
देश के कई हिस्सों में इस सप्ताह अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है. खासकर, उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान 4-6 डिग्री सेल्सियस और मध्य भारत में 3-5 डिग्री सेल्सियस तक सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार, कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर में 4 से 8 मार्च के बीच हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है. हिमाचल प्रदेश में 7 और 8 मार्च और उत्तराखंड में 8 मार्च को हल्की बारिश/बर्फबारी की संभावना है.
दिल्ली में पिछले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं आया जबकि अधिकतम तापमान में 1-2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट देखी गई. अधिकतम तापमान 30-31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 15-16 डिग्री के बीच रहा. न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक और अधिकतम तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहा. आकाश मुख्य रूप से साफ रहा और दक्षिण-पश्चिम दिशा से हवाएँ 20 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलीं, जो 37 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ी. अगले चार दिनों तक भी दिल्ली में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर बना रहेगा. 2 मार्च को अधिकतम तापमान 29-31 डिग्री, 3 मार्च को 30-32 डिग्री, 4 मार्च को 32-34 डिग्री और 5 मार्च को 33-35 डिग्री के बीच रहने की संभावना है.
इस गर्मी का सीधा असर खेती पर पड़ सकता है. जम्मू और कश्मीर में गेहूँ, सरसों और सब्जियों में हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है. हिमाचल प्रदेश में गेहूँ और जल्दी पकने वाली सब्जियों की सुरक्षा सिंचाई करनी चाहिए. पंजाब में सरसों, गोभी और आलू में मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए नियमित सिंचाई आवश्यक है. हरियाणा में फूल और फल देने वाले सरसों और चना की हल्की सिंचाई करनी चाहिए. उत्तराखंड में गेहूँ, मसूर, चना और सरसों की महत्वपूर्ण वृद्धि अवस्थाओं में हल्की और बार-बार सिंचाई की जानी चाहिए. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गेहूँ, सरसों, चना, आलू और जल्दी बुवाई की गन्ना में हल्की और बार-बार सिंचाई की आवश्यकता है. राजस्थान में जीरा, इसबगोल, सरसों और चना में सुरक्षा सिंचाई करनी चाहिए. उत्तर प्रदेश में गेहूँ के दाने भरने की अवस्था, सरसों और चना में सुबह या शाम को हल्की सिंचाई करनी चाहिए. खेतों में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग, उचित खेत किनारे बनाना और अनावश्यक जुताई से बचना चाहिए.
गर्म मौसम के दौरान पशुधन और पोल्ट्री पर भी असर पड़ सकता है. जानवरों को साफ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना जरूरी है. उच्च तापमान के प्रभाव को कम करने के लिए पोल्ट्री शेड के छत पर घास या अन्य आवरण से ढ़काव करें. इससे जानवरों और पक्षियों को गर्मी से राहत मिलेगी और उनकी सेहत पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा.
आने वाले दिनों में अधिकांश उत्तर और मध्य भारत में तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है. हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना वाले क्षेत्रों में किसान और स्थानीय लोग सतर्क रहें. कृषि और पशुपालन दोनों ही क्षेत्रों में समय पर उचित उपाय करने से गर्मी के प्रभाव को कम किया जा सकता है. मौसम विभाग की चेतावनियों और सुझावों का पालन करना इस समय बहुत महत्वपूर्ण है.
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