Farmers-Breeders: बीज-प्लांट से पैसा-शोहरत दोनों दिलाता है PPV&FR एक्ट, लेकिन करना होगा ये काम 

Farmers-Breeders: बीज-प्लांट से पैसा-शोहरत दोनों दिलाता है PPV&FR एक्ट, लेकिन करना होगा ये काम 

Farmers-Breeders प्लांट और बीज की नई किस्मों के विकास को बढ़ावा देने और नई किस्मों को बेहतर बनाने और उपलब्ध कराने में किसानों और ब्रीडर्स के योगदान को मान्यता देने के लिए प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट-वैरायटी एंड फार्मर्स राइट्स एक्ट 2001 बनाया गया है. यही वो एक्ट है जो किसान और ब्रीडर्स को पैसा और नाम दोनों कमाने का मौका दिलाता है. 

Grow fennel at homeGrow fennel at home
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jul 06, 2026,
  • Updated Jul 06, 2026, 5:01 PM IST

आप किसान है और आपने अनाज, दलहन, तिलहन या फिर फल-सब्जी के मामले में कोई बीज या प्लांट तैयार किया है तो आप पैसा और शोहरत दोनों ही पाने के हकदार हैं. लेकिन इसके लिए आपको अपने बीज या प्लांट का रजिस्ट्रेशन कराना होगा. रजिस्ट्रेशन कराना कोई मुश्किल काम नहीं है. इसके लिए प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट-वैरायटी एंड फार्मर्स राइट्स एक्ट 2001 के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इसका एक बड़ा फायदा ये भी है कि बीज-प्लांट जो भी है उस पर आपका अधि‍कार हो जाएगा. कोई और व्यक्तिट उस पर अपना दावा नहीं कर पाएगा. 

इस एक्ट का फायदा सिर्फ किसान ही नहीं रिसर्च सेंटर और यूनिवर्सिटी से जुड़े प्लांट ब्रीडर भी उठाते हैं. जानकारों की मानें तो ब्रीडर समेत हजारों की सुख्या में किसान इस योजना का फायदा उठ चुके हैं. हजारों की संख्या में वैराइटी दर्ज हो चुकी हैं. इसमे फूल से लेकर मसाले तक शामिल हैं. गौरतलब रहे पौधों की वैराइटी के संरक्षण और किसानों, पौधों के ब्रीडर्स के अधिकारों की रक्षा के लिए ये एक्ट बनाया गया है. 

किस बीज-प्लांट का रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं 

  • अनाज- धान (चावल), गेँहू, मक्का, ज्वार, बाजरा, जौ आदि.
  • दलहन व दालें- चना, अरहर, मूंग, मसूर, उड़द आदि.
  • तिलहन- सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, अरंडी आदि.
  • सब्जियां- आलू, टमाटर, प्याज, गोभी, भिंडी, बैंगन आदि.
  • रेशे वाली फसलें- कपास, जूट, सनई आदि.
  • फल-फूल- आम, केला, अमरूद, गुलाब, गेंदा आदि.
  • मसाले- हल्दी, धनिया, जीरा, काली मिर्च आदि.

कौन लोग रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं 

किसान की किस्में- ऐसी किस्म  जो किसानों द्वारा विकसित या संरक्षित की जाती हैं.
नई किस्में- ऐसी नई किस्में जो प्रजनकों (Breeders) द्वारा नई विकसित की जाती हैं.

किसे-कितनी देनी होगी फीस

  • नई किस्मों के लिए-
  • व्यक्तिगत- 7 हजार रुपये.
  • शैक्षि‍क- 10 हजार रुपये. 
  • कर्मिशि‍यल- 50 हजार रुपये.

मौजूदा किस्में जिनके बारे में आम जानकारी उपलब्ध है

  • व्यक्तिगत- 7 हजार रुपये.
  • शैक्षि‍क- 10 हजार रुपये. 
  • कर्मिशि‍यल- 50 हजार रुपये.
  • किसान- निशुल्क.

रजिस्ट्रेशन कराने में ये करेंगे मदद

  • कृषि विज्ञान केंद्र
  • राज्य कृषि विश्वविद्यालय
  • राज्य जैव-विविधता बोर्ड
  • जैव-विविधता प्रबंधन समिति
  • राज्य कृषि विभाग
  • कृषि विकास से जुड़े NGO
  • PPV & FR अथॉरिटी का किसान सेल.

ऐसे होगा किसानों की वैराइटी का रजिस्ट्रेशन

  • किसानों की किस्मों का रजिस्ट्रेशन भी उसी तरह किया जाएगा जैसे किसी दूसरी श्रेणी की किस्मों का किया जाता है.
  • कोई किसान, किसानों का समूह या समुदाय किसानों की किसी किस्म के रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर सकता है.
  • किसानों के लिए आवेदन और किसी भी अन्य प्रक्रिया के लिए कोई फीस नहीं है.
  • आवेदक किसान को एक फॉर्म भरना होगा और उस पूरे फॉर्म को उस किस्म के बीजों के साथ PPV & FR अथॉरिटी के पास जमा करना होगा.

ये भी पढ़ें: 

Milk Production: गाय-भैंस के बच्चा देने के बाद इन 5 कारणों से कम हो सकता है दूध उत्पादन

EL-Nino: डेयरी-पशुपालन पर बढ़ा अल नीनो का खतरा, कम हो सकता है दूध उत्पादन!

MORE NEWS

Read more!