झारखंड के धनबाद जिले में बीच वितरण के दौरान हंगामा मच गया. यहां तोपचांची प्रखंड के हटिया मैदान स्थित किसान सिंगल विंडो सेंटर पर किसानों की भीड़ खड़ी रह गई लेकिन बीज लेने के लिए उनके फोन पर ओटीपी नहीं आया. इसको लेकर भारी हंगामा हुआ.
पैराक्वाट नामक शाकनाशी का उपयोग घर या सामुदायिक भवनों के लॉन, वाणिज्यिक जगंलों में खरपतवार जैसे अवांछित पौधों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. कभी कभी इसका प्रयोग पानी में मौजूद खर-पतवार को नियंत्रित करने के लिए सीधे पानी में ही किया जाता है जो काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है.
उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य एक सेमी हिल एरिया है. जिस वजह से फर्टिलाइजर का फ्रेट रेट काफी ज्यादा बढ़ जाता है और इसका सीधा बोझ यहां के किसानों पर पड़ता है. उन्होंने केंद्रीय मंत्री से अपील की कि फ्रेट रेट में संशोधन कर झारखंड जैसे सेमी हिल एरिया को राहत दी जाए.
किसान महासभा का कहना है कि जिस समय धान की रोपाई खत्म हो जाती है उस समय किसानों को बीज बांटकर सरकार क्या किसानों के साथ मजाक करना चाह रही है. सरकार के पास इतनी बड़ी मंशनरी है, ब्लॉक चेन तकनीक से धान बांटने का दावा करती है ऐसे में राज्य सरकार को जून महीने के अंत तक यह कार्य कर देना चाहिए था,
झारखंड के गुमला जिले में रागी की खेती को लेकर काफी बेहतर कार्य किया गया है. यहां पर मिशन मोड में रागी की खेती को लेकर कार्य किया गया. इसका फायदा यह हुआ कि रागी उत्पादन के मामले में गुमला जिला अव्वल नंबर पर आ गया है
राज्य के कृषि मंत्री का मानना है कि नई नैनो युरिया के इस्तेमाल से किसानों की आय में कमी आ सकती है. नैनौ युरिया को लेकर प्रदेश सरकार की नकारात्मक प्रक्रिया के बाद सूबे में इस पर सियासत तेज हो गई है.
किसानों का कहना है कि उत्पादन उनके लिए बड़ी समस्या है. बल्कि सही समय पर सही खाद बीज का नहीं मिलना उनके लिए परेशानी का सबब बन जाता है. रांची जिले के किसान अजय नाथ शाहदेव बताते हैं कि अनुदान में बीज वितरण के नाम पर किसान ठगे जाते हैं.
मिली शिकायत के आधार पर पुलिस ने भेलवाटांड़ में सुनील शर्मा के आवास में जाकर छापेमारी की. इस दौरान पुलिस को एफएमसी कंपनी का भरे हुए नकली कोराजेन 60 एमएल की 2344 भरी हुई, 60 एमएल कोराजेन की खाली शीशी 255 इसके साथ ही 11200 नकली स्टीकर बरामद किया गया है.
लोहरदगा जिले में एग्री क्लीनिक सेंटर के माध्यम से किसानों को उद्यान विकास योजना की जानकारी दी गई. इस दौरान उन्हें मिर्चा, टमाटर, स्ट्रॉबेरी बीज के बारे में बताया गया और धान का बीज लेने के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बारे में बताया गया.
प्रिंस राज ने कहां कि फाइनेंस कंपनी छोड़कर कृषि के क्षेत्र में आने का फैसला करना एक बड़ा फैसला था, इसमें रिस्क भी था पर पत्नी और परिवार ने साथ दिया इसके बाद वो इस क्षेत्र में आ गए. सबसे पहले उन्होंने अपने दोस्त के साथ मिलकर दो एकड़ जमीन लीज में लिया.
धान झारखंड राज्य की प्रमुख फसल है. यहां के अधिकांश भागों में रोहिणी नक्षत्र के साथ ही बिचड़ा तैयार करने का कार्य शुरू हो जाता है. अच्छी पैदावार हासिल करने के लिए अच्छा और स्वस्थ बिचड़ा का होना जरूरी होता है.
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार ने 12 लाख किसानों को 3500 रुपये प्रति किसान मुख्यमंत्री फसल राहत योजना के तहत मुहैया कराया है साथ ही पांच लाख किसानों का सरकार ने लोन माफ किया है.
जैविक खेती को अपना चुके किसान खद्दी उरांव बताते हैं कि उन्होंने पहले अखबारों और अन्य माध्यमों से जैविक खेती के बारे में सुना था. वो इसकी इस तकनीक को अपनाना चाहते थे पर सही और उचित जानकारी नहीं होने के कारण इसे अपना नहीं पा रहे थे.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today