बिहार में खरीफ की खेती ने पकड़ी रफ्तार, अल नीनो के बावजूद 28% तक पहुंची धान की रोपनी

बिहार में खरीफ की खेती ने पकड़ी रफ्तार, अल नीनो के बावजूद 28% तक पहुंची धान की रोपनी

अल नीनो के प्रभाव के बावजूद बिहार में खरीफ खेती ने रफ्तार पकड़ ली है. राज्य में धान की रोपनी 28 फीसदी से अधिक क्षेत्र में पूरी हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी बेहतर है. जुलाई में हुई अपेक्षाकृत अच्छी बारिश और किसानों की सक्रियता से धान की खेती को गति मिली है, जिससे कृषि क्षेत्र में सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं.

धान की बुवाई में देरीधान की बुवाई में देरी
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • Patna,
  • Jul 14, 2026,
  • Updated Jul 14, 2026, 7:42 PM IST

जुलाई महीने की शुरुआत के साथ ही खरीफ सीजन की खेती रफ्तार पकड़ लेती है, लेकिन इस साल अल नीनो के प्रभाव की वजह से देश के कई राज्यों में खरीफ सीजन की खेती धीमी पड़ी हुई है. लेकिन बिहार के परिप्रेक्ष्य में यह स्थिति पूरी तरह से उलट नजर आ रही है. खबर लिखे जाने तक बिहार में धान की रोपनी करीब 28 फीसदी (10 लाख 54 हजार 426 हेक्टेयर) के आसपास पहुंच चुकी है, जबकि पिछले साल जुलाई के मध्य तक धान की रोपनी करीब 9.5 फीसदी के आसपास ही हो पाई थी. यानी जहां सुखाड़ और बेमौसम बारिश की वजह कई राज्य की खेती प्रभावित दिख रही है. वहीं बिहार में हाल के समय स्थिति थोड़ी बेहतर कही जा सकती है.

अल नीनो के बीच इस जुलाई में अच्छी बारिश

बारिश की रफ्तार भी पिछले वर्षों की तुलना में इस बार अच्छी दिख रही है. कृषि विभाग के अनुसार, 1 जून से 14 जुलाई के बीच इस साल बारिश सामान्य से करीब 41 फीसदी कम हुई है. वहीं, बीते साल यानी 2025 में यह आंकड़ा 55 फीसदी तक था. अगर 1 जुलाई से 14 जुलाई के बीच राज्य में हुई बारिश की बात करें, तो सामान्य वर्षा 160.7 मिमी होनी चाहिए थी, जबकि इसके मुकाबले 103.6 मिमी के आसपास बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब 35.5 फीसदी कम है. वहीं, बीते साल इसी अवधि में 41.1 मिमी बारिश हुई थी, जो  करीब 74.4 फीसदी कम थी.

धान की रोपनी  में 16 प्रतिशत वृद्धि

जुलाई के पहले सप्ताह में, जहां धान की खेती करीब 37 लाख 83 हजार हेक्टेयर के लक्ष्य की तुलना में करीब 12 फीसदी ही हो पाई थी, लेकिन गत दो से तीन दिनों के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में हुई बारिश की वजह से यह आंकड़ा करीब 16 फीसदी बढ़ गया है. वहीं, हाल के समय में बिहार के पश्चिमी चंपारण में धान की रोपनी 1 लाख 28 हजार 255 हेक्टेयर के लक्ष्य की तुलना में 1 लाख 18 हजार 93 हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है, यानी करीब 92 फीसदी धान की खेती पूरी कर ली गई है. वहीं, जमुई जिले में धान की रोपनी 69,501 हेक्टेयर की तुलना में 219 हेक्टेयर में हो पाई है.(करीब 1 प्रतिशत से भी कम)

इन पांच जिलों में सबसे अधिक धान की खेती

बिहार में खरीफ सीजन के दौरान इस साल 37 लाख 83 हजार 946 हेक्टेयर में धान की खेती होनी है. इसमें रोहतास जिले में सबसे अधिक धान की खेती का लक्ष्य है, यहां करीब 2 लाख 7 हजार 630 हेक्टेयर का लक्ष्य है, लेकिन अभी तक केवल 6 फीसदी (12622हे.) में धान की रोपनी हो पाई है. पूर्वी चंपारण में करीब 1 लाख 88 हजार हेक्टेयर लक्ष्य की तुलना में 39 फीसदी (72,613 हेक्टेयर) रोपनी हुई है.

गयाजी जिले में करीब 1 लाख 88 हजार 512 हेक्टेयर के लक्ष्य की तुलना में 1 फीसदी (1,011 हेक्टेयर), मधुबनी में 1 लाख 66 हजार 533 हेक्टेयर के लक्ष्य की तुलना में 45 फीसदी (74,964 हेक्टेयर) और मुजफ्फरपुर जिले में 1 लाख 54 हजार 88 हेक्टेयर के लक्ष्य की तुलना में 35 फीसदी (53,520 हेक्टेयर) तक रोपनी हो पाई है. ये आंकड़े 14 जुलाई तक के हैं. अगर इन आंकड़ों पर ध्यान दिया जाए तो राज्य के कई ऐसे जिले हैं जहां धान की खेती अच्छी होती है लेकिन वहां पर अभी रफ्तार काफी धीमी है.

MORE NEWS

Read more!