टिलाइजर की उपलब्धता से जुड़ा "कोई फौरी संकट" नहीं है.

सरकारी प्रतिनिधियों ने पैनल को बताया कि भारत के पास अभी 78 दिनों से ज्यादा के लिए एनर्जी रिजर्व मौजूद हैं, जो होर्मुज से जुड़े शिपिंग रास्तों या कच्चे तेल की सप्लाई में किसी भी लंबे समय तक चलने वाली रुकावट के खिलाफ एक बड़ा बफर मुहैया करते हैं.

खादों के इंपोर्ट को लेकर चिंताएं

सूत्रों ने बताया कि मीटिंग के दौरान खादों के इंपोर्ट को लेकर चिंताएं जताई गईं, खासकर इसलिए क्योंकि भारत की खाद से जुड़ी 30 प्रतिशत से ज्यादा सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट वाले रास्ते से जुड़ी है. हालांकि, अधिकारियों ने सांसदों को भरोसा दिलाया कि सरकार ने किसी भी कमी से बचने के लिए पहले ही सोर्सिंग के चैनलों को अलग-अलग देशों की ओर मोड़ दिया है और खरीद के वैकल्पिक इंतजाम शुरू कर दिए हैं.

सूत्रों ने अधिकारियों के हवाले से बताया, "एनर्जी के स्रोतों या फर्टिलाइजर का कोई संकट नहीं है. सरकार अमेरिका और दूसरे देशों समेत सभी उपलब्ध बाजारों के संपर्क में है."

अधिकारियों ने यह भी बताया कि कई मंत्रालयों ने पहले ही बड़े पैमाने पर इमरजेंसी प्लान (contingency planning) तैयार कर लिया है, ताकि अगर इलाके में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो भी सप्लाई चेन चालू रहे.

सूत्रों के मुताबिक, सबसे बड़ा भरोसा लॉजिस्टिक्स और शिपिंग ऑपरेशन संभालने वाले अधिकारियों की तरफ से मिला. उन्होंने पैनल को बताया कि अगर युद्ध जैसी स्थिति शांत होती है, तो चार से पांच दिनों के भीतर कार्गो और सप्लाई की सामान्य आवाजाही फिर से शुरू हो सकती है. यह आकलन इस बात पर आधारित है कि मुख्य समुद्री रास्ते—खासकर होर्मुज स्ट्रेट से होकर जाने वाले रास्ते, जो दुनिया के सबसे अहम तेल ट्रांजिट चोकपॉइंट्स में से एक हैं—चालू रहते हैं और वहां बड़े पैमाने पर कोई सैन्य रुकावट नहीं आती है. 

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच मीटिंग

यह मीटिंग ऐसे समय में हो रही है, जब पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष के कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग इंश्योरेंस की लागत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ने वाले असर को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है. भारत, जो अपने कच्चे तेल और फर्टिलाइजर का एक बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है, इस इलाके में हो रहे घटनाक्रम पर करीब से नजर रखे हुए है.

सूत्रों ने बताया कि सरकार की रणनीति अभी तीन मुख्य बातों पर टिकी है—रणनीतिक रिजर्व बनाए रखना, इंपोर्ट के स्रोतों को अलग-अलग देशों तक फैलाना और शिपिंग, एनर्जी, व्यापार और कूटनीति संभालने वाले मंत्रालयों के बीच करीबी तालमेल बनाना.

अधिकारियों ने कमेटी को उन प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी, जो यह सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे हैं कि अगर पश्चिम एशिया में स्थिति और बिगड़ती है, तो भी भारत के बंदरगाह और शिपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, रास्तों में बदलाव या इमरजेंसी कार्गो प्रबंधन की जरूरतों को संभालने के लिए तैयार रहें.(हिमांशु मिश्रा की रिपोर्ट)

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