
जायद सीजन आते ही देश के कई राज्यों में एक बार दोबारा खाद की किल्लत नजर आने लगी है. ऐसा ही नजारा उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में देखने को मिला, जहां यूरिया की किल्लत ने ऐसा बवाल खड़ा किया कि सहकारी समिति का परिसर ही जंग का मैदान बन गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रहा है कि कहीं पीले बोरों पर मारामारी, कहीं खींचतान, तो कहीं सिर पर रखकर भागते लोग, जिसने जितना उठा लिया, वहीं उसका! किसी ने एक बोरा दबोचा, किसी ने दो… तो किसी ने ट्रैक्टर-ट्रॉली तक लाद दी. हालात ऐसे कि न कतार, न पर्ची, बस “लूट लो, ले जाओ” की अफरातफरी.
दरअसल, मामला बागपत जिले के बिनौली क्षेत्र के रंछाड गांव का बताया जा रहा है. यहां स्थित बहुउद्देश्यीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति में यूरिया उपलब्ध होने की सूचना जैसे ही गांव-देहात में फैली, सैकड़ों किसान मौके पर पहुंच गए. शुरुआत में वितरण की बात हुई, लेकिन देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई.
वायरल वीडियो में दिख कई लोग बिना पर्ची और बिना औपचारिक प्रक्रिया के सीधे गोदाम के अंदर घुस गए और यूरिया के बोरों पर टूट पड़े. कोई बोरा कंधे पर डालकर निकल गया, तो कोई बगल में दबाकर भीड़ चीरता हुआ बाहर भागा. जवान हो या बुजुर्ग-हर कोई खाद लेने की होड़ में शामिल दिखा, लेकिन बड़ी बात ये है कि क्या यह सिर्फ “खाद की लूट” है या फिर किसानों की बेबसी की तस्वीर? जब जरूरत के वक्त संसाधन सीमित हों और व्यवस्था कमजोर पड़े, तो हालात ऐसे ही बेकाबू हो जाते हैं.
वहीं वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन और सहकारी समिति के जिम्मेदारों पर सवाल उठ रहे हैं. इतनी बड़ी संख्या में किसानों की भीड़ और खुलेआम बोरों की उठापटक, क्या यह प्रशासनिक चूक नहीं है? फिलहाल संबंधित अधिकारी खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं.
हालांकि, ऐसी ही हालात अभी कुछ महीनों पहले रबी सीजन के दौरान देखने को मिलता था, जहां किसान सुबह से लेकर रात तक खाद लेने के लिए लाइनों में भूखे-प्यासे खड़े दिखते थे. वहीं, कई ऐसे भी मामले सामने आए थे, जिसमें खाद को लेकर किसान और प्रशासन में हाथापाई तक हो गई और किसानों पर डंडे चलाए गए. (मनुदेव की रिपोर्ट)