उर्वरक संकट की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ में 9.29 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध, नैनो डीएपी पर जोर

उर्वरक संकट की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ में 9.29 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध, नैनो डीएपी पर जोर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ सीजन के लिए उर्वरक आपूर्ति मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है.किसानों को नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और जैविक खाद जैसे विकल्प अपनाने की सलाह दी गई है.राज्य में फिलहाल 9.29 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है,

धर्मेंद्र सिंह
  • Raipur ,
  • May 28, 2026,
  • Updated May 28, 2026, 11:53 AM IST

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण आयातित रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ सीजन 2026 के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है. राज्य सरकार ने किसानों को पारंपरिक रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, नील-हरित काई, जैविक खाद और हरी खाद जैसे विकल्प अपनाने की अपील की है, ताकि खेती और उत्पादन पर किसी प्रकार का असर न पड़े.

सरकार के अनुसार वर्तमान में प्रदेश के गोदामों और सहकारी समितियों में लगभग 9.29 लाख मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों का भंडारण उपलब्ध है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 60 प्रतिशत है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को खरीफ सीजन 2026 के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आवंटित किया है. यह पिछले वित्तीय वर्ष की कुल खपत 14.62 लाख मीट्रिक टन से करीब 93 हजार मीट्रिक टन अधिक है.

नैनो डीएपी और नैनो यूरिया पर विशेष जोर

राज्य शासन अब तरल नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के समानांतर भंडारण और उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है. कृषि विभाग द्वारा “कृषि क्रांति की ओर एक कदम” अभियान के माध्यम से किसानों को नैनो डीएपी के उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है.

विशेषज्ञों के अनुसार नैनो डीएपी फॉस्फोरस और नाइट्रोजन युक्त उन्नत तरल उर्वरक है, जो कम लागत में संतुलित पोषण प्रदान करता है. इससे रासायनिक डीएपी पर निर्भरता कम होगी और उर्वरक उपयोग की दक्षता बढ़ेगी. विभागीय आंकड़ों के अनुसार जहां 50 किलोग्राम पारंपरिक डीएपी पर लगभग 1350 रुपये खर्च होते हैं, वहीं 25 किलोग्राम डीएपी और 500 मिली नैनो डीएपी के संयुक्त उपयोग से यह लागत घटकर लगभग 1275 रुपये रह जाती है.

किसानों को बताई गई वैज्ञानिक उपयोग विधि

कृषि विभाग ने नैनो डीएपी के उपयोग की वैज्ञानिक पद्धति भी जारी की है. किसानों को सलाह दी गई है कि वे आधार खाद के रूप में 25 किलोग्राम डीएपी अथवा 75 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट या 38 किलोग्राम 12:32:16 मिश्रित उर्वरक का उपयोग करें.

इसके अलावा:बीज उपचार के लिए 150 मिली नैनो डीएपी को 3 लीटर पानी में मिलाने की सलाह दी गई है.

पौध उपचार हेतु 250 मिली नैनो डीएपी को 50 लीटर पानी में घोलकर जड़ों का उपचार करने को कहा गया है.रोपाई के लगभग 30 दिन बाद 250 मिली नैनो डीएपी को 125 लीटर पानी में मिलाकर फसल पर छिड़काव करने की सिफारिश की गई है.

वैकल्पिक उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर

कृषि मंत्री नेताम ने कहा कि पश्चिम एशियाई संकट को देखते हुए विभाग किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित कर रहा है. इसके तहत एनपीके 12:32:16, 20:20:0:13, हरी खाद, जैविक खाद और नैनो उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है.

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा राज्य को आवंटित 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों में:

  • 7.25 लाख मीट्रिक टन यूरिया
  •  3 लाख मीट्रिक टन डीएपी
  • 80 हजार मीट्रिक टन एमओपी
  • 2.5 लाख मीट्रिक टन एनपीके
  • 2 लाख मीट्रिक टन एसएसपी शामिल हैं.

कालाबाजारी रोकने के लिए सख्ती

कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा कि राज्य स्तर पर खाद वितरण व्यवस्था की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. सभी जिलों में उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों के गठन के निर्देश दिए गए हैं. किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

दलहन-तिलहन और उद्यानिकी फसलों को भी बढ़ावा

राज्य सरकार खरीफ सीजन में केवल धान पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी काम कर रही है. प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत दलहन और तिलहन फसलों के उत्पादन और उपार्जन को प्राथमिकता दी जा रही है.साथ ही सुगंधित धान, ऑयल पाम, मखाना और मसाला फसलों के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है.सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे वैज्ञानिक खेती और आधुनिक उर्वरक प्रबंधन तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती की लागत भी कम करें. 

 

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