
झारखंड में किसानों को राहत पहुंचान के लिए राज्य सरकार द्वारा अनुदानित दर पर किसानों के बीच बीज का वितरण किया जाता है. ब्लॉक चेन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जा सके. पिछले साल भी इस नई तकनीक का इस्तेमाल करके बीज वितरण करने वाला झारखंड पहला राज्य बना था. पर इस तकनीक में भी शायद खामिया हैं इसलिए झारखंड के किसान अब सब्सिडी पर धान के बीज लेने से इनकार कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि धान की फसल उनकी पूरे साल की पूंजी होती है ऐसे में उन्हें अगर सही खाद बीज नहीं मिलता है तो वो पूरी तरह बर्बाद हो जाते है. इसलिए किसानों का कहना है कि उन्हें सब्सिडी पर धान नहीं बल्कि पैसे सीधे उनके खाते में ट्रांसफर किया जाना चाहिए, ताकि वो अपने हिसाब से धान के बीज खरीद सके.
किसानों का कहना है कि उत्पादन उनके लिए बड़ी समस्या है. बल्कि सही समय पर सही खाद बीज का नहीं मिलना उनके लिए परेशानी का सबब बन जाता है. रांची जिले के किसान अजय नाथ शाहदेव बताते हैं कि अनुदान में बीज वितरण के नाम पर किसान ठगे जाते हैं. उन्होंने कई उदाहरण देकर बताया कि सरकार की तरफ से जो बीज मिलते हैं उनकी गुणवत्ता सही नही होती है. इसके कारण नर्सरी तैयार करने पर बीज का अंकुरण सही तरीके से नहीं हो पाता है. जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि किसानों को धान पर जो अनुदान दिया जाता है वो बेहद कम होता है. अनुदान के नाम पर किसानों से अधिक पैसे लिए जाते हैं.
वहीं धान बीज के वितरण में गड़बड़ी की शिकायत के आधार पर झारखंड राज्य कृषि निदेशक ने भी कार्रवाई के आदेश दिए हैं. देवघर जिला कृषि पदाधिकारी को लिखे गए पत्र में उन्होने देघवर में बीज वितरण में बरती जा रही अनियमितता को लेकर जांच के आदेश दिए हैं. हालांकि विभाग की तरफ से जो पत्र लिखा गया है उसमें दिए गए नंबर से रांची जिले के लापुंग प्रखंड अतंर्गत किसान नामधर सिंह से जब किसान तक ने बात की तो उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा धान 6 पैकेट मिला है. उन्होंने कहा कि 15 जून को उन्हें धान मिला था पर पत्र में धान मिलने की तारीख 27 जून बताई गई है. साथ ही किसान को जो धान दिया गया है वो शून्य लिखा गया है.
किसानों को मिला है कम धान
वहीं देवघर जिले के किसान निरंजन प्रसाद राय ने कहा कि दो आधार कार्ड पर उन्हें 12 किलो धान मिला है. एक आधार कार्ड में छह किलो धान मिलता है. पर पत्र में जो मात्रा दिखाई गई है उसमें 130 किलो दिखाया गया है. गौरतलब है कि झारखंड किसान महासभा ने भी धान बीज के वितरण में अनियमितता की शिकायत की थी. देवघर जिला कृषि पदाधिकारी को लिखे गए पत्र में निदेशक झारखंड ने कहा है कि रैंडम वेरीफिकेशन के दौरान किसानों को बीज प्राप्त करने की मात्रा में और ब्लॉकचेन सिस्टम के जरिए बीज वितरण करने में अंतर पाया गया है.